मोजतबा खामेनेई की सख्त चेतावनी के बीच यूएस की B-2 बॉम्बर्स से हमले तेज, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने से तेल संकट गहराया- क्या विश्व युद्ध की दहलीज पर दुनिया?
ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने पद संभालने के बाद अपनी पहली सार्वजनिक घोषणा में साफ कर दिया है कि अमेरिका और इजराइल के खिलाफ उनका रुख उनके पिता अली खामेनेई से एक इंच भी अलग नहीं होगा। 28 फेब्रुअरी 2026 को शुरू हुए इस संघर्ष में, जहां यूएस-इजराइली फोर्सेस ने ईरान के सुप्रीम लीडर को मार गिराया था, अब मोजतबा ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह फैसला न केवल खाड़ी क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक रहा है, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति को भी गंभीर खतरे में डाल रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो इस संघर्ष को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का नाम देकर चला रहे हैं, ने ईरान से ‘बिना शर्त सरेंडर’ की मांग की है। उनका कहना है कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों को पूरी तरह नष्ट करने तक हमले जारी रहेंगे। लेकिन मोजतबा खामेनेई ने इसका जवाब देते हुए कहा है कि ‘अमेरिकी सुरक्षा छाता छेदों से भरा है’ और ईरान अपने विरोधियों को ‘गंभीर सबक’ सिखाने के लिए तैयार है। इस बीच, 13 मार्च को इजराइल के सेंट्रल इलाके में ईरानी मिसाइल हमले से एक गोदाम में आग लग गई, जो इस टकराव की बढ़ती तीव्रता को दर्शाता है।

यह संघर्ष अब सिर्फ तीन देशों जिसमें अमेरिका, इजराइल और ईरान तक सीमित नहीं रहा। रूस ईरान को इंटेलिजेंस सपोर्ट दे रहा है, जबकि चीन मिसाइल कंपोनेंट्स और फाइनेंशियल मदद की तैयारी में जुटा है।
यूएन सिक्योरिटी काउंसिल ने ईरान की निंदा करते हुए एक रेजोल्यूशन पास किया है, लेकिन अमेरिकी-इजराइली हमलों को ‘अनप्रोवोक्ड’ बताते हुए कई विशेषज्ञ इसे यूएन चार्टर का उल्लंघन मान रहे हैं। अर्थशास्त्री जेफ्री सैक्स ने चेतावनी दी है कि यह ‘चॉइस ऑफ वॉर’ विश्व युद्ध III की ओर ले जा सकता है।

खाड़ी में जारी इस खूनी खेल का सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई बाधित है, जिससे भारत जैसे देशों में ईंधन कीमतें आसमान छू रही हैं। 14 मार्च को यूएस ने B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स तैनात कर ईरानी मिलिट्री साइट्स पर बड़े हमले किए, जिससे तेहरान में भारी तबाही की खबरें आ रही हैं।
लेकिन ईरान की रेटेलिएटरी स्ट्राइक्स ने यूएस मिलिट्री असेट्स को भी नुकसान पहुंचाया है। पेंटागन के सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि ट्रंप ‘कार्ड्स होल्ड’ कर रहे हैं और संघर्ष की गति तय करेंगे, लेकिन ईरान की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
इस युद्ध की सबसे दुखद बात नागरिकों का नुकसान है। 28 फेब्रुअरी को यूएस स्ट्राइक में एक ईरानी स्कूल पर हमला हो गया, जिसमें 168 बच्चे और 14 टीचर्स मारे गए। ईरान में 3.2 मिलियन लोग घर छोड़कर भाग चुके हैं, और राष्ट्रवाद की लहर ने लोगों को एकजुट कर दिया है।
क्या यह टकराव जल्द खत्म होगा, या पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगा? फिलहाल, भविष्य अनिश्चित है, लेकिन इतना तय है कि ‘खून की प्यास’ बुझाने की यह होड़ वैश्विक शांति के लिए घातक साबित हो रही है। भारत जैसे देशों को डिप्लोमैटिक मोर्चे पर सक्रिय होकर तेल संकट से निपटने की रणनीति बनानी होगी, वरना आर्थिक संकट और गहरा सकता है।







