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    103 घंटे की ऐतिहासिक सर्जरी: चिपकी जुड़वाँ बहनों को अलग करने वाले डॉक्टरों की अमर कहानी (2025 में फिर चर्चा में)

    ShagunBy ShagunNovember 2, 2025 विज्ञान No Comments5 Mins Read
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    Historic 103-hour surgery
    103 घंटे की ऐतिहासिक सर्जरी
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    डॉक्टरों की थकान भरी तस्वीरें वायरल

    नई दिल्ली : 32 घंटे तक चली सर्जरी… दो सर्जन फर्श पर गिर पड़े , 2014 में चीन के फुज़ियान मेडिकल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में 32 घंटे लंबी ब्रेन सर्जरी हुई जिसमें तीन सर्जन, छह एनेस्थिसियोलॉजिस्ट और आठ नर्सों की टीम ने बिना रुके ऑपरेशन किया। जब सब ख़त्म हुआ तो दो सर्जन वहीं ऑपरेटिंग रूम के फर्श पर थककर लेट गए और उनकी तस्वीर दुनिया भर में वायरल हो गई। जहाँ आमतौर पर ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी 4-6 घंटे चलती है, वहाँ ये 32 घंटे की लड़ाई इंसानियत और समर्पण की मिसाल बन गई। क्या इतनी लगन आज के दौर में भी दिखती है ??

    बता दें कि सिंगापुर के किंग एडवर्ड VII अस्पताल में 2001 में हुई इस सर्जरी को दुनिया की सबसे लंबी सर्जरी माना जाता है, जो 103 घंटे (करीब 4 दिन 7 घंटे) चली। लेकिन 2025 में इसकी चर्चा फिर जोरों पर है, क्योंकि सिंगापुर मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने इसकी तकनीकी चुनौतियों और डॉक्टरों के समर्पण को फिर से रेखांकित किया है। ये कहानी बताती है कि आधुनिक दौर में भी डॉक्टर कितनी सीमाओं को तोड़ सकते हैं।

    Historic 103-hour surgery
    32 घंटे तक चली सर्जरी… दो सर्जन फर्श पर गिर पड़े

    क्या है कहानी इसके पीछे :

    मरीज: नेपाल की ललितपुर से आईं जुड़वाँ बहनें गंगा और जमुना श्रेष्ठा (Shrestha twins), जो सिर से जुड़ी हुईं (क्रेनियोपैगस ट्विन्स)। उनके दिमाग 60% तक जुड़े हुए थे, जिसमें सैकड़ों रक्त वाहिकाएँ साझा थीं। बिना सर्जरी के उनकी उम्र 10-12 साल से ज्यादा न चल पाती।
    टीम: 20 डॉक्टरों की टीम, जिसमें न्यूरोसर्जन, प्लास्टिक सर्जन, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट और नर्सें शामिल थीं। अमेरिकी न्यूरोसर्जन डॉ. बेन कारसन (जो बाद में अमेरिकी शिक्षा मंत्री बने) ने दूर से मार्गदर्शन किया।
    चुनौतियाँ: सर्जरी चार चरणों में बँटी—3D इमेजिंग से प्लानिंग, फिर 103 घंटे का ऑपरेशन। डॉक्टरों ने शिफ्ट्स में काम किया, लेकिन थकान, रक्त की कमी और दिमाग की नाजुक संरचना ने सबको परेशान किया। एक डॉक्टर ने कहा, “ये सिर्फ सर्जरी नहीं, मैराथन थी—हर पल जान का जोखिम था।”
    परिणाम: सफल! दोनों बहनें अलग हो गईं। उनके खोपड़ियों को फिर से बनाया गया (क्रैनियल रिकंस्ट्रक्शन), और वे 5 दिनों में अस्पताल से डिस्चार्ज हो गईं। गंगा 2008 में मेनिन्जाइटिस से चल बसीं, लेकिन जमुना आज 24 साल की स्वस्थ युवती हैं और नर्स बनने की ट्रेनिंग ले रही हैं।

    क्यों वायरल हुई फिर से?

