UN में बड़ा खेल हो गया : रूस और चीन ने मिलकर ईरान के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव रोक दिया
बहरीन चाहता था कि अगर ईरान हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद करे, तो उसे जबरदस्ती खुलवाया जाए…लेकिन रूस और चीन ने साफ मना कर दिया VETO लगा दिया
नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कल एक बड़ा ड्रामा देखने को मिला। रूस और चीन ने मिलकर बहरीन के ईरान-विरोधी प्रस्ताव को वीटो कर दिया। प्रस्ताव का मकसद था — अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दे तो उसे जबरदस्ती खुलवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समन्वय की अपील। दोनों देशों के इस कदम ने वैश्विक राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है।
क्या था विवादास्पद प्रस्ताव?
बहरीन (सऊदी अरब, UAE, कुवैत और जॉर्डन के साथ) ने प्रस्ताव पेश किया था कि होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अगर ईरान ने उसे ब्लॉक किया तो देशों को मिलकर एक्शन लेने की अनुमति दी जाए। यह प्रस्ताव कई बार कमजोर किया गया था, फिर भी रूस और चीन ने इसे ईरान के खिलाफ biased बताते हुए साफ वीटो कर दिया।
रूस-चीन का सख्त रुख
रूस और चीन ने कहा कि यह प्रस्ताव एक तरफा था और ईरान पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश है। वीटो के बाद अब कोई भी देश ईरान पर UNSC के जरिए आसानी से सीधा दबाव या सैन्य कार्रवाई नहीं कर पाएगा।
दुनिया दो खेमों में बंटती नजर आई
यह वोट सिर्फ एक प्रस्ताव का नहीं, बल्कि अमेरिका बनाम रूस-चीन की बढ़ती रणनीतिक टकरार का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट (दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल-गैस चोकपॉइंट) पर यह घटना आने वाले दिनों में बड़े भू-राजनीतिक टकराव की पूर्वसूचना हो सकती है।
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फिलहाल भारत समेत कई देश इस क्षेत्र में अपने जहाजों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही चिंतित हैं। और माना जा रहा है कि वीटो के बाद अब कूटनीतिक गतिविधियां तेज होने वाली हैं।







