Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Sunday, August 9
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»साहित्य

    कोई मुझे अंगारों की तासीर बताये…

    By June 26, 2018 साहित्य No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 590

    सूर्य भानु गुप्त: जिन्हें कमलेश्वर नहीं धर्मवीर भारती मिले


    वीरेन्द्र जैन

    एक दिन की यात्रा के बाद रात बारह बजे लौटा। थकान तो थी किंतु दिन भर अखबार नहीं पढ पाया था और अखबार पलटे बिना शायद नींद नहीं आती। एक अखबार के स्थानीय संस्करण में खबर थी कि सुप्रसिद्ध गीतकार और शायर सूर्य भानु गुप्त को जावेद अख्तर सम्मान 25 मार्च को दिया जायेगा। खबर पढते ही नींद दूर खिसक गयी। स्मृतियों ने कुरेदना शुरू कर दिया।

    अपने एक सहपाठी मित्र शिव मोहन लाल श्रीवास्तव के सम्पर्क में आने के बाद मुझे भी पत्र व्यवहार का रोग लग चुका था भले ही उनकी तुलना में यह दो चार प्रतिशत ही था। उन दिनों युवाओं का पत्रिकाओं में प्रकाशन भी बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी, पुस्तकाकार रूप में आना तो और बड़ी बात थी क्योंकि आज की तरह पैसे खर्च करके सब कुछ नहीं मिल जाता था। मैंने जल्दी ही धर्मयुग और कादम्बिनी, आदि में, जो उस समय की प्रमुख पत्रिकाएं थीं, में  प्रकाशन का गौरव पा लिया था और उसे बड़ी उपलब्धि समझने के भ्रम में था।

    उन दिनों जो लोग धर्मयुग में प्रमुखता से छपते थे उनमें से एक नाम सूर्य भानु गुप्त का भी था। उनकी गज़लें और गीत मुझे बहुत पसन्द आते थे। मैं अपने छुटपुट प्रकाशन का हवाला देकर लोकप्रिय लेखकों से वैसे ही पत्र व्यवहार शुरू कर देता जिसके लिए चूहे के हल्दी की गांठ पाकर पंसारी बनने का मुहावरा बना होगा।

    इमरजैंसी लग चुकी थी व ‘मुनादी’ छापने के उत्साह को भूल कर भारती जी धर्मयुग का एक छप चुका अंक वापिस ले चुके थे। कई स्वीकृत रचनाएं लौटायी जा चुकी थीं, जो इस बात का संकेत थीं कि अब धर्मयुग में क्या क्या नहीं छप सकता। थोड़ा समय गुजरने के बाद धर्मयुग में सूर्यभानु गुप्त की एक गज़ल छपी जिसका शीर्षक था ‘खामोशी’। यह इमरजैंसी की खामोशी का बयान करते हुए भी प्रकट में गैरराजनीतिक कविता/ गज़ल थी। मैंने धर्मयुग के रंग और व्यंग्य स्तम्भ में इस रचना पर एक पैरोडीनुमा रचना लिखी जो वैसे तो बहुत साधारण थी किंतु उसके साथ में एक टिप्पणी थी कि सूर्यभानु गुप्त की उक्त रचना पर यह एक प्रतिक्रिया है पर स्पष्ट कर दूं कि इन पंक्तियों का लेखक प्रतिक्रियावादी नहीं है। उन दिनों अनेक लोगों को प्रतिक्रियावादी बता कर जेल में डाल दिया गया था इसलिए यह एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी थी। भारतीजी ने टिप्पणी के साथ रचना छाप दी। स्मृति के अनुसार कुछ पंक्तिया इस प्रकार थीं-

