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    ‘तंबाकू मुक्त’ भारत और विश्व का निर्माण योग तथा संतुलित शिक्षा से सम्भव

    By May 30, 2019 Featured No Comments9 Mins Read
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    31 मई को ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ विशेष

    प्रदीप कुमार सिंह

    विश्व तंबाकू दिवस को पहली बार 7 अप्रैल 1988 को विश्व शान्ति की सबसे बड़ी वैश्विक संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ की इकाई विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लू.एच.ओ.) की वर्षगाँठ पर मनाया गया। इसके बाद हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गयी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2008 में सभी तंबाकू विज्ञापनों, प्रमोशन आदि पर बैन लगाने का आह्वान किया। विश्व तंबाकू निषेध दिवस का वर्ष 2019 के लिए थीम है- तंबाकू और फेफड़ों का स्वास्थ्य। विश्व के लोगों को तंबाकू मुक्त और स्वस्थ के प्रति आसानी से जागरूक बनाने के लिये पूरे विश्व भर में एक मान्यता-प्राप्त वैश्विक संस्था डब्लू.एच.ओ. के आह्वान पर इस अभियान में विश्व भर में कई वैश्विक संगठन, सदस्य देशों की केन्द्र, राज्य सरकारें, सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठन आदि इस दिवस को पूरे उत्साह से मनाते हैं। सम्पूर्ण स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण इस महान दिवस को अत्यन्त ही सन्देशपरक बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के स्थानीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

    नशे की लत का मैं भी किशोर तथा युवा अवस्था में भुक्त भोगी रहा हूं। मेरे स्वर्गीय पिता जो कि एक
    अच्छे चिकित्सक थे फिर भी वह दिन-रात सिगरेट तथा शराब के नशे में पूरी तरह डूबे रहते थे। पिताजी से ही इस बुरी आदत का मैं भी शिकार बन गया था। अब मैं प्रबल इच्छा शक्ति के बूते नशे की आदत से पूरी तरह मुक्त हूं।

    जबसे मैंने जीवन का एक बड़ा मकसद बनाया तब से मैं तथा मेरा परिवार भी नशा मुक्त तथा शाकाहारी जीवन
    जी रहा है। मैं 63 वर्षीय व्यक्ति हूं। विगत 38 वर्षों से लेखन को मैंने अपना मकसद प्राप्त करने का हथियार
    बनाया है।

    सार्थक जीवन जीने के लिए जीवन में कोई न कोई मकसद होना जरूरी है। ईश्वर ने यह मानव शरीर
    किसी विशेष उद्देश्य से दिया है। अनमोल मानव जीवन को व्यर्थ नशे में बरबाद नहीं करना चाहिए। मानव जन्म हमें लोक कल्याण के द्वारा एकमात्र अपनी आत्मा के विकास के लिए मिला है। इसलिए जीवन के प्रत्येक पल को पूरे उत्साह के साथ जीना चाहिए। उत्साह सबसे बड़ी जीवन शक्ति तथा निराशा सबसे बड़ी कमजोरी है। जीवन के प्रत्येक क्षण खुश रहने का स्वभाव विकसित करें। प्रत्येक मनुष्य को जीवन का मकसद ऐसा चुनना चाहिए जिसमें हम अपने शरीर, मन, मस्तिष्क तथा आत्मा की पूरी शक्ति लगा सके। मेरे जीवन का मकसद आपको पूरा लेख पढ़ने पर स्पष्ट हो जायेगा।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी हाल में ‘ड्रग्स-फ्री इंडिया’ अभियान चलाने की बात कही है। उन्होंने
    चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे देश के युवा गुटका, चरस, गांजा, अफीम, स्मैक, शराब और भांग आदि के नशे में पड़ कर बर्बाद हो रहे हैं। इस कारण से वे आर्थिक, सामाजिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से
    विकलांगता की ओर अग्रसर हो रहे हैं। वे अपने व परिवार को समाज में नीचा दिखा रहे हैं। अनुभवी काउंसलरों
    तथा योग शिक्षकों द्वारा रोगी को मानसिक, आध्यात्मिक, शारीरिक रूप से प्रार्थना व नियमित योग द्वारा रोगी
    का खोया हुआ आत्म विश्वास फिर से जागृत कर उसे नशे के जाल से निकाला और समाज में स्थापित किया जा सकता है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि ड्रग्स थ्री डी बुराइयों को लाने वाला है और ये बुराइयां जीवन में डार्कनेस (अंधेरा),
    डिस्ट्रक्शन (बर्बादी) तथा डिवास्टेशन (तबाही) हैं। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है जिनके जीवन में कोई ध्येय नहीं है, लक्ष्य नहीं है, जीवन में एक खालीपन है, वहां ड्रग्स का प्रवेश सरल होता है। ड्रग्स से अगर बचना है और अपने बच्चे को बचाना है, तो उसे ध्येयवादी बनाइए। जीवन में कुछ अलग करने के इरादे वाला बनाइए, बड़े सपने देखने वाला बनाएं। फिर बाकी बेकार तथा नकारात्मक चीजों की तरफ उनका मन ही नहीं लगेगा।

