Facebook wall से: न्यूज़ चैनलों पर भी पेड न्यूज़ के ख़िलाफ़ कुल्हाड़ी चलनी चाहिए

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ब्लू व्हेल गेम पिछले कुछ साल से देश के कई ग्रामीण इलाक़ों में बहुत लोकप्रिय हुआ है. विदर्भ से लेकर बुंदेलखंड तक के हज़ारों किसान इस खेल की चपेट में आकर अपनी जान गवाँ चुके हैं. लेकिन अाजादी से अब तक कोई सरकार इनके लिए कोई ठोस पॉलिसी लेकर नहीं आई है…

सरकार ने दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट को जो बताया था उसके मुताबिक़ पिछले चार साल में देश में हर साल क़रीब 12000 किसानों ने मौत को गले लगाया है. एनसीआरबी के आँकड़ों के मुताबिक़ भी देश में हर साल जितने लोग आत्महत्या करते हैं (क़रीब सवा लाख) उसमें क़रीब 10 परसेंट किसान और खेती से जुड़े लेबर होते हैं .

 Pradeep Yadav


यह तो बहुत ही हर्ष का विषय है कि पेड न्यूज़ के आरोप में प्रेस काऊंसिल की सिफ़ारिश पर डी ए वी पी ने पंद्रह अख़बारों में सरकारी विज्ञापन छापने पर रोक लगा दी है । इन अख़बारों में टाइम्स आफ़ इंडिया और दैनिक जागरण जैसे अख़बारों के भी नाम शुमार हैं । अब अलग बात है कि इन के एक एक संस्करण पर ही रोक लगी है जो कि नाकाफ़ी है । क़ायदे से इन के सभी संस्करणों पर यह रोक लगनी चाहिए थी । पर हम फिर भी ख़ुश हैं कि पेड न्यूज़ के ख़िलाफ़ आंशिक ही सही कार्रवाई शुरू तो हुई । न्यूज़ चैनलों पर भी पेड न्यूज़ के ख़िलाफ़ यह कुल्हाड़ी चलनी चाहिए। उन अख़बारों की सूची देखिए और ख़ुशी मनाईए कि खबर के नाम पर चकलाघर बन कर कर्मचारियों के शोषण का कारखाना बन चुके, अपने व्यावसायिक हितों के लिए पत्रकारों को दलाल बना चुके इन अख़बारों के ख़िलाफ़ कुछ तो कार्रवाई शुरू हुई। दुष्यंत कुमार का एक शेर याद आ रहा है :

 

कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों

Dayanand Pandey


प्राईवेट स्कूलों की मनमानी तब तक चलती रहेगी जब तक आप खुद दिखावे की संस्कृति से बाहर नहीं निकलेंगे

प्राईवेट स्कूलों की मनमानी तब तक चलती रहेगी जब तक आप खुद दिखावे की संस्कृति से बाहर नहीं निकलेंगे।
स्टेटस सिम्बल बनते मंहगे स्कूलों में पढ़ाने का मोह छोड़िए ,सरकारें कभी इन पर लगाम नहीं कसेंगी।इन अभेद किलों में ये बच्चे कितने सुरक्षित हैं हम निरन्तर देख रहे हैं ।प्राईवेट पब्लिकेशन की मोटी मोटी किताबें पीठ पर लादे मासूम बच्चों को हम किस जहाँ में भेज रहे हैं कहना नहीं।
शिक्षा और स्वास्थ के क्षेत्र में जिस तरह पाँच सितारा संस्कृति तेजी से पनप रही है उसे पोषण भी हम ही दे रहे हैं।
सोचिए हल….कि सोचना जरुरी है ,अगला प्रदुम्मन कौन…..
सोनी मणि

हम आप जैसे सजग लोगों ने जैसे जैसे कानवेन्ट का रुख किया वैसे वैसे सरकारी स्कूल रसातल की ओर बढ़े।अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाने का मोह ही हमें प्राईवेट स्कूलों की ओर ले गया।मैंने छठवीं से अंग्रेजी पढ़ना शुरु कियाऔर आज बच्चे को दो साल में ही माँ बाप अंग्रेज बना देना चाहते हैं।हमारी इसी नब्ज को पकढ़ कर शिक्षा के व्यापारी शिक्षा का बड़ा साम्राज्य खड़ा करते चले गये।आज शायद ही किसी ठीक ठाक घर का बच्चा बारहवीं तक सरकारी स्कूल में पढ़ता है जब्कि आगे ग्रेजुएशन के लिए वह फिर सरकारी कालेजों के लिए एड़ियाँ रगड़ता है।सरकारों को प्राईवेट सेक्टर से न केवल राजस्व मिलता है बल्कि मोटी रकम चन्दे में भी मिलती है फिर क्यों कर वह आपके बिना मांगे सरकारी स्कूलों में सुविधाऐं बढ़ाऐंगी।इस भयानक परिस्थित को पैदा कर पोषित करने वाले हम ही हैं और मजे की बात यह है कि इन घटनाओं के बाद अपने ए.सी.अॉफिसों,कमरों और गाड़ियों में बैठ घड़ियाली आंसू फेसबुक पर बहाते हैं।