    गुप्तजी की गज़ल है खामोशी

    खूब ऊंची अकल है खामोशी

    एक दर्जन भर शेर मारे हैं

    खूब प्यारा कतल है खामोशी

    मेरे समुदाय में सभी के लिए

    ढेर सा कौतुहल है खामोशी

    और इसी तरह के साधारण सी तुकबन्दियों की कुछ पंक्तियां और थीं। बाद में मुझे लगा कि एक अच्छी खासी  रचना पर धर्मयुग में पैरोडी लिखना ठीक नहीं हुआ। मैंने लगभग क्षमाप्रार्थी भाव में गुप्तजी को पत्र लिखा। किसी उत्साह में उस पत्र में कई बार ‘सु’ शब्द का अतिरेक हो गया। लगभग उसी भाव में उनका उत्तर भी मिला जो दिया जा रहा है।

    सूर्य भानु गुप्त

    प्रिय भाई

    पत्र मिला आपका, धन्यवाद।

    आपका नाम मेरे लिए [सु] परिचित है क्योंकि आप इतना अधिक [सु] प्रकाशित होते रहते हैं – [सु] पत्रिकाओं में कि कोई भी ,माफ कीजिएगा [सु] [के लिए] पाठक आपके [सु] नाम से [सु] अपरिचित नहीं रह सकता।

    मैं पत्रों के उत्तर बहुत नहीं दे पाता, यह सही है, मगर एक बार अवश्य देता हूं, अब ये आप पर [सु] निर्भर है कि मेरे न चाह्ते हुए भी आप मुझसे [सु] पत्र लिखवा लें । [सु] वास्तविकता यह है कि बम्बई में [सु] समय क्या [कु] समय भी मुश्किल से मिलता है। एक इंजीनियरिंग कम्पनी में वरिष्ठ सांख्यकी सहायक हूं, अर्थात विशुद्ध क्लर्की समझिए. सुबह 7 बजे पर निकला शाम 7 बजे घर पहुँच पाता हूं. दफ्तर घर से 25 मील है , लिहाजा अब घंटे दो घंटे जो [सु] समय बचता है उसमें बहुत से काम होते हैं- थोड़ा आराम, पढना,लिखना, घर, दोस्त, और सामाजिक दायित्व, लिहाजा पत्र व्यवहार ज्यादा चल नहीं पाता . आप किसी [सु] गलतफहमी के शिकार न हो जाएं इसलिए [सु] स्पष्टीकरण कर दिया. मैं साफगोई का कायल हूं, इससे उम्र भर को आराम मिलता है।

    किताबें या किताब अभी तक नहीं निकल पाई कोई। अविवाहित हूं, मगर घर की कुछ ऐसी जिम्मेवारियां सर पर हैं कि विवाहित से भी गयी गुजरी दशा है। संक्षेप में इतना ही , सानन्द होंगे सस्नेह आपका

    सूर्यभानु गुप्त

    24 अप्रैल 76 दो बजे

    इसके बाद 1977 मैं बम्बई [ तब मुम्बई का यही नाम था] प्रवास के दौरान उनके निवास पर भी गया जो दादर में था और सोजपाल काया बिल्डिंग का नाम मुझे लगभग रटा हुआ था। मुझे लगता था कि देश व्यापी ख्याति के इस कवि के फ्लैट का नम्बर बिल्डिंग का कोई भी बता देगा पर कोई नहीं जानता था। वे शायद अपनी बड़ी बहिन के साथ उनके ही फ्लेट में रहते थे। एक जगह दो लोग बैठे हुए थे तो सोचा आखिरी बार उनसे पूछ लिया जाये। दोनों ने एक दूसरे की ओर देखा और कहा कि अरे वह तो नहीं , ऊषा का भाई, फिर अनुमान से एक फ्लेट नम्बर बताया तब मैं उनके निवास पर पहुंचा। उस दिन मुझे अपनी लघुता का अहसास हुआ कि जब इतने बड़े कवि को उसके पड़ोसी नहीं जानते तो मुझे कौन जानेगा। गुब्बारे की गैस निकली और मैं जमीन पर आ गया।

    सूर्यभानु गुप्त के पुराने परिचय में लिखा है जो कई वर्षों से अद्यतन नहीं हुआ कि

    जन्म : 22 सितम्बर, 1940, नाथूखेड़ा (बिंदकी), जिला : फ़तेहपुर ( उ.प्र.)। बचपन से ही मुंबई में । 12 वर्ष की उम्र से कविता लेखन की शुरुआत।

