- देश के अनेकों राज्यों ने अपने प्रदेश के उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने के लिये केन्द्रीय सेक्टर एनटीपीसी के महंगे उत्पादन गृहों की बिजली को किया सरेण्डर, उप्र सरकार कब उठायेगी कदम।
- उड़ीसा, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, सिक्किम, मेघालय, मणिपुर, पंजाब, झारखण्ड व मध्य प्रदेश ने उठाया कदम, यूपी चुप क्यों?
- बिजली कम्पनियों के कुल एआरआर 70460 करोड़ में से केवल 52244 बिजली खरीद, ऐसे में महंगी बिजली खरीद पर लगाना होगा विराम, तभी प्रदेश के उपभोक्ताओं को उपलब्ध हो सकेगी सस्ती बिजली।
लखनऊ 10 सितम्बर। देश के अनेकों राज्य जैसे उड़ीसा, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, सिक्किम, मेघालय, मणिपुर, पंजाब, झारखण्ड व मध्य प्रदेश ने पूर्व में आवंटित केन्द्रीय सेक्टर एनटीपीसी की महंगी बिजली को इसलिये सरेण्डर कर दिया, क्योंकि वहां के राज्यों ने माना कि एनटीपीसी के कुछ उत्पादन गृह जैसे- अण्टा, औरैया, दादरी, झझर, कोल्डम सहित अनेकों उत्पादन गृहों की बिजली इतनी महंगी है कि उसको लेने के चलते राज्य में बिजली खरीद की औसत लागत बढ़ रही है और उसका खामियाजा राज्य के उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। ऐसे में उप्र राज्य अपने प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को राहत देने के लिये एनटीपीसी की महंगी बिजली को कब सरेण्डर करेगा। उप्र में भी यदि बिजली दर प्रस्ताव में दिये गये मसौदे पर गौर करें तो उप्र आज भी अण्टा से रू0 5.27 प्रति यूनिट में बिजली खरीद रहा है। औरैया से रू0 6.36 प्रति यूनिट में बिजली खरीद रहा है। कोल्डम से रू. 6.51 प्रति यूनिट बिजली खरीद रहा है। इसी प्रकार दादरी गैस से भी महंगी बिजली खरीद रहा है। उपभोक्ता परिषद प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री महोदय से मांग करता है कि वह इस पूरे मामले पर हस्तक्षेप कर महंगी बिजली को अविलम्ब सरेण्डर करायें।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उप्र में महंगी बिजली खरीदने के लिये राज्य की सरकारें जिम्मेदार हैं, ऐसे में उसका खामियाजा उपभोक्ताओं को क्यों दिया जा रहा है। केस-1 में एम.बी. पावर से आज भी रू. 4.98 प्रति यूनिट केएसके से रू. 4.93 प्रति यूनिट में बिजली खरीदी जा रही है, और भी केस-1 में अनेकों सप्लायर हैं, जिनसे भविष्य में महंगी बिजली खरीदी जायेगी और अन्ततः उसका खामियाजा प्रदेश के उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा। प्रदेश का वर्ष 2017-18 का एआरआर जहां लगभग 70460 करोड़ का है, उसमें गौर करें तो केवल बिजली खरीद ही लगभग 52244 करोड़ की है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि पूरे बिजली दर में 80 प्रतिशत भाग केवल बिजली खरीद का होता है, यदि उस पर प्रतिबन्ध लगाते हुए सस्ती बिजली खरीदने की दिशा में कार्य किया जाये तो निश्चित तौर पर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध हो जायेगी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि विगत दिनों रिलायन्स रोजा की दोनों इकाईयों की बिजली दरें आयोग द्वारा तय की गयी, उसमें कटौती की गयी है और कई सौ करोड़ रूपया रिलायन्स द्वारा पावर कार्पोरेशन को दिया जाना है। सस्ती दर को आज भी बिजली कम्पनियों ने अपने एआरआर में नहीं सुधारा, जिसके चलते एआरआर में औसत बिजली खरीद की लागत जो रू. 4.11 प्रति यूनिट से घटकर रू0 4.05 प्रति यूनिट पर आयी है वह और भी कम होगी। निश्चित तौर पर यह दर रू. 4 प्रति यूनिट के नीचे आयेगी। इस प्रकार बिजली कम्पनियों द्वारा प्रस्तावित औसत वृद्धि में स्वतः कमी हो जायेगी।