    संयुक्त राष्ट्र संघ की इकाई विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तंबाकू के सेवन को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की एक
    भयानक समस्या का दर्जा दिया गया है। चरस, गांजा, अफीम, स्मैक की अवैध खेती तथा व्यापक स्तर की
    तस्करी में विश्व स्तर के कई आतंकवादी संगठन तथा समाज विरोधी तत्व सक्रिय हैं। नशे का आदी बनकर हम
    अपनी मेहनत से कमाये पैसों से आतंकवादियों तथा असामाजिकं तत्वों को फलने-फूलने में अपरोक्ष रूप से मदद करते हैं। इसलिए नशा करने के पहले इस बिन्दू पर अवश्य विचार कर लेना चाहिए।

    योग और आध्यात्म दोनों ही मनुष्य के तन और मन दोनों को सुन्दर एवं उपयोगी बनाते हैं। योग का
    मायने हैं जोड़ना। योग मनुष्य की आत्मा को परमात्मा की आत्मा से जोड़ता है। इसलिए हमारा मानना है कि
    प्रत्येक बच्चे को बचपन से ही योग एवं आध्यात्म की शिक्षा अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए। सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए ‘योग’ वर्तमान समय की सारे विश्व की अनिवार्य आवश्यकता है और यह हमारी महान साँस्कृतिक विरासत भी है।

    नशे की आदत तब पड़ती है जब इंसान का खुद पर आत्म नियंत्रण नहीं रहता। जब इंसान मन तथा
    इंद्रियों के नियंत्रण में आने लगता है तो नशे की आदत सर पर चढ़ जाती है। इस मानसिक तथा आत्म नियंत्रण को पाने में योग मदद करता है। योग-प्रणायाम तथा ध्यान हमारी मानसिक तथा आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाता है। योग से आत्म नियंत्रण में वृद्धि होने से व्यक्ति की अंदर से किसी भी प्रकार का नशा करने की इच्छा ही नहीं होती है। योग तथा व्यायाम नशे की बुराई को दूर करने में पूरी तरह से सहायक है। बशर्ते दैनिक जीवन में योग को नियमित तौर पर अपनाया जाए। योग को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जाए।

    आज विश्व भर के आधुनिक विद्यालयों के द्वारा बच्चों को एकांकी शिक्षा अर्थात केवल विषयों की भौतिक शिक्षा ही दी जा रही है, जबकि मनुष्य की तीन वास्तविकतायें होती हैं। पहला- मनुष्य एक भौतिक प्राणी है, दूसरा- मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तथा तीसरा मनुष्य- एक आध्यात्मिक प्राणी है। इस प्रकार मनुष्य के जीवन में भौतिकता, सामाजिकता तथा आध्यात्मिकता का संतुलन जरूरी है। हमारा मानना है कि मनुष्य के
    सम्पूर्ण व्यक्तित्व के विकास के लिए उसे सर्वश्रेष्ठ भौतिक शिक्षा के साथ ही उसे सामाजिक एवं आध्यात्मिक
    शिक्षा भी देनी चाहिए। इस प्रकार सर्वशक्तिमान परमेश्वर को अर्पित मनुष्य की ओर से की जाने वाली समस्त
    सम्भव सेवाओं में से सर्वाधिक महान सेवा है- (अ) बच्चों की शिक्षा, (ब) उनके चरित्र का निर्माण तथा (स) उनके हृदय में परमात्मा के प्रति अटूट प्रेम उत्पन्न करना। हमारा अनुभव तथा दृढ़ विश्वास है कि संतुलित शिक्षा प्राप्त बालक जीवन में कभी भी नशे के प्रति किसी भी कीमत पर आकर्षित नहीं हो सकता।

    एक आंकड़े के अनुसार विश्व में तंबाकू के इस्तेमाल के कारण 70 लाख व्यक्तियों की प्रतिवर्ष मृत्यु हो
    जाती है। लाखों लोग तंबाकू की खेती और इसके व्यापार से अपनी आजीविका कमाते हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप
    से यह प्रश्न उठता है कि इस कारण से इस समस्या का हल कैसे संभव है? ऐसे लोगों को दूसरे समाजोपयोगी
    व्यवसायों में समायोजित करने की योजना दृढ़तापूर्वक बनायी जानी चाहिए। तंबाकू में जिस रसायन की मात्रा
    सबसे अधिक पायी जाती है वो है निकोटिन। निकोटिन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है।

