गाजियाबाद, 19 फरवरी। इंटरनेट अडिक्शन को छुड़वाने के लिए एम्स के राष्ट्रीय व्यसन उपचार केंद्र के गाजियाबाद स्थित मुख्यालय में इस खतरनाक लत को छुड़वाने की ट्रेनिंग दी जा रही है और एम्स दिल्ली में इसके लिए काउंसलिंग क्लासेज ली जा रही हैं। राष्ट्रीय व्यसन उपचार केंद्र में बतौर आचार्य नियुक्त डॉ. राकेश लाल ने बताया कि इंटरनेट के अडिक्शन का प्रभाव सीधा दिमाग पर होता है। इसके साथ ही इस अडिक्शन के शिकार लोग चिड़चिड़े, गुस्सैल और आलसी हो जाते हैं। इसके कारण उनकी निजी और सामाजिक जिंदगी प्रभावित होती है।
इस अडिक्शन के शिकार लोग अकेले रहना ज्यादा पसंद करते हैं और ज्यादा से ज्यादा समय इंटरनेट से दूर होने पर पीड़ित को अचानक तेज पसीना भी आ जाता है और उसे लगता है कि वह अभी बेहोश हो जाएगा। डॉ. लाल के अनुसार इंटरनेट और सोशल मीडिया का अडिक्शन भी अन्य अडिक्शन्स की तरह कई लेवल का होता है।
शुरुआती दौर में इस लत को आसानी से छुड़वाया जा सकता है, लेकिन जितना ज्यादा समय बढ़ता जाता है इस अडिक्शन को छुड़वाना मुश्किल हो जाता है। यह अडिक्शन डिप्रेशन, अकेलेपन और किसी दुख को दूर करने की कोशिशों के बीच लगता है। पीड़ित इंटरनेट पर ज्यादा समय देने लगता है और उसे पता ही नहीं चलता कि कब वह इसका अडिक्ट बन गया है।







