उप्र माध्यमिक कम्प्यूटर अनुदेशक एसोशिएशन ने अपनी माँगों को लेकर किया माध्यमिक शिक्षा निदेशालय पर धरना प्रदर्शन

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प्रान्तीय अध्यक्ष सुश्री साजदा पंवार ने कहा कि दिनांक 25.06.2017 को हरदोई जिले की कम्प्यूटर शिक्षिका श्रीमती शिल्पी अवस्थी ने अपने पति के साथ 3 सालों से बेरोजगारी से तंग आकर फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जिसको लेकर संगठन कल दिनांक 26.07.17 को समय शाम 6.00 बजे माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से गाँधी प्रतिमा (जीपीओ) हजरतगंज तक कैंडिल मार्च निकालेगा। उन्होंने ये भी बताया कि प्रदेश के 4000 राजकीय/अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में लगभग 3 वर्षों से कम्प्यूटर शिक्षा पूरी तरह से बंद है और प्रत्येक विद्यालयों में लगभग 10-12 लाख रु0 की लागत से बनी कम्प्यूटर लैब धूल फाँक रही है। और शिक्षण कार्य करने वाले कम्प्यूटर अनुदेशक बेरोजगाारी और भुखमरी का दंश झेल रहे हैं। कम्प्यूटर अनुदेशकों के साथ-साथ कम्प्यूटर शिक्षा ग्रहण करने वाले लाखों छात्र/छात्राओं का भी भविष्य चैपट हो रहा है। क्योंकि माध्यमिक विद्यालयों में कम्प्यूटर विषय की मान्यता सन् 2001 में प्रदान की गई थी।

संगठन कम्प्यूटर शिक्षा और शिक्षकों की समस्याओं को लेकर लगातार 3 वर्षों से संघर्ष करता आ रहा है जिससे शासन और विभाग ने कम्प्यूटर शिक्षा की महत्ता को ध्यान में रखते हुये कम्प्यूटर शिक्षा को पुनः संचालित कराने के लिये तथा बेरोजगार कम्प्यूटर अनुदेशकों को एक निश्चित मानदेय पर सेवा बहाल करने के लिये 2 वर्ष पहले ही कार्यवाही पूर्ण कर ली थी। लेकिन राज्य सरकार द्वारा मानदेय का बजट आवंटित न करने से कम्प्यूटर अनुदेशकों का भविष्य चैपट हो रहा है। जबकि संघर्ष के दौरान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं एवं महामहीम राज्यपाल महोदय ने पिछली सरकार को पत्र लिख कर कम्प्यूटर अनुदेशकों की समस्याओं का समाधान कराने की माँग उठाई थी। इसलिये माध्यमिक कम्प्यूटर अनुदेशकों को योगी सरकार से पूरी उम्मीद थी कि बेरोजगार कम्प्यूटर अनुदेशकों के साथ न्याय होगा। लेकिन अभी तक सरकार द्वारा कोई उचित निर्णय नही लिया गया, जबकि दिनांक 07.05.2017 को माननीय उपमुख्यमंत्री/माध्यमिक शिक्षा मंत्री जी की अध्यक्षता में तथा माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री, प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा निदेशक की उपस्थिति में संगठन के प्रतिनिधि मण्डल के साथ बैठक हुई थी। बैठक में माध्यमिक कम्प्यूटर अनुदेशकों को मानदेय पर सेवा बहाल करने का पूर्ण आश्वासन मिला था। और दिनांक 07.06.2017 को आन्दोलन के दौरान मा0 मुख्यमंत्री जी के विशेष सचिव श्री अजय सिंह जी के साथ पंचम तल (मुख्यमंत्री कार्यालय) पर बैठक हुई थी। बैठक में जल्द सेवा बहाल कराने का आश्वासन मिला था। लेकिन अभी तक सरकार ने न तो केबिनैट में शामिल किया और न ही कार्यवाही को पूर्ण कराया। जिससे प्रदेश के 4000 माध्यमिक कम्प्यूटर अनुदेशकों में निराशा और असंतोष की भावना व्याप्त हुई।

प्रदेश महामंत्री अनिरुद्ध पाण्डेय ने कहा कि मा0 प्रधानमंत्री जी डिजीटल इण्डिया बनाने का सपना देखते हैं और उ0प्र0 सरकार विद्यालयों के आधुनिकीकरण तथा तकनीकि शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है और बेरोजगारों को जल्द रोजगार देने की बात भी कही जाती है। वहीं दूसरी तरफ उ0प्र0 के माध्यमिक विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा पिछले 3 वर्षों से ठप्प है और 4000 युवा कम्प्यूटर अनुदेशक बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। लेकिन योगी सरकार से पूरी उम्मीद है कि जल्द कार्यवाही पूर्ण कराकर इसी सत्र से कम्प्यूटर शिक्षा संचालित कर कम्प्यूटर अनुदेशकों के साथ न्याय करेगी।
धरने में प्रवेन्द्र सिंह (उपाध्यक्ष), कु0 साजिया (उपाध्यक्ष), पुण्य प्रकाश त्रिपाठी (प्रवक्ता), बृह्म प्रकाश दुबे (कार्यवाहक संगठन मंत्री), इमरान खान मंसूरी (कोषाध्यक्ष), सत्यम बाजपेयी (संयुक्त मंत्री), दीपक तिवारी (सचिव), सतीश दुबे, आलोक रंजन पाण्डेय, विमलेश पटेल, अमित बाजपेयी, नरेश बाजपेयी, देवेन्द्र सिंह, कु0 नुसरत गुलिस्ता, अनुपमा सिंह, सीमान्त शर्मा, नीरज शुक्ला, कु0 ममता सिंह, विनय शनी, दिलीप बाजपेयी, पवन पाण्डेय, शरद त्रिपाठी, संजय गाजीपुर एवं अन्य पदाधिकारी/शिक्षक उपस्थित रहे।

यह हैं प्रमुख मांगे

  • प्रदेश के 4000 राजकीय/अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा को तत्काल संचालित करने के लिये पद सृजित होने तक पूर्व में कार्य कर चुके कम्प्यूटर अनुदेशकों को जूनियर अनुदेशकों की भाँति मानदेय दिया जाये।
  • 4000 राजकीय/अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में पंजाब तथा हिमाचल प्रदेश सरकार की भाँति पूर्व में कार्य कर चुके कम्प्यूटर अनुदेशकों का सीधे समायोजन किया जाये।
  • राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सृजित किये गये 1548 कम्प्यूटर शिक्षकों के पदों पर पूर्व में कार्य कर चुके कम्प्यूटर अनुदेशकों को समायोजित किया जाये।
  • संघर्ष के दौरान संगठन के पदाधिकारियों पर गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमों को समाप्त किया जाये।

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