    यह इन्सान को नशे का आदी तो बनाता ही है साथ में इसके प्रभाव से मानव शरीर में अनेकों प्रकार के कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों को जन्म भी देता है। निकोटिन के प्रभाव के चलते व्यक्ति के अंग भूख, प्यास, दिमाग आदि काम करना बंद कर देते हैं जिसके चलते धीरे-धीरे व्यक्ति पूर्ण रूप से बिना नशे के जीवित नहीं रह पाता है और वही नशा एक दिन व्यक्ति के जीवन के अंत का कारण भी बनता है।

    कभी दूसरों की देखा-देखी, कभी बुरी संगत में पड़कर, कभी मित्रों के दबाब में, कई बार कम उम्र में खुद
    को बड़ा दिखाने की चाहत में, तो कभी धुएँ के छ्ल्ले उड़ाने की ललक, कभी फिल्मों में अपने प्रिय अभिनेता को
    धूम्रपान करते हुए देखकर तो कभी पारिवारिक माहौल का असर तंबाकू उत्पादों की लत का कारण बनता है।
    अधिकतर लोग किशोरावस्था या युवावस्था में दोस्तों के साथ सिगरेट, गुट्खा, जर्दा आदि का शौकिया रूप में
    सेवन करते हैं। शौक कब आदत एवं आदत लत में बदल जाती है पता ही नहीं चलता और जब तक पता चलता है तब तक शरीर को बहुत नुकसान पहुँच चुका होता है। अभिभावकों को तंबाकू की लत है तो बच्चों में ऐसे जीन्स होते हैं, जो उन्हें भी उस नशे की तरफ खींचते हैं।

    बच्चों पर जो अभिभावक हर वक्त पढ़ाई का बोझ लादे रहते हैं। निरन्तर तनाव में बच्चों को कई बार
    नशीले पदार्थों के सेवन की ओर ले जाती हैं। अगर वे खेलों, कला, संगीत, लेखन, नृत्य, बागवानी, प्रकृति प्रेम
    आदि में भी रूचि लेते हैं, तो उनका काफी खाली समय इन सकारात्मक गतिविधियों में लग जाता है। खेलों, कला, संगीत, लेखन, नृत्य, इनोवेशन आदि में वे दूसरों से बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं। ऐसे में नशे की तरफ बढ़ने की आशंका काफी कम हो जाती है। नशे से बचे रहने की कोई गारंटी नहीं है, क्यांंकि बाहरी दुनिया का प्रभाव बहुत शक्तिशाली होता है, लेकिन अगर बच्चा खेलों, लोक कलाओं, बागवानी, लेखन, संगीत, इनोवेशन आदि में संलग्न है तो नशे के प्रभाव को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। वे बेहतर करना चाहते हैं, क्योंकि कामयाबी का नशा किसी भी दूसरी चीज के नशे से कहीं बड़ा होता है।

    भारत के 17वीं लोकसभा चुनाव के परिणाम ने विश्व के सबसे बड़े 130 करोड़ जनसंख्या वाले भारतीय
    लोकतंत्र अर्थात जनता जर्नादन की जीत की सारे विश्व के समक्ष अनूठी मिसाल प्रस्तुत की है। इस प्रचंड तथा
    ऐतिहासिक जीत ने श्री नरेन्द्र मोदी को भारत सहित विश्व के सबसे लोकप्रिय वर्ल्ड लीडर के रूप में स्थापित
    किया है। मुझे पूरा विश्वास है कि श्री नरेन्द्र मोदी जैसे लोकप्रिय वर्ल्ड लीडर की आज विश्व को महती
    आवश्यकता है।

    शक्तिशाली लोकतांत्रिक भारत को अब आगे एक कदम और बढ़ाकर विश्व को अन्तर्राष्ट्रीय ड्रग्स
    माफियों के चंगुल से, पांच वीटो पॉवर की कैद से तथा परमाणु शस्त्रों की होड़ से मुक्त कराकर वैश्विक
    लोकतांत्रिक व्यवस्था (विश्व संसद) का गठन करने की अगुवाई करना चाहिए। अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद तथा
    युद्धों से विश्व की पीड़ित मानवता इसके लिए युगों-युगों तक इस युगानुकूल तथा 21वीं सदी के सबसे पुनीत
    अभियान के लिए श्री नरेन्द्र मोदी की हृदय से ऋणी रहेगी। श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सुरक्षित तथा शक्तिशाली भारत ही विश्व में शान्ति स्थापित करेगा। भारतीय संस्कृति का आदर्श ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ साकार होगा। किसी महापुरूष ने कहा है कि अभी नहीं तो फिर कभी नहीं।

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