बृजेश सिंह तोमर
“श्मशान वैराग्य” शब्द साधारण प्रतीत होता है, परंतु इसका अर्थ अत्यंत गहन है। यह उस क्षणिक अनुभूति को दर्शाता है, जब अंतिम संस्कार के दृश्य में मृत्यु की सच्चाई हमारे सामने आती है। उस पल हम समझते हैं कि जीवन नश्वर है; धन, वैभव, अहंकार सब यहीं रह जाता है। यह बोध हमें भीतर तक झकझोर देता है, पर श्मशान की सीमा पार करते ही यह वैराग्य लुप्त हो जाता है, और हम मोह-माया की दौड़ में फिर लौट आते हैं।
लेकिन श्मशान वैराग्य का असली मर्म जीवन को नकारना नहीं, बल्कि उसे सार्थक बनाना है। मृत्यु की अनिवार्यता को समझकर हमें जीवन को बोझ नहीं, बल्कि अवसर बनाना चाहिए। श्मशान हमें सिखाता है कि संपत्ति नहीं, बल्कि संबंध मायने रखते हैं। चिता पर न धन जाता है, न शोहरत, केवल रिश्तों की स्मृति और प्रेम की गर्माहट रहती है। वहां रोते लोग यह बताते हैं कि जीवन में “क्या पाया” से ज्यादा “क्या बांटा” महत्वपूर्ण है।
श्मशान यह भी याद दिलाता है कि समय हमारा सबसे बड़ा धन है। यह ईर्ष्या, तकरार या स्पर्धा में व्यर्थ करने के लिए नहीं, बल्कि प्रेम, सृजन और दूसरों के लिए कुछ करने के लिए है। सच्चा वैराग्य पलायन नहीं, बल्कि संतुलन है, दुनिया में रहते हुए भी उससे अनासक्त रहना, जैसे कमल कीचड़ में खिलकर भी निर्मल रहता है।
भगवद्गीता (2/27) में श्रीकृष्ण कहते हैं:
“जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च।”
श्मशान वैराग्य: जीवन का सच्चा मोल(बृजेश सिंह तोमर)जीवन और मृत्यु का चक्र अटल है। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं:
“जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च।”
अर्थात, जो जन्मा, उसका मरना निश्चित है, और मृत्यु के बाद पुनर्जनन भी। श्मशान इस सत्य का साक्षात दर्पण है। संत कबीर का दोहा इसे और स्पष्ट करता है:
“माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोहे। एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोहे।”
यह हमें सिखाता है कि मिट्टी से बना देह एक दिन मिट्टी में ही मिल जाएगा। उनका एक और दोहा है:
“काल करै सो आज कर, आज करै सो अब। पल में परलय होइहैं, बहुरि करेगा कब।”
अर्थात, जो करना है, उसे अभी कर लो, क्योंकि अगला क्षण अनिश्चित है। श्मशान वैराग्य केवल अंतिम संस्कार के क्षणों तक सीमित भावना नहीं। यह तब सार्थक है, जब मृत्यु का बोध हमें जीवन को प्रेम, करुणा और अर्थपूर्ण उद्देश्य के साथ जीने की प्रेरणा दे। मृत्यु को स्मरण रखें, पर जीवन को पूर्णता से जिएं। यही वैराग्य का सच्चा संदेश है।