    2025 के अध्ययन में बताया गया कि ये सर्जरी आज के रोबोटिक और AI-सपोर्टेड ऑपरेशंस के लिए बेंचमार्क है। डॉक्टरों की थकान और समर्पण की तस्वीरें (जैसे आपकी बताई 2014 वाली) सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं, जहाँ लोग कह रहे हैं, “डॉक्टर ही असली सुपरहीरो हैं!”

    ये खबर साबित करती है कि भले ही बर्नआउट और सिस्टम की समस्याएँ बढ़ी हों, लेकिन मरीज की जान बचाने की होड़ में डॉक्टर आज भी रुकते नहीं।

    इससे जुडी एक और कहानी देखिये : आंख का पहला पूरा प्रत्यारोपण (2023, न्यूयॉर्क)

    46 वर्षीय आरोन जेम्स को बिजली का झटका लगा, जिससे उनका चेहरा और एक आंख बुरी तरह जली। मई 2023 में न्यूयॉर्क के NYU लैंगोन हॉस्पिटल में 21 घंटे की ऐतिहासिक सर्जरी हुई जहाँ पहली बार पूरा चेहरा और आंख प्रत्यारोपित हुयी। इस बीच 140 मेडिकल स्टाफ ने दिन-रात काम किया। आंख की दृष्टि अभी नहीं लौटी, लेकिन रेटिना स्वस्थ है और ब्रेन को सिग्नल भेज रही है। डॉक्टरों की थकान भरी तस्वीरें वायरल हुईं, साबित करते हुए कि विज्ञान और समर्पण से असंभव संभव है।

    कहानी 2: 4-दिन की मैराथन सर्जरी

    137 किलो का सिस्ट हटाया (1951, अमेरिका) जर्मनी में बसे जी. लीवांडोस्की के पेट में 137 किलो का ओवेरियन सिस्ट था, जो हृदय को दबा रहा था। अमेरिकी डॉक्टरों की टीम ने 96 घंटे (4 दिन) की सर्जरी की जिसमें टीम ने बिना रुके शिफ्ट्स में काम किया। सफलता के बाद डॉक्टर थककर गिर पड़े। ये दुनिया की सबसे लंबी सर्जरी थी, जो आज भी डॉक्टरों की लगन की मिसाल है। हाल के अध्ययनों में इसे आधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीकों का आधार बताया गया।

    https://x.com/Jimmyy__02/status/1984599743482511691/photo/2

    लोगों ने किया सैलूट :

    एक यूजर ने लिखा : हाँ, आज के दौर में भी स्वास्थ्य सेवा और अन्य क्षेत्रों में ऐसी ही असाधारण लगन और समर्पण देखने को मिलता है।
    जिमी ने लिखा : बिलकुल जब काम को इबादत समझा जाए तो हर पेशे में चमत्कार होते हैं। हर बार ऐसी खबरें सुनकर यक़ीन बढ़ता है कि इंसानियत अभी भी ज़िंदा है बस उसे पहचानने की ज़रूरत है इन डॉक्टरों का समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर रहेगा
    आलिया ने लिखा : सच में ऐसा समर्पण अब बहुत कम देखने को मिलता है ये सिर्फ़ पेशा नहीं सेवा है, आपको क्या लगता है आज की पीढ़ी में यह जुनून वापस आ सकता है?
    एक यूजर ने लिखा : सच ऐसी लगन और समर्पण आज दुर्लभ हो गई है, 32 घंटे तक लगातार किसी की जान बचाने के लिए खड़ा रहना सिर्फ़ पेशा नहीं बल्कि मानवता की पूजा है, ऐसे डॉक्टर याद दिलाते हैं कि अब भी इस दुनिया में कुछ लोग अपने कर्म से भगवान का रूप बन जाते हैं।

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