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    कानून से ज्यादा जागरूकता का परिणाम है महिलाएं समझने लगी हैं अपना अधिकार

    ShagunBy ShagunJuly 20, 2022 Current Issues No Comments7 Mins Read
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    स्वाती सिंह

    कल एक बहन मेरे घर आयी थी। अभी कुछ दिन पूर्व की वह हकीकत बताने लगी। वह लखनऊ के बाहर रात को किसी काम से स्कूटी से जा रही थी। तभी कुछ अराजक तत्व उसके आगे-पीछे बाइक से चलने लगे। वह सहम गयी और चलते-चलते ही 1090 पर फोन मिलाया। उसके फोन मिलाते ही अराजक तत्व उसका प्रणाम करते हुए गली में रफूचक्कर हो गये और पांच मिनट के अंदर पुलिस वाले बहन के सामने थे।

    उसने योगी सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसी त्वरित गति मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। अराजकतत्वों के प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़क रूख का सुनती आयी थी। इसी कारण मैंने भी नंबर मिला दिया और खुद ही उस त्वरित गति को देख ली। यह सुनकर हमें भी तसल्ली हुई, महान संत ने महिलाओं के लिए जो व्यवस्था की है, प्रशासन की जो सतर्कता बढ़ी है। उसकी तारीफ तो की ही जानी चाहिए। यह हकीकत सिर्फ उस बहन के साथ ही नहीं देखने को मिली, यह हर दिन देखने को मिलता, जिससे महिलाओं में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा है।

    इसका कारण सिर्फ कड़ी कार्रवाई ही नहीं है। इसका कारण कार्रवाई के साथ ही जागरूकता लाने की ललक है। किसी काम के प्रति निष्ठा है। सिर्फ कागजों में होती चली आ रही कार्रवाई की जगह हकीकत में जमीन पर उतारने का उतावलापन है। यह ललक, यह राष्ट्रवाद, समर्पण का भाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दी है, जो देश के सामने एक नजीर है। उसका प्रदेश में आगे बढ़ाने के लिए संत योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्री के हर मनोभाव को पढ़ लेते हैं और जनहितार्थ कदम उठाने में सबसे आगे रहते है।

    इसको यूं समझिए कि किसी मुद्दे पर कानून बना देने मात्र से समस्या का समाधान नहीं हो जाता। उसके लिए जागरूकता जरूरी है। बहुतेरे काम तो बिना कानून के जागरूकता मात्र से ही संभव है। हम सबके बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान इसका उदाहरण है। यदि किसी मुद्दे पर कानून बनाना जरूरी है तो उस कानून के बनाने के साथ ही उसका प्रचार भी होना चाहिए, जिससे कि पीड़ित अपने अधिकारों के संबंध में जान सके। वह कानून जानेगा ही नहीं तो फिर न्यायालय का दरवाजा कैसे खटखटाएगा।

    इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्यनाथ की जितनी सराहना की जाए, वह कम है। महिलाओं के लिए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वह सबकुछ किया, जो किसी के लिए संभव नहीं था। जैसे तीन तलाक का मुद्दा। इसको कानून बनाकर इसके प्रति मीडिया से लेकर अन्य माध्यमों से प्रचारित करना, राजनीतिक नुकसान के बारे में सोचे बिना मुस्लिम बहनों के साथ अन्याय न होने देने का संकल्प लेना, यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसे किसी राष्ट्र के लिए समर्पित व्यक्तित्व के बस की बात थी।

    प्रधानमंत्री द्वारा किये जा रहे मार्गदर्शन का अक्षरश: पालन करने के लिए महान संत, राष्ट्र व राज्य के लिए जीवन को समर्पित करने वाले योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं की पीड़ा को समझा। उन्होंने धरातल पर उतरकर इसका पालन किया। खुद भी एक-एक पल महिलाओं की स्व की रक्षा के लिए न्यौछावर किया। इसी कारण परिणाम है कि उप्र में आज बहनें निर्भिक होकर सड़क पर चल सकती हैं। उनके जीवन स्तर में भी काफी सुधार हुआ है। यह सुधार नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे- पांच की रिपोर्ट भी बताती है कि राष्ट्रीय स्तर पर हुए सुधार में उप्र आगे है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किसी जनहित के मुद्दे को लेकर प्रचारित करने व उस अभियान का लगातार चलाने का ही परिणाम है कि लगातार कम उम्र में विवाह के प्रतिशत में लगातार गिरावट आ रही है। अब एनएचएफएस की रिपोर्ट -4 और 5 में ही तुलना करें तो चार में जहां 20.3 प्रतिशत पुरुषों में कम उम्र में विवाह होते थे, वहीं पांच की रिपोर्ट में यह दर कम होकर 17.7 हो गया। वहीं महिलाओं में कानूनी आयु प्राप्त करने से पूर्व शादी एनएचएफएस-4 की रिपोर्ट के अनुसार 26.8 प्रतिशत थी, जबकि एनएचएफएस-5 में यह राष्ट्रीय स्तर पर गिरकर 23.5 प्रतिशत रह गयी।

