जल्दबाजी में बिजली कम्पनियों द्वारा खरीदे जा रहे मीटर के मामले में उपभोक्ता परिषद पहुंचा नियामक आयोग

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  • प्रदेश में जल्दबाजी में बिजली कम्पनियों द्वारा खरीदे जा रहे इलेक्ट्रानिक मीटर/स्मार्ट मीटर/प्री पेड मीटर के मामले पर उपभोक्ता परिषद पहुचा नियामक आयोग दाखिल किया जनहित प्रत्यावेदन
  • उपभोक्ता परिषद का खुलासा, वर्तमान में बिजली कम्पनियों ने लगभग 33 लाख मीटर खरीद के बाद 20 लाख का आर्डर पेंडिंग साथ ही 40 लाख स्मार्ट मीटर खरीद पूरी और प्री पेड 1 करोड मीटर की प्रक्रिया जारी।
  • उपभोक्ता परिषद ने कहा कि वर्तमान में बिजली कम्पनियाॅं जो मीटर खरीद चुकी हैं और आगे प्रक्रिया चालू है वह कुल मिलाकर लगभग 2 करोड मीटर के करीब है। जिसकी लागत भविष्य में लगभग रू0 5814 करोड होगी। ऐसे में इतनी बडी सॅंख्या में कैसे लग जायेंगे मीटर, क्वालिटी पर गंभीरता क्यों नही?
  • नियामक आयोग अध्यक्ष का उपभोक्ता परिषद को आश्वासन पूरे मामले पर आयोग पावर कारपोरेशन से तलब करेगा रिपोर्ट और गंभीरता से जाॅंचेगा पूरी प्रक्रिया
लखनऊ 13 नवंबर। प्रदेश के लगभग 68 लाख अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं व नये संयोजनों पर मीटर लगाने के लिये प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा मनमाने तरीके से जल्दबाजी में खरीदे जा रहे करोडों के हाई प्रोफाइल मीटर प्रकरण पर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज नियामक आयेाग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल से मुलाकात कर लम्बी वार्ता की और एक जनहित प्रत्यावेदन सौंपा। जिसमें क्वालिटी सहित तकनीकी पहलुओं व बडी सॅंख्या में मीटर खरीद पर उठाया सवाल। उपभोक्ता परिषद का दावा उप्र की तरफ से केन्द्रीय एजेन्सी द्वारा खरीदे जा रहे 40 लाख स्मार्ट व 1 करोड प्री पेड मीटर में अनेकों हैं तकनीकी खामियाॅं जो भविष्य में उप्र के टैरिफ संरचना रूपी स्लैब पर नही उतरेगी खरी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा नियामक अयोग अध्यक्ष के सामने यह मुददा उठाया गया कि बिजली कम्पनियाॅं गुणवत्ता से बेखबर जल्दबाजी में मीटर खरीद पर आमादा हैं जबकि मीटर लगाने की प्रक्रिया एक सतत प्रक्रिया है जिसमें वर्षों लगेंगे। अभी तक प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅं द्वारा लगभग 33 लाख 44 हजार मीटर खरीदे जा चुके हैं जिसकी कुल लागत लगभग 527 करोड है वहीं बिजली कम्पनियों में लगभग 20 लाख मीटर खरीद की प्रक्रिया जारी है जिसकी कुल लागत लगभग 400 करोड होगी। इसी प्रकार ईईएसएल (एनर्जी इफिसेन्सी सर्विस लि0) जो केन्द्र की एजेन्सी है उ0 प्र0 के लिये 40 लाख स्मार्ट मीटर की खरीद को अंतिम रूप दे चुका है जिसकी कुल मदों के साथ बाक्स सहित लागत लगभग रू0 1346 करोड होगी और वहीं ईईसीएल द्वारा ही लगभग 1 करोड प्री पेड मीटर खरीद के लिये प्रक्रिया आरम्भ कर दी गयी है और एक्सप्रेशन आफ इंटेªस्ट का ड्राफ्ट जारी करते हुए प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है।
भविष्य में प्रक्रिया पूरी होने पर इसकी भी लागत लगभग रू0 3000 से 3540 करोड तक पहुचेगी। यह कहना गलत नही होगा कि प्रदेश में जितने मीटर खरीदे गये हैं और भविष्य में खरीदने की प्रक्रिया में हैं उनकी सं0 लगभग 2 करोड मीटर पहुचेगी जिसकी कुल लागत लगभग 5814 करोड पहुचेगी लेकिन वहीं मीटरों की गुणवत्ता से बेखबर बिजली कम्पनियाॅं व केन्द्रीय एजेन्सी मीटर खरीद पर आमादा हैं जिसका खामियाजा भविष्य में उपभोक्ताओ को ही भुगतना पडेगा।
नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया कि नियामक आयोग पूरे मामले पर गंभीर है। पावर कारपोरेशन से पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट मंगाकर पूरी प्रक्रिया की जाॅंच परख करेगा और तकनीकी पहलुओं पर छानबीन करेगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि यदि उदाहरण के लिये यह मान लिया जाये कि प्रदेश में 10 मीटर निर्माता कम्पनियाॅं प्रत्येक रोज 500 मीटर लगायेंगी तो 1 वर्ष में केवल 18 लाख 2 हजार 500 मीटर लगा पायेंगी। ऐसे में भविष्य में लगभग 2 करोड मीटर कितने वर्षों में लगेगा इसका तो राम ही मालिक है। अच्छा तो यह होता कि बिजली कम्पनियाॅं पहले कुछ मीटर खरीद कर उनकी गुणवत्ता परख लेतीं और उनकी परफारमेनस देख लेती इसके बाद बडे पैमाने पर मीटर खरीदती तो उचित होगा। जब से बिजली विभाग बना तब से लेकर आज तक केवल 1 करोड 85 लाख विद्युत उपभोक्ता अभी तक हैं। ऐसे में आने वाले 2 साल में 1 करोड विद्युत उपभोक्ता नये जोड ले जायें तो बहुत बडी बात होगी। ऐसे में इतनी बडी मात्रा में हडबडी में मीटर खरीद किसी के भी गले नही उतर रहा है।

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