घर के आँगन में उतरा है बसन्त
रंग जोगिया रंगा है देखो बसन्त
गेंदा में, नारंगी में, टेसू में बेर में
बगिया के खुशबू देते फूलों के ढेर में
गोरी के आँचल में, सूरज छिपाते बादल में
गाजर में, सरसों में, सुनहरे जेवर में पायल में
खेतों में ,बागों में, भँवरों में तितली में छुपता नहीं बसन्त
कविता में ,गीतों में, सजनी के रूप में, घूँघट में छुपता नहीं बसन्त
बसन्त झाँकता है अब आम की बौर मे
खुशबू बिखेरता है,आजकल हर ठौर में
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र







