कान्हा तुम तो भूल गए
देते नहीं हो ध्यान
सूना वृंदावन हुआ
नहि मुरली की तान ।
गौएँ सब उदास है
ग्वाल बाल बेहाल
आने का वादा किया
पल पल देखी राह।
दर्शन को व्याकुल हुए
ध्यान धरा दिन रात
पीर पर्वत सी हुई
कर जाओ उद्धार
. डॉ दिलीप अग्निहोत्री







