राम मंदिर विवाद : सुलह कराने अयोध्या क्या पहुंचे श्री श्री, संतों में मचा घमासान

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बदले-बदले से नजर आए, उन्होंने कहा कि अब बातचीत में देर हो चुकी है

अयोध्या, 17 नवंबर। राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद में मध्यस्थता की कोशिश करने के लिए श्री श्री रविशंकर गुरुवार को अयोध्या क्या पहुंचे विवाद बढ़ गया। उनकी इस कोशिश के बीच संत समाज में घमासान मचा हुआ है। निर्मोही अखाड़े ने जहां विश्व हिंदू परिषद पर राम मंदिर के नाम पर घोटाला करने का आरोप लगाया है, वहीं राम मंदिर आंदोलन से प्रमुखता से जुड़े रहे राम विलास वेदांती ने श्री श्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

निर्मोही अखाड़े के सदस्य सीताराम ने आरोप लगाया कि वीएचपी ने राम मंदिर के नाम पर 14 सौ करोड़ का घोटाला किया है। उन्होंने कहा, 14 सौ करोड़ खा गए वीएचपी के लोग, हम लोग राम जी के पुत्र हैं, सेवक हैं, हमें कभी भी पैसे की पेशकश नहीं हुई। पैसे खाकर तो नेता लोग बैठे हैं। सीताराम ने कहा कि वीएचपी ने घर-घर घूम कर एक-एक ईंट मांगी, पैसा जमा किया और फिर पैसे को खा गए। उन्होंने कहा कि जितने फर्जी न्यास बने हैं, वे मुसलमानों को मजबूत करना चाहते हैं। रामलला यानी निर्मोही अखाड़ा और निर्मोही अखाड़ा यानी रामलला।

उधर, वीएचपी ने इस आरोप को निराधार बताया है। प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि राम मंदिर के लिए वीएचपी ने कभी किसी से एक पैसा नहीं लिया। 1964 में वीएचपी आस्तित्व में आई था और हर साल इसका ऑडिट होता है। हमारे पास एक-एक पैसे का हिसाब है। राम विलास वेदांती तो श्री श्री की मंशा पर बुधवार को ही सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था, श्रीश्री को अपना एनजीओ चलाना चाहिए और विदेशी चंदे को जमा करना चाहिए। श्रीश्री ने काफी धन इकट्ठा कर रखा है और उसकी जांच से बचने के लिए वह राम मंदिर के मुद्दे में कूद पड़े हैं।

गुरुवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बदले-बदले से नजर आए। उन्होंने कहा कि अब बातचीत में देर हो चुकी है। श्रीश्री से मुलाकात के दौरान राम मंदिर के मसले पर विस्तार से कोई बातचीत नहीं हुई। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में पांच दिसंबर से अयोध्या मसले पर हर दिन सुनवाई होनी है। श्रीश्री इस विवाद का कोर्ट के बाहर समाधान कराना चाहते हैं। 30 अक्टूबर-2008 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित भूमि को तीन हिस्सों में विभाजित करते हुए दो हिस्सों को राम मंदिर के पैरोकारों और एक हिस्सा बाबरी मस्जिद के पैरोकारों को सौंपने का आदेश किया था।

 मुस्लिम बुद्धिजीवी बोले, अयोध्या विवाद का हल सिर्फ सुप्रीम कोर्ट से

लखनऊ । अयोध्या में रामजन्मभूमि विवाद के हल को लेकर शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड और श्रीश्री रविशंकर के बीच बातचीत को गैरजरूरी करार देते हुए मुस्लिम बुद्धिजीवियों का मानना है कि इस मसले पर उच्चतम न्यायालय का फैसला ही सर्वमान्य होगा। शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने यहां मीडिया से कहा कि मैं बातचीत का विरोधी नहीं हूँ, मगर समझौते की बात मामले से जुड़े लोगों से ही होना चाहिए। उत्तर प्रदेश शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड सरकार द्वारा चुनी हुई एक संस्था है। वह देश के करीब सात करोड़ शियों की नुमाइंदगी कतई नहीं करती।

दरअसल वक्फ बोर्ड का जिम्मा मस्जिद समेत सभी मजहबी इमारतों का प्रबंधन करना होता है मगर वह किसी भी इमारत को दान में नहीं दे सकता है। वहीं शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता यासूब अब्बास ने कहा वसीम रिजवी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन हैं। वह एक सरकारी महकमा है। शिया पर्सनल लॉ बोर्ड राम मंदिर मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ है। हम चाहते हैं कि वहां मस्जिद बने। साथ ही जो विवाद है वह कोर्ट या बातचीत से हल हो।

श्रीश्री रविशंकर ने मुझसे मिलने की ख्वाहिश जतायी थी, मगर मैने कहा यदि आपके पास कोई ठोस फार्मूला हो तो बात करें। उन्होंने कहा कि शिया पर्सनल लॉ बोर्ड का काम शरई मसलों पर अपनी राय देने का है, लेकिन यहां विवाद जमीन है, जो सुन्नी वक्फ बोर्ड की है। इसलिए वक्फ बोर्ड के अलावा किसी और की राय का कोई मतलब नहीं है। फिर चाहें वह पर्सनल ला बोर्ड ही क्यों न हो? मुस्लिम समाज में कोई बंटवारा नहीं है केवल कुछ लोग अपने फायदे के लिए ऐसा कर रहे हैं।

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