Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 525 कलश पर वर्षा का जल भाव विह्वल नभ-गगन। अनवरत सागर नयन।। गूँजता था शब्द शब्द आज है शांत पल जल रहे है ज्योति पुंज राष्ट्रवादी है अलख मार्ग होगा फिर प्रशस्त।। – दिलीप अग्निहोत्री