धन से हमेशा सुख नहीं मिलता…!

0
788

यहां गरीब सुखी नहीं है तो अमीर भी कोई आराम से रह नहीं पाते। पैसे से सुख मिलने का विचार केवल एक दृष्टिभ्रम है। आजकल तो ऐसी अनेक घटनाएं हो रही हैं, जिनमें बड़े-बड़े भ्रष्टाचारी जेल के सींखचों के अंदर पहुंच जाते हैं। उनकी लूट की रकम भी इतनी होती है कि सामान्य चोर भी शरमा जाए।

ऐसा लगता है कि दूसरों को ठगने वाले लोग सुखी हैं, पर यह वास्तविकता नहीं है। जिन लोगों ने दूसरों के प्रति अपराध कर संपत्ति बनाई है, उनको भी कहीं न कहीं मन में भय रहता है और कभी न कभी उनको दंड भोगना ही पड़ता है। यह दंड किसी भी प्रकार का हो सकता है। उनकी संतानें अयोग्य होतीं हैं या उनके घर मे बीमारियों का वास रहता है। पकड़े जाने पर सामाजिक रूप से भी वह अपमानित होते हैं। इसलिए स्वयं हमें किसी को ठगने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

हां, कभी स्वयं ठगे जाते हैं तब धन या वस्तु खोने का क्षणिक दुख होता है पर समय के साथ उसे भूल जाते हैं। पर अगर किसी और को हम ठगते हैं तो वह अपराध हमारे हृदय में शूल की तरह चुभा रहता है और इससे जीवन में हम सदैव विचलित रहते हैं। जब हमारे पास धन संपदा का अभाव होता है तब अनेक विचलित होकर यह विचार करते हैं कि दूसरे अमीरों की तरह ठगी का व्यापार प्रारंभ कर दें।

ऐसा कर नहीं पाते पर मन को व्यर्थ संताप देकर हम पाते भी कुछ नहीं है। सच बात तो यह है कि यहां गरीब सुखी नहीं है तो अमीर भी कोई आराम से रह नहीं पाते। पैसे से सुख मिलने का विचार केवल एक दृष्टिभ्रम है। आजकल तो ऐसी अनेक घटनाएं हो रही हैं, जिनमें बड़े-बड़े भ्रष्टाचारी जेल के सींखचों के अंदर पहुंच जाते हैं। उनकी लूट की रकम भी इतनी होती है कि सामान्य चोर भी शरमा जाए। कहने का अभिप्राय यह है कि लोगों के साथ ठगी करने वाले कभी न कभी कहीं न कहीं दंड भोगते हैं। अत: भले ही कोई हमें ठग ले पर दूसरे को ठगने का प्रयास हमें नहीं करना चाहिए।