    प्रकाशन  : पिछले 50 वर्षो के बीच विभिन्न काव्य-विधाओं में 600 से अधिक रचनाओं के अतिरिक्त 200 बालोपयोगी कविताएँ प्रमुख प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। समवेत काव्य-संग्रहों में संकलित एवं गुजराती, पंजाबी, अंग्रेजी में अनूदित ।

    फ़िल्म गीत-लेखन : ‘गोधूलि’ (निर्देशक गिरीश कर्नाड ) एवं ‘आक्रोश’ तथा ‘संशोधन’ (निर्देशक गोविन्द निहलानी ) जैसी प्रयोगधर्मा फ़िल्मों के अतिरिक्त कुछ नाटकों तथा आधा दर्जन दूरदर्शन- धारवाहिकों में गीत शामिल।

    प्रथम काव्य-संकलन : एक हाथ की ताली (1997), वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली – 110 002

    पुरस्कार : 1. भारतीय बाल-कल्याण संस्थान, कानपुर । 2. परिवार पुरस्कार (1995), मुम्बई ।

    पेशा : 1961 से 1993 तक विभिन्न नौकरियाँ । सम्प्रति स्वतंत्र लेखन ।

    हिन्दी गज़ल के क्षेत्र में गुप्तजी ने दुष्यंत कुमार से पहले लिखना और छपना शुरू कर दिया था किंतु ऐसा लगता है कि उन्हें कोई कमलेश्वर नहीं मिले जिनके बारे में दुष्य़ंतजी ने लिखा है कि

    मैं हाथों में अंगार लिए सोच रहा था

    कोई मुझे अंगारों की तासीर बताये

    और यह तासीर उनके परम मित्र कमलेश्वर जी ने बतायी व सारिका में छाप कर उनकी कालजयी रचनाओं को देशव्यापी बना दिया। वहीं भारतीजी अपनी गुण ग्राहकता के अनुसार रचना की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करते थे। वे अपनी पसन्द के रचनाकारों की श्रेष्ठ रचनाओं को भी एक तयशुदा संख्या से अधिक का अवसर नहीं देते थे। उन्होंने किसी से कहा था कि काका हाथरसी वाली भूल अब धर्मयुग दुहराना नहीं चाहता।

    सूर्यभानु गुप्त की गज़ल ‘खामोशी’

