राजेंद्र सिंह (पुत्र, डॉ. राम बक्स सिंह)
जब देश में स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास की बात होती है, तो एक नाम गर्व के साथ उभरता है। डॉ. राम बक्स सिंह। 13 अगस्त 1925 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में जन्मे इस महान वैज्ञानिक ने बायोगैस प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ऐसी क्रांति लाई, जिसने न केवल भारत बल्कि विश्व को स्वच्छ ऊर्जा का नया रास्ता दिखाया। उनकी 100वीं जयंती के अवसर पर सीतापुर के डॉ. राम बक्स सिंह कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित भव्य समारोह ने उनकी विरासत को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। इस मौके पर उनकी प्रतिमा का अनावरण हुआ, जो भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
डॉ. राम बक्स सिंह की 100वीं जयंती:
डॉ. सिंह का जीवन सादगी और समर्पण का प्रतीक था। सीतापुर की मिट्टी में पले-बढ़े और लखनऊ में 50 वर्षों तक निवास करने वाले इस वैज्ञानिक ने 1957 में भारत का पहला गोबर गैस संयंत्र स्थापित कर नवीकरणीय ऊर्जा की नींव रखी। उनकी प्रतिभा ने सीमाओं को लाँघा और 1972 में अमेरिका में पहला बायोगैस संयंत्र स्थापित कर भारतीय नवाचार को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, डेनमार्क, नेपाल सहित 15 से अधिक देशों में उनके द्वारा डिज़ाइन किए गए 1,000 से ज्यादा बायोगैस संयंत्र आज भी उनकी दूरदर्शिता की गवाही देते हैं।
इस समारोह में माननीय सांसद श्री आनंद भदौरिया जी के भ्राता श्री अभिषेक भदौरिया ने सांसद जी का संदेश पढ़ा, जिसमें उन्होंने कहा, “डॉ. राम बक्स सिंह का योगदान विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है।” सांसद जी ने पिछले वर्ष प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को पत्र लिखकर डॉ. सिंह को भारत रत्न से सम्मानित करने की माँग की थी, और इस दिशा में उनका समर्थन जारी है। समारोह में यह भी घोषणा की गई कि भारत सरकार ने उनकी स्मृति में विशेष स्मारक डाक टिकट जारी करने का निर्णय लिया है, जो उनकी उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने का एक कदम है।
डॉ. सिंह की उपलब्धियाँ काफी असाधारण हैं। उन्होंने न केवल भारत में बायोगैस तकनीक को सरल और सुलभ बनाया, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के सलाहकार के रूप में भी कार्य किया। उनकी पुस्तकों को “बायोगैस की बाइबिल” कहा जाता है, और उनके कार्यों को यू.एस. सीनेट में भी मान्यता मिली। 26 सितंबर 2023 को उनके दस्तावेज़ राष्ट्रीय अभिलेखागार में संरक्षित किए गए, जो उनकी वैज्ञानिक विरासत को अमर बनाएंगे।
उनके पुत्र राजेंद्र सिंह ने समारोह में भावुक अपील की:
“हम चाहते हैं कि डॉ. राम बक्स सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। उनकी सतत ऊर्जा की दृष्टि ने वैश्विक ग्रामीण विकास को नया आयाम दिया।” उन्होंने 13 अगस्त को ‘राष्ट्रीय बायोगैस दिवस’ घोषित करने और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से इस माँग को समर्थन देने का आग्रह किया।
डॉ. सिंह की कहानी केवल एक वैज्ञानिक की नहीं, बल्कि एक ऐसे दूरदर्शी की है, जिसने स्वच्छ ऊर्जा को हर गाँव तक पहुँचाने का सपना देखा। उनकी 100वीं जयंती न केवल उनकी उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि यह एक अवसर है कि हम उनकी विरासत को आगे बढ़ाएँ और सतत विकास के उनके सपने को साकार करें।







