- स्माल हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट के लिये केस-2 में एडाप्सन आफ टैरिफ के तहत नियामक आयोग में सार्वजनिक सुनवाई सम्पन्न जल्द ही अपर गंगा कैनाल पर सबसे सस्ती बिजली पैदा करने वाला लगेगा जल विद्युत उत्पादन गृह
- उपभोक्ता परिषद ने जल विद्युत निगम की सस्ती दर वाली याचिका का किया समर्थन अन्ततः नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल ने एडाप्सन आफ टैरिफ को दी मंजूरी
- उपभोक्ता परिषद ने नेडा पर कसा तन्ज कहा जल विद्युत निगम से नेडा ले सीख और भविष्य में सोलर की दरों को सस्ता करने का खोजे उपाय
- पहली बार किसी सार्वजनिक सुनवाई में जल विद्युत की सस्ती बिजली पर उपभोक्ता व लाईसेन्सी के प्रतिनिधि दिखे एक मत
लखनऊ 24 नवंबर। वि़द्युत अधिनियम, 2003 की धारा 63 के तहत उप्र जल विद्युत निगम लि. द्वारा स्माल हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट के लिये केस-2 के तहत ऐडाप्सन आफ टैरिफ की याचिका पर उप्र विद्युत नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल की अध्यक्षता में सार्वजनिक सुनवाई सम्पन्न हुई जिसमें पावर कार्पोरेशन जल विद्युत निगम सहित आयोग सचिव श्री संजय श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक श्री अभिषेक श्रीवास्तव सहित उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा उपस्थित थे।
गौरतलब है कि अपर गंगा कैनाल मेरठ सलावा पर 4.95 मेगा वाट व मुज्जफरनगर निरांजनी पर 7.70 मेगावाट व चितौरा पर 6.60 मेगावाट का जल विद्युत उत्पादन गृह लगाने के लिये बिडिंग रूट के तहत मै0 बी.एण्ड जी रिन्यूबल एनर्जी प्रा. लि. द्वारा सलावा के लिये 2 रू0 प्रति यूनिट चितौरा के लिये रू0 1.67 प्रतियूनिट व निरांजनी के लिये 1.65 प्रतियूनिट का लेबलाइज टैरिफ दिया गया था। जिसके आधार पर निविदा दाता एल-1 दर हासिल किया था। यह कहना गलत नहीं होगा कि यह बहुत ही निम्न दर है आने वाले समय में इसका फायदा प्रदेश की जनता को मिलेगा। पीपीए की शर्तो के आधार पर लगभग तीस महीने में यह उत्पादन गृह बनके तैयार हो जायेगा। पहली बार ऐसा हुआ जब जल विद्युत की सस्ती बिजली वाली याचिका पर बिजली विभाग के प्रतिनिधि व उपभोगता परिषद अध्यक्ष दिखे एक मत।
याचिका सुनवाई शुरू होते ही उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा द्वारा प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से सुनवाई में भाग लेते हुये जल विद्युत निगम की इस याचिका का पूर्ण समर्थन करते हुये यह प्रस्ताव दिया कि यह सबसे कम और सस्ती दर बिजली का मामला है जिसे अविलम्ब आयोग का स्वीकार कर लेना चाहिए साथ ही पावर कार्पोरेशन व उत्पादन निगम को भविष्य में इस प्रकार की सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाले नये उत्पादन गृहों को लगाने पर विचार करना चाहिए जिससे भविष्य में इस प्रकार की सस्ती बिजली का लाभ प्रदेश की जनता को मिल सकता है।
सुनवाई के दौरान नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल ने उपभोक्ता परिषद की बात का समर्थन करते हुये सुनवाई में ही जल विद्युत द्वारा दाखिल याचिका में तीनो उत्पादन गृहों चितौरा, निरांजनी व सलावा की सस्ती दरों को अनुमोदन देने का फैसला सुनाते हुये एडाप्सन आफ टैरिफ पर अपनी मंजूरी दे दी।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जिस प्रकार से जल विद्युत निगम द्वारा अपर गंगा कैनाल पर लगने वाले स्माल हाईड्रो प्रोजेक्ट के लिये सस्ती दरों पर पारदर्शी बिडिंग प्रक्रिया अपनाई इससे प्रदेश के नेडा व ऊर्जा विभाग को सोलर की उच्च दरों को कम करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। निश्चित तौर पर जल विद्युत निगम का यह प्रयास जहां एक तरफ सराहनीय है वहीं दूसरी तरफ नेडा द्वारा विगत दिनों सोलर की जो दरें रू0 7.02 प्रति यूनिट तय करायी गयी वह उपभोक्ता विरोधी दर को साबित करता है उसे भविष्य में सीख लेना चाहिए।







