वे माटी में रोपती हैं
बेटियों से पौधे
रोपती हैं आशाएँ, अकांक्षाएँ
एक दिन जड़ मजबूत
होगी इनकी
ये पौधे बड़े होंगे
उनकी हरे पत्ते
देंगे छाया, मरुथली राजस्थानी
परिवार के अशिक्षित
परिवारों को
उन पौधों में लगेंगे फूल व फल
शिक्षा,ज्ञान, व विकसित विचारों के
वे पेड़ बच्चों व बच्चियों में
आत्मनिर्भरता देंगे
उनकी मजबूत जड़ों सी
एक दिन,
ऐसा सोचती हैं,
ये मरुथली संस्कृति में पली औरतें,
और रोपती हैं
पेड़ बेटियों से,
किसी घर मे बेटियों के
जन्मदिन पर.
कोहरे में काँपता सूरज
पत्तों से झांकता सूरज
दिन को है आंकता सूरज
शीतल दिनों को भाँपता
कोहरे में काँपता सूरज
ठिठुरते दिन छुपता
चमकीले दिन घूमता
ठंडा सा है इन दिनों
छुपता,शर्माता सूरज
पीला,सिंदूरी,लाल
रंग बदलता कमाल
नभ का है ये भाल
ब्रज,बदलता चाल सूरज – डॉ ब्रजभूषण मिश्र