सोनी मणि

जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में चारों पदों पर वामपंथी जीते हैं तो क्या माना जाए चारों देशद्रोही जीत गए और जेएनयू में सभी देशद्रोही पढ़ते हैं। क्या इस बौद्धिक सन्स्थान में देशद्रोही ही हैं।

Ramesh Chandra Rai


Shekhar Hada


अभी खबर आ रही है कि गुडगाँव के सोहना रोड के मशहूर रायन इंटरनेश्नल स्कूल के शौचालय में कक्षा दो के बच्चे कि गर्दन कटी लाश मिली . उफ़ , महज आठ साल के प्रद्युम्न कि आखिर किससे दुश्मनी होगी जो उसका गला काट दिया गया .मृतक के पिता के मुताबिक, शुक्रवार सुबह उनका बच्चा सही-सलामत स्कूल गया था. कुछ ही देर बाद स्कूल प्रबंधन की ओर से फोन कर उन्हें बच्चे की तबीयत खराब होने की खबर दी गई.

आखिर हम किस तरह के समाज में रह रहे है? कुछ साल पहले गुडगाँव में ही एक स्कूली बच्चा अपने पिता कि पिस्टल ले कर स्कूल गया था और एक साथी को मार डाला था . दिल्ली और उसके आस पास के स्कूली बच्चों के वाहन या विद्यालय में यौन शोषण की खबरे, अब संवेदना नहीं पैदा करता , अभी परसों ही दिल्ली के आर के पुरम के अंध विद्यालय में एक ब्रिटिश नागरि्क के यौन शोषण के लिए गिरफ्तार किया गया, इस पर खबर / विमर्श किसी मिद्या में नहीं दिखा .
जान लें किसी कि भी ह्त्या – चाहे बस्तर में सी आर पी एफ के जवानों की हो या गौरी लंकेश की ;पर जश्न मना कर उसे ईसाई, किसी विचार के विरोधी, मानवाधिकार या ऐसे ही नाम दे कर हर्ष व्यक्त करने वाले समाज में स्कूलों का रक्तरंजित होना लाजिमी ही है . हमारे समाज के शिक्षा, स्वासस्थ्य, जैसे सवाल पर “हनीप्रित” और बाबा का डेरा भारी पड़ रहा है, बाकी बचता है तो सरकार के चरण चुम्बन में लिप्त यह समाज अब छोटे बच्चों के इस तरह हिंसा के शिकार होने की राह पर चल दिया है,

Pankaj Chaturvedi

मुम्बई में पेट्रोल 80 रुपये प्रति लीटर से मात्र कुछ पैसे दूर है। आज वहां का रेट 79.43 रुपया प्रति लीटर पहुंच गया है। अपनी काशी समेत देश के अन्य हिस्सों में भी यही कीमत शायद नवरात्र के शुभ अवसर तक दस्तक दे देगी। गैस सिलेंडर तीन साल में ही दोगुना पहले ही हो चुका है।

मिनीमम (minimum) बैलेंस के नाम पर केवल कुछ महीने में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) 230 करोड़ से ज्यादा वसूल चुका है। अभी अन्य बैंकों का डाटा सार्वजनिक होना बाकि है। जाहिर सी बात है…ये 230 करोड़ रुपये गरीबों, मजदूरों, छात्रों, किसानों, आम गृहिणियों और पांच/सात हजार रुपये महीने की नौकरी करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के हैं। क्योंकि मिनीमम बैलेंस केवल गरीबों की समस्या है। अमीरों की समस्या तो मैक्सिमम बैलेंस है।

पढ़ाई की बात करें तो 600 इंजीनियरिंग कालेज बंद हो रहे हैं। आईआईटी की फीस तीन गुना हो चुकी है। जो चीजें मुझे या मुझ जैसे करोड़ों लोगों को परेशान कर रही हैं, बीजेपी के साथियों को भी जरूर परेशान करती होंगी। और उन्हें भी परेशान कर रही होंगी जो आज भी मोदी मोदी कर रहे हैं। लेकिन कुछ मजबूरियों के कारण वो चुप हैं। आपकी चुप्पी आपके बच्चों का नुकसान करेगी। देश का भविष्य चौपट करेगी।

आपकी कमाई क्यों घटी…नेताओं की संपत्ति क्यों बढ़ी? अध्यक्ष जी की संपत्ति तीन सौ गुना कैसे बढ़ गई…ये भी सोचिए। आप मेरी मत सुनिए…किसी विपक्षी नेता की भी मत सुनिए….केवल RBI की सुनिए…वो जो विकास दर बता रहा है, उसको देखिए…उत्पादन, निर्यात, बेरोजगारी के जो डाटा जारी हो रहे हैं, उसे देखिये…उसे समझिये। पुल इंजीनियर बनाता है…बीमारी का इलाज डॉक्टर करता है। पुल को डॉक्टर से और इलाज इंजीनियर से कराने का देश में प्रयोग हो रहा है। देश बुरी तरह पिछड़ रहा है। अपना देश पिछड़ रहा है। राशन की जगह भाषण से देश को चलाने की कोशिश हो रही है।

Yogesh Yadav