Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 612 फीके होते जा रहे हैं अब सारे त्यौहार। चैन न लेने दे रही, महंगाई की मार।। महंगाई की मार, पड़े जीने को लाले, दें अंधकार का राज, कैद हो रहे हैं उजाले, राजनीति के द्वार, दिए जलते हैं घी के। जनता के त्यौहार, हुए जाते हैं फीके।। -सीएम त्रिपाठी
‘सेल्स’ अब सिर्फ बिजनेस नहीं, जीवन का जरूरी कौशल है! मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की नितीन ढबू की किताब का विमोचन