    कानूनी आयु पूरा करने से पूर्व शादी करने पर तमाम कानून पहले से बने हैं, लेकिन पूर्व की सरकारों ने इसके प्रति कानून बनाकर अपने कर्तव्य को भूल गये। सिर्फ कानून बनाने का ढोंग पिटते रहे। यही कारण रहा कि कानून से अनभिज्ञ लोगों तक इससे होने वाले नुकसान की कोई जानकारी ही नहीं पहुंच पायी। उनके पास तक कोई विवेकानंद नहीं पहुंचा, जो उन्हें समाज की कुरीतियों के प्रति जागरूक करने का साहस कर सके। पहली बार विवेकानंद की भूमिका में आये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और हर मुद्दे पर कानून से ज्यादा जागरूकता को तवज्जो दिया।

    अब उत्तर प्रदेश का देखें तो एनएचएफएस-5 (2019-21) की रिपोर्ट बताती है कि जहां एनएचएफएस-4 (2015-16 में आयी थी) की रिपोर्ट में 10 या उससे अधिक उम्र की बालिकाएं जहां 32.9 प्रतिशत स्कूल जाती थीं, वहीं यह दर बढ़कर 39.3 प्रतिशत हो गयी। वहीं शादी के संबंध में उप्र में जागरूकता ज्यादा बढ़ी। यहां पहले की रिपोर्ट में जहां 18 वर्ष की आयु से पूर्व शादी का प्रतिशत 21.1 था। वहीं पांचवीं रिपोर्ट में 15.8 प्रतिशत हो गया। वहीं पुरुषों में कानूनी उम्र की अपेक्षा जल्द शादी करने का औसत 28.7 रहा, जबकि पांचवीं रिपोर्ट में 23 प्रतिशत रह गया। बच्चा पैदा होने की दर में भी काफी गिरावट दर्ज की गयी है।पहले 2.7 प्रति महिला बच्चा पैदा करने की दर की अपेक्षा अब 2.4 बच्चे रह गये हैं।

    यह योगी आदित्यनाथ सरकार-1 द्वारा किये गये प्रचार व जागरूकता का परिणाम है कि एनएफएचएस-4 की रिपोर्ट की अपेक्षा में महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति काफी जागरूकता बढ़ी है। आगे भी इसके बढ़ते रहने का ही अनुमान है, क्योंकि योगी आदित्यनाथ जैसा तपस्वी का शासन जन-जन के लिए समर्पित होता दिख रहा है। महिला जागरूकता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि एनएफएचएस-4 में प्रसव से तीन के भीतर चेकअप कराने की दर जहां 45.9 प्रतिशत थी, वहीं पांचवी रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में यह दर बढ़कर 62.5 प्रतिशत हो गयी। वहीं प्रसूता महिलाओं में टेटनस का टीका लगाने की दर में भी 5.6 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं पंजीकृत गर्भधारण में भी इजाफा हुआ है। यह दर 15.9 प्रतिशत बढ़कर 95.7 प्रतिशत हो गया है।

    प्रदेश में जागरूकता और मेडिकल सुविधा में हुई बढ़ोत्तरी का ही परिणाम है कि शिशु मृत्युदर में पिछले सर्वे की अपेक्षा शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 पर 9.4 की कमी दर्ज की गयी है। परिवार नियोजन अपनाने वालों की संख्या में वृद्धि के साथ लोगों में कम बच्चा पैदा करने के लिए जागरूकता में भी काफी वृद्धि देखी गयी है। सबको याद होगा। इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते जबरदस्ती आपरेशन कराने का काम शुरू हुआ था। उसके बावजूद जनसंख्या वृद्धि दर में इतनी गिरावट नहीं आयी, जितना प्रधानमंत्री मोदी के जमाने में जगारूकता मात्र से कमी आ गयी है।
    आज हर व्यक्ति जागरूक हो रहा है। अपने अधिकार के साथ ही अपने कर्तव्यों के निर्वहन के प्रति जागरूकता भी देखने को मिल रही है। इसका कारण है, प्रधानमंत्री के कुर्सी पर बैठा व्यक्ति प्रधान सेवक के रूप में काम कर रहे हैं। वे दिन-रात राष्ट्र और राष्ट्र के नीचले स्तर के व्यक्ति की चिंता करते रहते हैं। जिसका पूरा जीवन ही राष्ट्र को समर्पित है।

    यही कारण है कि आज कोई घटना हुई नहीं कि वह सोशल मीडिया पर लोग प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक शेयर करते हैं। उसका तुरंत उधर से रिस्पांस मिलता है और कार्रवाई होती है। त्वरित कार्रवाई होने के कारण लोगों में सूचनाएं देने में दिलचस्पी भी होती है। पहले और अब में अंतर यही है कि सूचनाओं के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती थी, अब चतुर्दिक सरकार सजग है।

    (लेखिका- उत्तर प्रदेश सरकार में महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं।)

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