ज़िन्दगी यूँ ही हर पल मुस्कुराए ज़रूरी तो नहीं,
मुकम्मल हर अफसाना हो जाए ज़रूरी तो नहीं,,
तुम सच में अच्छे तो बहोत लगते हो मुझे मगर,
मोहब्बत भी तुम्हीं से हो जाए ज़रूरी तो नहीं
- शाहरुख़ सिद्दीकी
हुआ है तुझ से बिछड़ने के बाद ये मालूम
कि तू नहीं था तिरे साथ एक दुनिया थी
- फ़राज़

ज़िन्दगी सुकून से जीने की तमन्ना
करते हो…
मगर मेहनत करने की हिम्मत
कौन करता है?
मुहब्बत तो सब सच्चे ही करते है
मगर अपनों से बगावत
कौन करता है?
ख्वाब तो सब देखते है अपनी
दुनिया की…
मगर ख्वाब को हक़ीक़त
कौन करता है?
- सक्कु







