मानव और वन्य जीवों का संबंध प्रकृति की अनमोल देन है, जो हमारी संस्कृति, साहित्य, लोक कथाओं और परंपराओं में गहरे तक समाया है। प्राचीन काल से ही दोनों के बीच मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक स्तर पर एक अनूठा रिश्ता रहा है। हालांकि आधुनिक सभ्यता और जीवन की बदलती प्राथमिकताओं ने इस रिश्ते को प्रभावित किया है, फिर भी प्रकृति की व्यवस्था में वन्य जीवों का महत्व अक्षुण्ण है। उत्तर प्रदेश में वन्य प्राणी सप्ताह का आयोजन इस दिशा में सकारात्मक कदम है, जो हमें इन प्राणियों के संरक्षण के प्रति जागरूक करता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ठीक ही कहा है कि वन्य जीवों के संरक्षण के लिए उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना अनिवार्य है। भारत का विश्व के 17 मेगा डाइवर्सिटी देशों में शुमार होना इसका प्रमाण है। प्रदेश में व्यापक वृक्षारोपण अभियान और प्राकृतिक वातावरण को बनाए रखने की पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। वन्य जीवों के लिए हरा-भरा वातावरण उनकी प्राथमिक जरूरत है, जहां वे सहजता से रह सकें। इसके लिए वनों में अतिक्रमण, अवैध खनन और शिकार पर सख्ती से रोक लगाई गई है। फिर भी, वित्तीय स्वार्थों के चलते कुछ लोग अपनी पहुंच और धनबल से इस हरियाली को नष्ट करने में सफल हो जाते हैं, जो चिंता का विषय है।
इसका परिणाम यह है कि अपने प्राकृतिक आवास से वंचित कई वन्य जीव भोजन की तलाश में गांवों और शहरों की ओर रुख करने को मजबूर हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है। यह न केवल वन्य जीवों, बल्कि मानव जीवन के लिए भी खतरा बन रहा है। राष्ट्रीय पार्क और टाइगर रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्र कुछ प्रजातियों को तो आश्रय दे सकते हैं, लेकिन अधिकांश वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक माहौल की जरूरत है।
वन्य प्राणी सप्ताह का उद्देश्य यही होना चाहिए कि हम न केवल जागरूकता फैलाएं, बल्कि ठोस कदम उठाएं। इसके लिए जरूरी है कि वनों का संरक्षण हो, अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाए और स्थानीय समुदायों को संरक्षण कार्यों में शामिल किया जाए। साथ ही, जनमानस में यह समझ विकसित हो कि प्रकृति और वन्य जीवों का संरक्षण केवल सरकार का नहीं, बल्कि हम सभी का साझा दायित्व है। तभी हम एक ऐसी दुनिया बना पाएंगे, जहां मानव और वन्य जीव सामंजस्य के साथ सह-अस्तित्व में रह सकें।