    इश्क़ की इब्तिदा है ख़ामोशी
    आहटों का पता है ख़ामोशी

    चाँदनी है, घटा है ख़ामोशी
    भीगने का मज़ा है ख़ामोशी

    काम आती नहीं कोई छतरी
    बारिशों की हवा है ख़ामोशी

    इस के क़ाइल हैं आज भी पत्थर
    सौ नशे का नशा है ख़ामोशी

    कंघियाँ टूटती हैं लफ़्ज़ों की
    जोगियों की जटा है ख़ामोशी

    इश्क़ की कुण्डली में छुरियाँ हैं
    हर छुरी पर लिखा है ख़ामोशी

    एक आवाज़ बन गयी चेहरा
    कान का आईना है ख़ामोशी

    नैन भूले पलक झपकना भी
    सोच का केमेरा है ख़ामोशी

    भीगती रात की हथेली पर
    जैसे रंगे-हिना है ख़ामोशी

    पेड़ जिस दिन से बे-लिबास हुये
    बर्फ़ का क़हक़हा है ख़ामोशी

    घर की एक-एक ईंट रोती है
    बेटियों की विदा है ख़ामोशी

    रूह तो दी बदन नहीं बख़्शा
    किस ख़ता की सज़ा है ख़ामोशी

    घर में दुख झेलती हर इक माँ की
    आतमा की दुआ है ख़ामोशी

    गुफ़्तेगु के सिरे हैं हम दौनों
    बीच का फ़ासला है ख़ामोशी

    दे गई हर ज़ुबान इस्तीफ़ा
    इस क़दर लब-कुशा है ख़ामोशी

    बस्तियों की हरिक अदालत में
    इक रुका फ़ैसला है ख़ामोशी

    रात-दिन भीड़-भाड़, हंगामे
    इस सदी की दवा है ख़ामोशी

    लफ़्ज़ मत फेंक ग़म के दरिया में
    सब से ऊँची दुआ है ख़ामोशी

    देवता सब नशे के आदी हैं
    और उन का नशा है ख़ामोशी

    ख़ुद से लड़ने का हौसला हो अगर
    जंग का तज़्रिबा है ख़ामोशी

    दोसतो! ख़ुद तलक पहुँचने का
    मुख़्तसर रासता है ख़ामोशी

    हम तो क़ातिल हैं अपने ख़ुद साहिब
    तीन सौ दो दफ़ा है ख़ामोशी

    हर मुसाफ़िर का बस ख़ुदा-हाफ़िज़
    डाकुओं का ज़िला है ख़ामोशी

    ढूँढ ली जिस ने अपनी कस्तूरी
    उस हिरण की दिशा है ख़ामोशी

    लोग तस्वीर बन गये मर कर
    ज़िन्दगी का सिला है ख़ामोशी

    कितनी ही बार हम गये-आये
    हर जनम की कथा है ख़ामोशी

    कैफ़ियत है बयान के बाहर
    क्या बताएँ कि क्या है ख़ामोशी

    थक के लौट आईं सारी भाषाएँ
    लापतों का पता है ख़ामोशी

    Keep Reading

    Is God helpless, or is it our understanding? A new theory of hurt sentiments.

    ईश्वर असहाय या हमारी समझ? आहत भावनाओं की नई थ्योरी

    दोस्त : इस ज़माने में दोस्ती ले – दे के बची है थोड़ी-बहुत

    Tribute and Discussion Session at RLD Headquarters on Munshi Premchand's Birth Anniversary

    मुंशी प्रेमचंद जयंती पर रालोद मुख्यालय में श्रद्धांजलि एवं विचार गोष्ठी

    देह से परे, आत्मा के समीप; एक निष्काम प्रेम-यात्रा

    Enough of 'Mann Ki Baat' (talk from the heart); now, O Ruler, speak of 'Jan Ki Baat' (the voice of the people)!!

    मन की बात बहुत हुई, अब जन की बात करो राजन्!!

    A silent scream! Congratulations! Congratulations! Congratulations!

    एक मौन चीख! अभिनंदन! अभिनंदन!अभिनंदन!

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    चित्रकूट की रेल कनेक्टिविटी और मजबूत, दो एक्सप्रेस ट्रेनों का विलय

    August 8, 2026
    Iron rod pierces 3-year-old Kartik’s head; private hospital demanded ₹15 lakh... KGMU doctor saved his life for just ₹25,000.

    3 साल के कार्तिक के सिर में घुसी लोहे की रॉड, निजी अस्पताल ने मांगे 15 लाख… KGMU के डॉक्टर ने सिर्फ 25 हजार में बचाई जान

    August 8, 2026
    Barabanki to host ‘Varta-laap’ media workshop tomorrow; focus on identifying fake news and fact-checking.

    बाराबंकी में कल होगी मीडिया कार्यशाला ‘वार्तालाप’, फेक न्यूज की पहचान और फैक्ट-चेकिंग पर फोकस

    August 8, 2026
    Foundation stone laid for a 5 MW solar park named after Kalpnath Rai in Mau; Minister says he will work as a party cadre for his son's election campaign.

    मऊ में कल्पनाथ राय के नाम पर 5 मेगावाट सोलर पार्क का शिलान्यास, मंत्री बोले- उनके बेटे के चुनाव में कार्यकर्ता बनकर काम करूंगा

    August 8, 2026
    Sunny Deol and Preity Zinta met CM Yogi.

    सनी देओल और प्रीति जिंटा ने सीएम योगी से की मुलाकात

    August 7, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading