Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 530 लुकते छिपते मत फिरो, मानसून श्रीमान। मत बनिए मुँहचोर अब, बरसो सीना तान।। बरसो सीना तान, जरा सी राहत आए, प्यासा है पूरा यूपी, तुम्ही से आस लगाए, हम तुम ‘छत्तीस’ रहे, निभें फिर कैसे रिश्ते। बिन पानी सब सून, फिरो मत लुकते छिपते।। -सीएम त्रिपाठी
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन