Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Thursday, June 25
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग

    इंटीरियर डेकोरेशन में वास्तविक हरियाली बनी पहली पसंद

    ShagunBy ShagunJune 22, 2025 ब्लॉग No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 637

    पॉजिटिव व्यू : बृजेश सिंह तोमर

    दिल्ली की ओर रुख करते हुए मन में एक ही प्रश्न बार-बार कौंधता रहा— क्या इस बार भी वही धूल-धुआँ और दमघोंटू हवा स्वागत करेगी? बीते कुछ वर्षों से दिल्ली की हवा जहरीली होती जा रही है, और आंकड़े इसकी भयावहता की पुष्टि भी करते हैं। अक्टूबर से जनवरी तक दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) अक्सर 400 से ऊपर चला जाता है, जो कि “गंभीर” श्रेणी में आता है। WHO के मानकों के मुताबिक, जहाँ PM 2.5 की सुरक्षित सीमा 5 µg/m³ है, वहीं दिल्ली में यह कई गुना अधिक दर्ज होता है। इस प्रदूषण की गिरफ्त में केवल वृक्ष नहीं, जीवन तक घुटता नज़र आता है।

    लेकिन इस बार की दिल्ली यात्रा केवल निराशा लेकर नहीं आई बल्कि कुछ ऐसा भी देखने को मिला, जिसने उम्मीद की हरियाली को फिर से ज़िंदा कर दिया। यह अनुभव था Microsoft के Delhi Office का, जहाँ केवल तकनीक नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व की भावना भी जीवित है। इस भव्य भवन की सबसे विशेष बात है इसकी वर्टिकल गार्डन दीवारें, जिनमें जीवित पौधे लगे हैं। यह दीवारें कोई आभासी सजावट नहीं, बल्कि शुद्ध हवा की एक सजीव कोशिश हैं। इन दीवारों से न केवल वातावरण शुद्ध होता है, बल्कि वहाँ से आती प्राकृतिक चिड़ियों की मधुर चहचहाहट पूरे माहौल को सजीव और सुकूनदायक बना देती है। वहाँ कार्यरत लोगो की थकान को एक पल में दूर कर देती है।

    यह दृश्य एक सवाल खड़ा करता है,क्या भव्यता अब ईंट, टाइल्स और मार्बल की मोहताज रह गई है या वह अब हरियाली में दिखाई देती है? यकीनन, आज के समय में हरियाली ही असली वैभव है जो आँखों को नहीं, आत्मा को राहत देती है।

    हालाँकि आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली की आबादी के हिसाब से ग्रीन कवर बेहद असंतुलित है। लगभग 2 करोड़ लोगों के लिए दिल्ली का कुल क्षेत्रफल 1,484 वर्ग किमी है, जिसमें हरित क्षेत्र लगभग 23% है। पर्यावरणविदों के अनुसार एक स्वस्थ जीवन के लिए प्रति व्यक्ति कम से कम 7 से 8 पूर्ण विकसित पेड़ आवश्यक हैं। इस लिहाज से देखें तो दिल्ली को 14 से 16 करोड़ पेड़ों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में यह संख्या लाखों में ही सिमटी हुई है। यानी शहर में हरियाली अब जरूरत से कई मील पीछे है।

    फिर भी, आशा की किरण यही है कि प्रयास शुरू हो चुके हैं। देर से ही सही, पर लोग अब चेतने लगे हैं। सरकारी संस्थान, कॉर्पोरेट सेक्टर, शैक्षणिक संस्थाएं और आवासीय सोसाइटीज़ अब छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव की नींव रख रही हैं। वर्टिकल गार्डन, रूफटॉप फार्मिंग, ग्रीन क्लासरूम, टेरेस प्लांटेशन जैसी पहलें केवल सजावटी प्रयोग नहीं हैं,ये भविष्य के लिए की जा रही जिम्मेदारियाँ हैं।

    दिल्ली के पड़ोसी शहर नोएडा ने इस दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उत्तर प्रदेश में आने वाला यह शहर अब देश के हरित और व्यवस्थित शहरों में गिना जा रहा है। वहाँ की चौड़ी, साफ-सुथरी सड़कों के दोनों ओर घने पेड़ों की कतारें, सुव्यवस्थित ग्रीन बेल्ट्स और डिवाइडरों की हरियाली मन को मोह लेती है। वहाँ के सार्वजनिक स्थानों पर हरित योजना स्पष्ट दिखाई देती है।यह साबित करता है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो कंक्रीट के जंगलों में भी ऑक्सीजन के झरोखे बनाए जा सकते हैं।

