लखनऊ। डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय एकता मंच के स्थापना दिवस पर इस बार कुछ ऐसा हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ। केंद्रीय कार्यालय, चंचल कॉम्प्लेक्स, बर्लिंगटन में आयोजित कार्यक्रम में जब राष्ट्रीय संरक्षक पूर्व आईएएस राम बहादुर जी मंच पर पहुंचे, तो उनके साथ एक 14 साल का लड़का भी था नाम है अजय पासवान, जो लखनऊ के एक सुदूर गांव का रहने वाला है और जिसने पिछले साल दसवीं में 94% अंक लाकर पूरे जिले में टॉप किया था, लेकिन फीस न भर पाने की वजह से आगे की पढ़ाई छोड़ने वाला था।
राम बहादुर जी ने सबके सामने अजय को मंच पर बुलाया और घोषणा की कि मंच अब सिर्फ़ भाषण नहीं, बल्कि असल काम करेगा। उन्होंने अजय को पूरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए मंच की ओर से पूर्ण छात्रवृत्ति देने की घोषणा की और साथ ही पूरे प्रदेश में “बाबासाहेब मिशन टैलेंट हंट” शुरू करने का ऐलान किया जिसमें हर जिले से 10 सबसे होनहार लेकिन गरीब दलित-बहुजन बच्चे चुने जाएंगे और उनकी पूरी पढ़ाई-लिखाई मंच उठाएगा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष भवन नाथ पासवान ने तालियां बजवाते हुए कहा, “आज से हमारा मंच सिर्फ़ जयंती और स्थापना दिवस नहीं मनाएगा, बल्कि हर साल कम से कम 500 बच्चों को बाबासाहेब का सपना पूरा करने का हथियार देगा यानी अच्छी शिक्षा।”इंजी. एस.पी. सिंह ने तो माहौल में आग लगा दी। उन्होंने ऐलान किया कि अगले तीन महीने में पूरे उत्तर प्रदेश के 500 गांवों में “एक गांव एक इंजीनियर, एक डॉक्टर” अभियान चलाया जाएगा और इसके लिए मंच के कार्यकर्ता खुद घर-घर जाकर मेधावी बच्चों को खोजेंगे।
कार्यक्रम में मौजूद प्रदेश अध्यक्ष आशा राम सरोज ने सबसे भावुक पल दिया उन्होंने बताया कि अजय को चुनने का आइडिया खुद बाबासाहेब की 133वीं जयंती पर एक गांव में गए कार्यकर्ताओं से मिला था। वहां एक विधवा मां ने रोते हुए कहा था, “मेरा बेटा पढ़ने में बहुत तेज़ है, पर मैं चाय की थड़ी चलाती हूं, फीस कहां से लाऊं?” उसी दिन मंच ने फैसला कर लिया कि अब सिर्फ़ बातें नहीं, काम होंगे।
कार्यक्रम का अंत उस समय हुआ जब अजय ने हाथ जोड़कर कहा, “मैं आईएएस बनकर बाबासाहेब का नाम रोशन करूंगा और इसी मंच से हजारों बच्चों को आगे बढ़ाऊंगा।”हॉल में खड़े सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एक साथ नारा लगाया “जय भीम! जय भारत! अब सिर्फ़ नारा नहीं, काम होगा!”
ये स्थापना दिवस सिर्फ़ केक काटने और भाषण का दिन नहीं रहा। ये वो दिन था जब डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय एकता मंच ने सिर्फ़ बातें करना छोड़कर बाबासाहेब का सपना सच करना शुरू कर दिया।







