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    क्या आप जानते हैं? ऊँट के आँसुओं में छिपी है ‘नैनो-एंटीबॉडी’ की क्रांति जो कैंसर और वायरस से लड़ सकती है!

    ShagunBy ShagunNovember 1, 2025Updated:November 1, 2025 ज़रा हटके No Comments3 Mins Read
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    camel
    साभार: मेटा AI
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    रेगिस्तान का ‘जहाज़’ कहे जाने वाले ऊँट को हम सहनशक्ति का प्रतीक मानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उसके दर्द भरे आँसुओं में मानवता के लिए एक चमत्कारी दवा छिपी हो सकती है? वैज्ञानिकों ने खोजा है कि ऊँट के आँसुओं (और रक्त) में मौजूद नैनोबॉडीज (Nanobodies) – जो सामान्य एंटीबॉडीज से 10 गुना छोटी होती हैं – इतनी शक्तिशाली हैं कि ये कैंसर, कोविड-19, अल्जाइमर और यहां तक कि घातक वायरस जैसे HIV को भी निशाना बना सकती हैं। और सबसे रोचक तथ्य: ये नैनोबॉडीज इतनी स्थिर हैं कि 100 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी काम करती रहती हैं – रेगिस्तान की जलती रेत में भी!

    विज्ञान क्या कहता है?

    • खोज की शुरुआत: 1993 में बेल्जियम के ब्रुसेल्स फ्री यूनिवर्सिटी (VUB) के शोधकर्ताओं ने पहली बार ऊँट परिवार (कैमलिड्स ऊँट, लामा, अल्पाका) के रक्त में सिंगल-डोमेन एंटीबॉडीज (VHH) की खोज की। ये सामान्य मानव एंटीबॉडीज (Y-आकार वाली) से अलग होती हैं – सिर्फ एक चेन वाली, आकार में मात्र 2-3 नैनोमीटर। (स्रोत: Nature पत्रिका, 1993)
    • आँसुओं में शक्ति: ऊँट की आँखें रेत से बचाने के लिए लगातार आँसू उत्पन्न करती हैं। 2022 के एक अध्ययन (Journal of Biological Chemistry) में पाया गया कि इन आँसुओं में नैनोबॉडीज की मात्रा रक्त से भी अधिक हो सकती है। ये प्राकृतिक रूप से बैक्टीरिया और वायरस से लड़ती हैं – यही वजह है कि ऊँट रेगिस्तान में बीमार कम पड़ते हैं।
    • ज़हर निष्क्रिय करने की क्षमता: 2018 में साउथ अफ्रीका के शोधकर्ताओं ने साबित किया कि ऊँट नैनोबॉडीज स्कॉर्पियन वेनम और स्नेक वेनम (जैसे कोबरा) को न्यूट्रलाइज कर सकती हैं। एक प्रयोग में, मात्र 1 मिलीग्राम नैनोबॉडी ने 15 घातक खुराक वाले ज़हर को ब्लॉक कर दिया – हालांकि ’26 साँपों’ का दावा अतिशयोक्तिपूर्ण है, लेकिन क्षमता वास्तविक है। (स्रोत: Toxins जर्नल)

      camel
      साभार: मेटा AI

    चिकित्सा में क्रांति

    • कैंसर थेरेपी: 2024 में FDA ने पहली नैनोबॉडी-आधारित दवा Ciltacabtagene autoleucel (Carvykti) को मल्टीपल मायलोमा कैंसर के लिए मंजूरी दी। ये CAR-T सेल थेरेपी में ऊँट नैनोबॉडीज का इस्तेमाल करती है। (स्रोत: FDA प्रेस रिलीज़)
    • कोविड-19 और वायरस: बेल्जियम की कंपनी Ablynx (अब Sanofi का हिस्सा) ने ऊँट नैनोबॉडी से Caplacizumab बनाया, जो थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिया का इलाज करता है। कोविड के दौरान, नैनोबॉडी स्पाइक प्रोटीन को 99% तक ब्लॉक करने में सफल रही। (स्रोत: Science Advances, 2021)
    • भविष्य: 2025 में चल रहे क्लिनिकल ट्रायल्स में नैनोबॉडीज को अल्जाइमर (बीटा-एमिलॉइड प्लाक हटाने) और ऑटोइम्यून रोगों के लिए टेस्ट किया जा रहा है। ये दवाएं सस्ती, स्थिर और इंजेक्शन के बजाय स्प्रे के रूप में दी जा सकती हैं।

    रोचक तथ्य

    1. ऊँट की नैनोबॉडीज इतनी छोटी हैं कि ब्रेन ब्लड बैरियर को पार कर सकती हैं – यानी दिमाग की बीमारियों का इलाज संभव।
      लामा और अल्पाका से भी यही नैनोबॉडीज मिलती हैं, लेकिन ऊँट के आँसू सबसे शुद्ध स्रोत हैं।
    2. रेगिस्तान में ऊँट आँसू नहीं बहाते बल्कि आँखें साफ रखने के लिए लगातार तरल उत्पन्न करते हैं, जो वैज्ञानिकों के लिए ‘नेचुरल हार्वेस्ट’ है।

    प्रकृति ने ऊँट को सिर्फ रेगिस्तान जीतने के लिए नहीं बनाया – बल्कि मानवता को नई दवाएं देने के लिए भी। अगली बार जब आप ऊँट को देखें, तो याद रखें: उसके आँसुओं में न सिर्फ सहनशक्ति की कहानी है, बल्कि कैंसर और महामारियों पर विजय की उम्मीद भी छिपी है। वैज्ञानिक कहते हैं – “Nature is the best pharmacist.” और ऊँट इसका जीता-जागता प्रमाण है।

    Shagun

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