    पर इसी मार्ग में बहती यमुना नदी ने चिंतन के लिए मजबूर कर दिया। दिल्ली और नोएडा को बांटती यह जीवनधारा अब झाग, बदबू और गंदगी से भरी दिखी। कभी पूजा की जाने वाली यह नदी अब शहरों की गटर बन चुकी है। हरित प्रयासों के साथ-साथ जल शुद्धि और संरक्षण भी उतना ही अनिवार्य है। यमुना को पुनर्जीवित करना केवल पर्यावरण नहीं, संस्कृति और आत्मा को पुनः जीवन देना है।

    दुनिया में इस समय लगभग 3.04 ट्रिलियन पेड़ हैं, यानी प्रति व्यक्ति लगभग 422 पेड़। भारत में यह संख्या घटकर 28-30 पेड़ प्रति व्यक्ति रह जाती है, और दिल्ली जैसे शहरों में यह संख्या 5 से भी कम है। यह आंकड़े चेताते हैं कि यदि अभी नहीं जागे, तो अगली पीढ़ी के लिए हवा सिर्फ इतिहास की बात बन जाएगी।

    Microsoft जैसी कंपनियों द्वारा किया गया यह हरित प्रयोग केवल एक संस्था का दायित्व नहीं, सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। जब एक दफ्तर अपने इंटीरियर को ऑक्सीजन देने वाले पौधों से सजाता है, तो वह सिर्फ CSR नहीं करता, बल्कि हमें यह याद दिलाता है कि हमारी सबसे जरूरी जरूरतें प्रकृति से आती हैं, मशीनों से नहीं।

    अब समय आ गया है कि हम केवल शिकायत करने वाले नहीं, समाधान देने वाले नागरिक बनें।एक पौधा लगाएँ, एक गमला सजाएँ,एक बालकनी हरा करें,एक दीवार को वर्टिकल गार्डन में बदलें।

    और जहाँ हो सके, एक नदी के लिए आवाज़ उठाएँ..।अब समय आ गया है कि हम पर्यावरण के प्रदूषण को रोकने में जिस भूमिका का भी निर्वहन कर सकते है,वो करे, क्योंकि अब भव्यता सिर्फ इंटीरियर डिज़ाइन से नहीं,भव्यता अब हरियाली से है और हवा अब कोई मुफ़्त उपहार नहीं,शुद्ध हवा अब जीवन का अधिकार है।

    • (लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं पर्यावरण चिंतक है)

    Shagun

    Keep Reading

    Who is responsible for the growing anarchy in society

    समाज में बढ़ रही अराजकता का जिम्मेदार कौन?

    Ugh! This distorted capitalism and mentality of exploitation.

    उफ़! ये विकृत पूंजीवाद और शोषण की मानसिकता

    A World Drifting Towards Loneliness: Questions About the Institution of Family

    अकेलेपन की ओर बढ़ती दुनिया: परिवार की संस्था पर सवाल

    मुंबई में तोड़फोड़ की राजनीति: शिवसेना का दूसरा टूटना

    Shared heritage gave the country 'Amrit' (nectar), while extremism is spreading 'poison'!

    साझी विरासत ने देश को दिया ‘अमृत’ तो कट्टरपंथ दे रहा ‘ज़हर!’

    Idli. For just one rupee—not a bad deal!

    इडली. सिर्फ एक रुपए में, सौदा बुरा नहीं !

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Earth's Fury: Devastation in Venezuela from twin powerful earthquakes; tremors felt in India too

    धरती का कहर: वेनेजुएला में दोहरे शक्तिशाली भूकंप से तबाही, भारत में भी कांपी धरती

    June 25, 2026
    World's largest 5,211 kg mercury Shivling installed in Haridwar.

    हरिद्वार में विश्व का सबसे विशाल 5211 किलो पारद शिवलिंग स्थापित

    June 25, 2026
    पैकेजिंग सेक्टर में आईपीओ की दोहरी धूम: नैक और अथर्वा साथ में बाजार में दस्तक देंगे

    पैकेजिंग सेक्टर में आईपीओ की दोहरी धूम: नैक और अथर्वा साथ में बाजार में दस्तक देंगे

    June 25, 2026
    Who is responsible for the growing anarchy in society

    समाज में बढ़ रही अराजकता का जिम्मेदार कौन?

    June 25, 2026
    Ugh! This distorted capitalism and mentality of exploitation.

    उफ़! ये विकृत पूंजीवाद और शोषण की मानसिकता

    June 25, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading