छह सूत्री बिंदु पर बनी आम सहमति
वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लंबे समय तक जमावड़े के बाद अपनी-अपनी सेनाओं को लौटाने के लिए भारत और चीन के समझौते पर अमल के बाद दोनों देशों के बीच टकराव खत्म करने में प्रगति और संभावनाएं निश्चित रूप से जगी हैं। हाल ही में एनएसए यानी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीनी विदेश मंत्री के साथ बैठक का जो ब्योरा सामने आ रहा है, उसके मुताबिक दोनों पक्ष छह सूत्री आम सहमति पर पहुंचे जिसमें सीमा पर शांति बनाए रखने, कटुता समाप्त करने और संबंधों को स्वस्थ तथा स्थिर रूप से बढ़ावा देने आदि बिंदु शामिल हैं। दोनों पक्षों ने इस बात पर भी जोर दिया कि सीमा मसले को द्विपक्षीय संबंधों की समग्र स्थिति के संदर्भ में इस तरह सुलझाना चाहिए जिससे परस्पर संबंधों के आगे बढ़ने पर इसका विपरीत असर न पड़े।
संबंधों के सामान्यीकरण के लिए ऐसी सहमति पूरी तरह समयोचित है पर जरूरी यह भी है कि इन बिंदुओं को अमली जामा पहनाया जाए। अनुभव बताता है कि दोनों देशों के बीच हर बैठक के बाद संबंधों को सामान्य बनाने के लिए व्यावहारिक स्तर पर कदम उठाने की घोषणा होती है लेकिन अगली बैठक में भी वे ही मुद्दे ताजे बने रहते हैं। यह सही है कि वार्ताओं के नतीजों को लेकर हड़बड़ी नहीं होनी चाहिए लेकिन अगर किसी बिंदु पर सहमति होती है तो उसके क्रियान्वयन को लेकर निरंतरता होनी ही चाहिए। तभी सहमति को अमल में लाया जा सकेगा।
ऐसा न होने पर हर वार्ता अपने पिछले बिंदु पर ही ठिठकी दिखाई देगी। एक अजीब स्थिति यह भी है कि अक्सर ऐसी वार्ता के कुछ समय बाद तक तो सब ठीक दिखाई देता है पर जल्दी ही चीन की ओर से कोई | अवांछित कदम उठा लिया जाता है। इससे वार्ता के क्रम में बेवजह की रुकावट पैदा हो जाती है। फिलहाल डोभाल की बैठक में कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत में समन्वय और सहयोग को रेखांकित किया गया है जिससे स्थिति में सुधार की उम्मीद बन गई है।







