भारत और पाकिस्तान के विवाद यूँही नहीं ख़त्म होने वाले हैं क्योंकि दोनों देशों की विचारधारा बिलकुल अलग है और यही कारण है कि दोनों देशों के बीच आए दिन वाद- विवाद और गोला-बारी, फायरिंग होती रहती है हालांकि भारत और पाकिस्तान की सेना के बीच इस समय का वाकयुद्ध दुर्भाग्यपूर्ण है, दोनों पड़ोसी देशों के बीच इस तरह का संबंध होना ही नहीं चाहिए।
लेकिन भारत क्या करे? आखिर थल सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने यही तो कहा है कि बर्बर घटनाओं का जवाब देने के लिए सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है। जिस तरह हमारे एक जवान के साथ बर्बरता हुई, क्या उस पर हमारी सेना चुप रह जाए?

क्या सेना प्रमुख यह कहें कि पाकिस्तान तो साधू देश है और हमारे जवान के साथ आसमान से उतरकर किसी एलियन ने बर्बरता की है? जिस घटना पर पूरा देश उबला हुआ है, उस पर सैन्य महकमे में गुस्सा नहीं हो ऐसा कैसे हो सकता है? इसलिए जनरल रावत का यह कहना बिल्कुल उचित है कि अब समय आ गया है कि उन्हें उन्हीं के तरीके से जवाब दिया जाए। यह एक प्रकार से जवानों को ईट का जवाब पत्थर से देने का निर्देश है।
सेना का नेतृत्व करने के कारण उनसे यही अपेक्षा भी है। किंतु पाकिस्तान अपने यहां इसकी छानबीन करने का वचन देने की जगह कह रहा है कि हम युद्ध के लिए तैयार हैं, लेकिन शांति की कीमत जानते हैं। आप अगर युद्ध के लिए तैयार हैं तो भारत क्या आंखें मूंदे और हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है?
अब पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आसिफ गफूर अपने देश को शांतिदूत होने का प्रमाण पत्र दे रहे हैं। वे यह मानने के लिए ही तैयार नहीं हैं कि भारतीय जवान के साथ बर्बरता उनके जवानों ने की है। वे पाकिस्तानी सेना को पेशेवर सेना बता रहे हैं। कह रहे हैं कि आतंकवाद से लड़ने का हमारा रिकॉर्ड है। आपकी सेना कितनी पेशेवर है, वह इससे साबित होता है कि वे आतंकवादियों को घुसपैठ कराने के लिए गोलीबारी करते हैं ताकि भारतीय सेना का ध्यान इधर रहे और वे जम्मू-कश्मीर की सीमा में प्रवेश कर जाएं।
पाकिस्तान की नजर में आतंकवादियों को प्रशिक्षण देकर घुसपैठ कराने के लिए कवर फायर करने वाली ही पेशेवर सेना है। वे सेना के अंदर इसी तरह की सोच और उसके अनुसार आचरण करने का प्रशिक्षण देता है। किंतु दुनिया के लिए यह पेशेवर सेना की भूमिका नहीं हो सकती। पाकिस्तान क्या कहता है यह हमारे लिए मायने नहीं रखता है; हम तो जनरल रावत के इस कथन के साकार होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि दूसरी तरफ भी इसी तरह का दर्द महसूस होना चाहिए। ताकि उन्हें भी पता चले पीर परायी क्या होती है।








2 Comments
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