डॉ. पवन विश्वकर्मा और डॉ. दीपा शर्मा बन गये गंभीर कोविड पीड़ितों के ‘मसीहा’

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आयुर्वेदिक कॉलेज झाँसी में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार विश्वकर्मा और आयुर्वेदिक रिसर्च सेंटर ग्वालियर में अनुसंधान अधिकारी डॉ. दीपा शर्मा

“बुंदेलखंड के कई जिलों में कोरोना से पीड़ित गंभीर मरीजों को आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से किया स्वस्थ”, “स्वस्थ हुए मरीज सोशल मीडिया में व्यक्त कर रहे आयुर्वेदिक चिकित्सक दंपति का आभार”

राहुल कुमार गुप्त   

बाँदा, लखनऊ, 16 मई, 2021: कोरोना की दूसरी लहर ने देश में भयाक्रांत वातावरण उत्पन्न किया है, चहुँओर सिर्फ रुदन ही रुदन! मौत! मौत! और मौत की खबर! कोई न कोई अपनों को खो रहा है, क्या गरीब? क्या अमीर?

बहुत से चिकित्सकों ने कोरोना संक्रमण के भय से लोगों की अन्य बीमारियाँ भी देखनी बंद कर दी है। हाँ! कुछ संस्थानों व सरकारी संस्थानों में जरूर मरीजों को देखा सुना जा रहा है। लेकिन जनसंख्या प्रतिशत के हिसाब से इनका प्रतिशत नगण्य ही माना जा सकता है।

तबाही के इस मंजर पे कुछ चिकित्सक आगे भी आये हैं जो लोगों की निःशुल्क मदद कर उन्हें इस विपदा से बचाने में सफल हुए हैं और सफल हो रहे हैं। लेकिन ऐसे मसीहा चिकित्सकों की संख्या वास्तविक मसीहाओं के जैसे बहुत कम ही है। ऐसे ही चिकित्सकों की वजह से चिकित्सकों को धरती के भगवान की उपमा दी जाती है।

एलोपैथ जहाँ अपने तात्कालिक लाभ के गुणों से सारी चिकित्सा पद्धतियों में अग्रणी स्थान बनाने में सफल रहा वहीं साईड इफेक्ट के कई अवगुणों को लेकर नई-नई बीमारियों के उत्पन्न का कारण भी बना है। कई मामलों में यह आपके शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर भी करता है।

वहीं भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद कई मामलों में तात्कालिक लाभ देती है लेकिन कुछ मामलों में वक्त भी लगता है लेकिन साईड इफेक्ट का खतरा न के बराबर है। और हर बार आपके शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत ही करता है। कई असाध्य रोग सही चिकित्सक के मार्गदर्शन से इस भारतीय चिकित्सा पद्धति में संभव भी हुए हैं।

प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करिये, कई रोगों से बचिये

कोविड-19 जैसे महाविषाणु के सरलतम प्रहार से जटिलतम प्रहार वाले रूपों को आयुर्वेद ने भी काबू में किया है । दूसरी लहर में एलोपैथ में जहाँ जान का खतरा भी अधिक दिखा वहीं आयुर्वेद में जान का खतरा नगण्य दिख रहा है।

कोरोना काल के प्रथम चरण से इसके कहर व्यापी रूप तक दोनों का इलाज निःशुल्क रूप से आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से शत-प्रतिशत परिणाम के साथ बुंदेलखंड के प्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सक दंपति ने कर के दिखाया है। कर्वी जिला से, बाँदा जिला होते हुए झाँसी और ग्वालियर तक के कई कोविड पीड़ितों का इलाज बहुत ही सहज और सरल तरीके से कर के उनको जीवनदान दिया है। तथा इन स्वस्थ हुए मरीजों परआयुर्वेद का जादू चढ़ गया है।

सैकड़ों लोग इस दम्पति का सोशल मीडिया और दूरसंचार से भी आभार व्यक्त कर रहे हैं। शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज झाँसी में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार विश्वकर्मा और आयुर्वेदिक रिसर्च सेंटर ग्वालियर में अनुसंधान अधिकारी डॉ. दीपा शर्मा जहाँ कर्त्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश की है वहीं भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद की महिमा के दर्शन भी लोगों को करा दिये हैं।

सरकार ने कोविड मामलों से आयुर्वेदिक चिकित्सकों को जहाँ दूर कर रखा है वहीं कोविड पीड़ितों को शत-प्रतिशत ठीक करने का इन्होंने रिकॉर्ड भी बनाया है।
कोरोना की पहली लहर के बाद मौत का पर्याय बनी दूसरी लहर में ठीक हुए मरीजों ने अपनी जाँच रिपोर्ट्स के साथ आभार भी सोशल मीडिया में शेयर किया है।

मरीजों में तेजी से गिरते हुए ऑक्सीजन लेवल को भी बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से ही सही कर दिया गया।

कोरोना से पीड़ित मरीजों में हर उम्र के लोगों को पूर्णतः स्वास्थ्य लाभ हुआ है। हमारे कुछ जानने वाले और खुद हमारा परिवार भी इनकी चिकित्सा पद्धति से लाभान्वित हुआ है।

बाँदा जिले के एक एलोपैथ चिकित्सा अधिकारी का पूरा परिवार कोरोना से पीड़ित था, एक स्थानीय मरीज का वीडियो देखने के बाद चिकित्सा अधिकारी ने डॉ. पवन कुमार विश्वकर्मा से सलाह ली और उनकी बताई आयुर्वेदिक दवाओं से अपने पूरे परिवार को स्वस्थ करने में सफलता प्राप्त की।

सरकार को लाभान्वित तथा निष्क्रिय पड़ी इन चिकित्सा पद्धतियों को भी सक्रिय बनाने की जरूरत है जिससे इस अदृश्य महाशत्रु (कोविड-१९) को आसानी से काबू में लाया जा सके तथा इसका दुष्प्रभाव भी न दिखे।

“अगस्त्य हरीतिकी अवलेह,

वासा अवलेह, स्वासकासचिंतामणि रस, अभ्रक भस्म, शीतोप्लादि चूर्ण, पिप्पली चूर्ण, सुधा टंकण भस्म, महासुदर्शन घनबटी, अश्वगंधा घनबटी, त्रिभुवन कीर्ति रस, महालक्ष्मी विलास रस आदि।

उपरोक्त दवाओं में से ही कई दवाएं मरीजों की स्थिति देखकर चलायी गयीं, जिसमें से कोविड पीड़ितों को पूर्णतः लाभ मिला। निम्न दवाओं को चिकित्सकीय परामर्श के द्वारा ही लिया जाये।” – आयुर्वेदिक चिकित्सक दंपति डाक्टर पवन कुमार विश्वकर्मा और डॉ. दीपा शर्मा। – मोबाइल नम्बर- 8004138996

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