Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 583 बिजली गायब लुप्प से, कहां गई किस ओर। पीछे-पीछे नल गया, दुख का ओर न छोर।। दुख का ओर न छोर, रोज की यही कहानी, आश्वासन पर जिए लोग बिन बिजली पानी, गर्मी का है को जान जाती है निकली। नल भी सू..सू.. करें, लुप्प से गायब बिजली।। -सीएम त्रिपाठी
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन