Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Tuesday, August 18
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Hot issue

    ग्लेशियर पर हो भारत का अपना अध्ययन

    By February 19, 2018Updated:February 22, 2018 Hot issue No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 739
    पंकज चतुर्वेदी 

     

    संयुक्त राष्ट्र  की वैश्विक पर्यावरण पूर्वानुमान कमेटी ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि जिस तरह से धरती का तापमान बढ़ रहा है उससे सन 2050 तक समुद्र  के किनारे बसे दुनिया के दस श हरों में तबाही आ सकती है। इसमें भारत के मुंबई, कोलकाता जैसे श हरों पर भी गंभीर खतरा बताया गया है। अनियोजित विकास,बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के चलते समुद्र में पानी की मात्रा बढ़ेगी और इस विस्तार से तटों पर बसे षहर तबाह हो सकते हैं। हालंाकि यह कोई नई या पहली बार दी गई चेतावनी नहीं है। फरवरी 1981 में रायल स्विस सोसायटी के तत्वावधान में स्टोकहोम में संपन्न एक गोष्ठी  में कार्बन डाय आक्साईड की बढ़ती मात्रा पर चिंता व्यक्त की गई थी। हां बस उस गोश्ठी में यह तथ्य सामने आया था कि कार्बन की मात्रा बढ़ने का फायदा भारत सहित एशिया के कई देशेां व अफ्रीकी दुनिया को होगा। धरती के बढ़ते तापमान से भरत के लिए सबसे बड़ा खतरा ग्लैशियर गलने का है क्योंकि हमारी नदियां हमारे समाज, प्रकृति और अर्थ का मूल आधार हैं व ग्लैशियर के गलने से इस पर विपरीत असर पड़ सकता है।

    विडंबना है कि अत्याधुनिक मशीनों, कार्बन उर्जा के अंधाधुंध इस्तेमाल से दुनिया का मिजाज बिगाड़ने वाले पश्चिमी देश अब भारत व तीसरी दुनिया के देशेां पर दवाब बना रहे हैं कि धरती को बचाने के लिए कार्बन उत्सर्जन कम करकें। हालांकि आज भी भारत जैसे देशेां में इसकी मात्रा कम ही है। इसके बावजूद पश्चिमी देश हमें अपने शोध के माध्यम से भयभीत कर कार्बन मात्रा कम करने या यों कहें कि विकास परियोजनाआंे, परिवहन आदि की गति को नियंत्रित करने केलिए धमकाते रहते हैं।

    Image result for glashear melt

    कोई दो दशक पहले प्रिंस्टन विश्वविद्यायल के एक शो ध में बताया गया था कि जिस तरह से धरती पर कार्बन की मात्रा बढ़ रही है उससे अनुमान है कि धरातल पर तापमान में 20 डिगरी तक की बढ़ौतरी हो सकती है। इससे भारत सहीत उत्तरी व पूर्वी अफ्रीका, पश्चिम एशिया आदि इलाकों में बारिश की मात्रा बढेगी, जबकि अमेरिका, रूस सहीत पश्चिमी देशों में बारिश कम होगी। अनुमान है कि इस बदलाव से आने वाले 50 सालों में भारत सहित वर्शा संभावित देशेां में खेती संपन्न होगी। इन इलाकों में खेत इतना सोना उगलेंगे कि वे खाद्य मामले में आत्मनिर्भर हो जाएंगे तथा आयात पूरी तरह बंद कर देंगे। यह भी सही है कि कार्बन डाय आक्साईड के कारण तापमान में बढ़ौतरी के चलते एंटार्कटिका, ग्रीन लैंड और आर्कटिक प्रदेशों में बर्फ पिघलेगी। समझा जाता है कि वहां से इतनी बर्फ पिघलेगी कि विश्व में सागर का जल स्तर तीन से 18 मीटर तक ऊपर उठेगा और इससे 10 प्रतिशत तटीय भूमि जल-मग्न हो सकती है।

    धरती में कार्बन का बड़ा भंडार जंगलों में हरियाली के बीच है। पेड़ , प्रकाश संश्लेशण के माध्यम से हर साल कोई सौ अरब टन यानि पांच फीसदी कार्बन वातावरण में पुनर्चक्रित करते है। आज विश्व में अमेरिका सबसे ज्यादा 1,03,30,000 किलो टन कार्बन डाय आक्साईड उत्सर्जित करता है जो कि वहां की आबादी के अनुसार प्रति व्यक्ति 7.4 टन है।  उसके बाद कनाड़ा प्रति व्यक्ति 15.7 टन, फिर रूस 12.6 टन हैं । जापान, जर्मनी, द.कोरिया आदि औद्योगिक देशो में भी कार्बन उत्सर्जन 10 टन प्रति व्यक्ति से ज्यादा ही है। इसकी तुलना में भारत महज 20 लाख सत्तर हजार किलो टन या प्रति व्यक्ति महज 1.7 टन कार्बन डाय आक्साईड ही उत्सर्जित करता है। अनुमान है कि यह 203 तक तीन गुणा यानि अधिकतम पांच तक जा सकता है। इसमें कोई षक नहीं कि प्राकृतिक आपदाएं देशों की भौगोलिक सीमाएं देख कर तो हमला करती नहीं हैं। चूंकि भारत नदियों का देश है,  वह भी अधिकांश ऐसी नदियां जो पहाड़ों पर बरफ पिघलने से बनती हैं, सो हमें हरसंभव प्रयास करने ही चाहिए। प्रकृति में कार्बन की मात्रा बढने का प्रमुख कारण है बिजली की बढती खपता। सनद रहे हम द्वारा प्रयोग में लाई गई बिजली ज्यादातर जीवाश्म ईंधन (जैसे कोयला, प्राकृतिक गैस और तेल जैसी प्राकृतिक चीजों) से बनती है। इंधनों के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड निकलता है। हम जितनी ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करेंगे, बिजली के उत्पादन के लिए उतने ही ज्यादा ईंधन की खपत होगी और उससे उतना ही ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होगा। फिर धरती पर बढती आबादी और उसके द्वारा पेट भरने के लिए उपभेाग किया गया अन्न भी कार्बन बढौतरी का बड़ा कारण है। खासकर तब जब हम तैयार खाद्य पदार्थ खाते हैं, या फिर हम ऐसे पदार्थ खाते हैं जिनका उत्पादन स्थानीय तौर पर नहीं हुआ हो।

    यहां एक बात और गौर करने वाली है कि भले ही पश्चिमी देश इस बात से हमें डरा रहे हों कि जलवायु परिवर्तन से हमारे ग्लेशियर पिघल रहे हैं व इससे हमारी नदियांें के अस्तित्व पर संकट है, लेकिन वास्तविकता में हिमालय के ग्लेशियरों का आकार बढ़ रहा है।  हमारे पांच से 10 वर्ग किलोमीटर आकार के किछकुंदन, अख्ताश और च्योंकुंदन के अलावा अन्य सात बगैर नाम वाले ग्लेशियरों का आकार साल दर साल बढ़ रहा है। कोई चार साल पहले तत्कालीन पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश को भी दाल में कुछ काला लगा था और उन्होंने विदेशी धन पर चल रहे षोध के बजाए वीके रैना के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के एक दल को हिमनदों की हकीकत की पड़ताल का काम सौंपा था। इस दल ने 25 बड़े ग्लेशियरों को लेकर गत 150 साल के आंकड़ों को खंगाला और पाया कि हिमालय में ग्लेशियरों के पीछे खिसकने का सिलसिला काफी पुराना है और बीते कुछ सालों के दौरान इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं देखने को मिला है। पश्चिमी हिमालय की हिंदुकुश और कराकोरम पर्वत श्रंखलाओं के 230 ग्लेशियरों के समूह समस विकसित हो रहे है। पाकिस्तान के के-2 और नंदा पर्वत के हिमनद 1980 से लगातार आगे बढ़ रहे है। जम्मू-कश्मीर के केंग्रिज व डुरंग ग्लेशियर बीते 100 सालों के दौरान अपने स्थान से एक ईंच भी नहीं हिले है।।  सन 200 के बाद गंगोत्री के सिकुड़ने की गति भी कम हो गई है।  इस दल ने इस आशंका को भी निर्मूल माना था कि जल्द ही ग्लेशियर लुप्त हो जाएंगे व भारत में कयामत आ जाएगी। यही नहीं ग्लेशियरों के पिघलने के कारण सनसनी व वाहवाही लूटने वाले आईपीसीसी के दल ने इन निश्कर्शों पर ना तो कोई सफाई दी और ना ही इस का विरोध किया। जम्मू कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रो. आरके गंजू ने भी अपने षोध में कहा है कि ग्लेशियरों के पिघलने का कारण धरती का गरम हो ना नहीं हैं। यदि ऐसा होता तो पश्मिोत्तर पहाड़ों पर कम और पूर्वोत्तर में ज्यदा ग्लेशियर पिघलते, लेकिन हो इसका उलटा रहा है।

    Image result for glashear melt

    इसमें कोई षक नहीं  कि ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियर हमारे लिए उतने ही जरूरी है जितना साफ हवा या पानी, लेकिन यह भी सच है कि अभी तक हम इन तीनों मसलों के अनंत सत्यों को पहचान ही नहीं पाए है और पूरी तरह पश्चिमी देशों के षोध व चेतावनियों पर आधारित अपनी योजनांए बनाते रहते हैं। ग्लेशियर हमारे देश के अस्तित्व की पहचान हैं और इनका अस्तित्व मौसम के चक्र में आ रहे बदलाव पर काफी कुछ निर्भर है। हमें यह समझना होगा कि कुछ पश्चिमी देश इस अभेद संरचना के रहस्यों को जाननेे में रूचि केवल इस लिए रखते हैं ताकि भारत की किसी कमजोर कड़ी को तैयार किया  जा सके। इसी फिराक में ग्लोबल वार्मिंग व ग्लेशियर पिघलने के षोर होते हैं और ऐसे में षोध के नाम पर अन्य हित साधने का भी अंदेशा बना हुआ है। ऐस अंतरविरोधों व आशंकाओं के निर्मूलन का एक ही तरीका है कि राज्य में ग्लैशियर अध्ययन के लिए  सर्वसुविधा व अधिकार संपन्न प्राधिकारण का गठन किया जाए जिसका संचालन केंद्र के हाथों में हो। इससे हमें एक तो यह पता चलेगा कि क्या वास्तव में दुनिया में कार्बन प्रिट कम करने का ज्यादा जिम्मा भारत व ऐसे ही विकासशील देशे ंपर ज्यादा है और दूसरा कि क्या पश्चिमी देशों की चेतावनियां हकीकत में तथ्यपूर्ण हैं?

    .लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार है

    #glashear study

    Keep Reading

    Maa Khaira Bhavani had appeared in the form of a divine beam of light.

    ज्योति पुंज के रूप में प्रकट हुईं थीं माँ खैरा भवानी

    People grappling with the unending problem of adulteration.

    मिलावट की अंतहीन समस्या से झूझते लोग

    India's Golden Burst at the Commonwealth Games: Boxing Makes History, Neeraj Shines Again

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का स्वर्णिम धमाका: मुक्केबाजी ने रचा इतिहास, नीरज ने फिर कमाल दिखाया

    India's Glorious Performance: Historic 'Golden Double' and Silver in Judo; Lovpreet Wins Silver in Weightlifting

    भारत का गौरवमयी प्रदर्शन: जूडो में ऐतिहासिक ‘गोल्डन डबल’ और सिल्वर, वेटलिफ्टिंग में लवप्रीत का सिल्वर

    Dreams buried in the silence of hospitals

    अस्पतालों की खामोशी में दफन होते सपने

    Voyager's Discovery and the Cosmic Shivling

    वॉयेजर की खोज और ब्रह्मांडीय शिवलिंग

    Comments are closed.

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Farmers' gathering held in Gokhwal village against forced land acquisition.

    जबरिया हो रहे भूमि अधिग्रहण के खिलाफ गोखवल गाँव में लगी किसान चौपाल

    August 17, 2026
    Homefoil has launched a new campaign with Kareena Kapoor Khan.

    होमफॉइल ने करीना कपूर खान के साथ नया कैंपेन लॉन्च किया

    August 17, 2026
    Heavy rains in UP cause 11 rivers to swell; roads in Lucknow turn into ponds.

    यूपी में भारी बारिश से 11 नदियां उफान पर, लखनऊ में सड़कें तालाब बनीं

    August 17, 2026
    Fed grain to a peacock, gave fodder to a cow... PM Modi shared a video ahead of the Red Fort event.

    मोर को दाना खिलाया, गाय को चारा दिया… पीएम मोदी ने लाल किले से पहले वीडियो साझा किया

    August 17, 2026
    Shiva will play Aurangzeb in ‘Nissa’, while Hemant Birje will portray Mir Bakshi.

    ‘निस्सा’ में शिवा बनेंगे औरंगजेब, हेमंत बिरजे निभाएंगे मीर बख्श

    August 17, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading