विकसित होने के लिए कायरता ज़रूरी है
मेरी याददाश्त ने
मेरा साहस ख़राब किया
मेरी पहचानों ने मेरी याददाश्त
मेरे संस्थानों ने मेरी वर्तनी ख़राब की
मेरे मेहमानों ने मेरा घर
मेरे रोज़गार और मेरे दोस्त एक एक कर मुझसे अलग होते गए
इस बीच वह हिंदी भी नहीं रही जिसमें लिखना शुरू किया
ख़र्च के लिए दूसरी बोलियों और भाषाओं से
आदान और आहरण का काम चलता रहा
एक रोग धीमे-धीमे सब कुछ ख़त्म कर रहा था
मैं जिस तरह सोचता और बोलता था उस तरह ही लिखने लगा
बाद इसके मेरा बोलना सुनने के क़ाबिल नहीं रहा
और मेरा लिखना पढ़ने के
यों सब अमर हुए
बस एक मैं ही मारा गया
- अविनाश मिश्र







