बाबू जी सब्जी ले लीजिये आज किसी ने मेरी सब्जी नही खरीदी?

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भगवान् से मुलाकात!

दोस्तों! संकट की बड़ी घड़ी चल रही है ऐसे में देश में कोरोना वायरस संक्रमण के चलते लॉकडाउन लगा हुआ है बेचारे गरीब क्या सभी लोग बहुत परेशान है। ऐसे में मैं आपको एक छोटी सी लघु कथा सुनाता हूं। एक बार की बात है। भगवान बजरंगबली जी पृथ्वी पर एक मनुष्य का रूप धारण कर रास्ते में जा रहे थे। वह भगवान श्री राम का नाम जप रहे थे।

रास्ते में एक सब्जी वाला जा रहा था। उसने भगवान् रूपी साधारण से दिख रहे व्यक्ति से कहा- बाबू जी नमस्कार!

भगवान जी ने उसकी बात का जवाब देते हुए कहा-नमस्कार!
बाबू जी सब्जी ले लीजिये आज किसी ने मेरी सब्जी नही खरीदी? सब्जी वाले ने कहा।

इस पर उन्होंने कहा कि ‘अरे मैं तो ब्रह्मचारी हूं मेरी तो शादी भी नहीं हुई है और मैं सब्जी लेकर क्या करूंगा मैं तो फल -फूल खाकर और भगवान् का भजन कर दिन बिताता हूं। भगवान की पूजा करना ही हमारा परम धर्म है।

बाबू जी ऐसा ना कहिए! हर व्यक्ति आप जैसा मिलेगा तो मेरी सब्जी फिर कौन खरीदेगा। सब्जी वाले ने कहा।

इस पर भगवान् जी ने कहा ‘अरे तुम उदास क्यों होते हो! तुम मेहनती और ईमानदार हो और मेहनत और ईमानदारी से जो बेचोगे तो तुम्हारी सारी सब्जी बिक जाएंगी।

उन्होंने उसे समझाते हुए कहा कि देखो अभी आधा दिन ही बीता है और इलाके का अभी तो तुमने आधा ही रास्ता पार किया है अभी तो दिन का दूसरा पहर यानि शाम का पहर बाकी है। हिम्मत मत हारों! तुम जैसे ही धीरे-धीरे आगे जाओगे, तुम्हारी सारी सब्जियां बिक जायेंगी, और ऐसा भी हो सकता है कि आगे तुम्हारी साड़ी सब्जियां भी कम पड़ जाएँ!

ऐसा कैसे हो सकता है बाबूजी! आप मेरा दिल रखने के लिए ऐसा बोल रहे हैं।

जय सिया राम! जय सिया राम!! कुछ ऐसा ही समझ लो मान्यवर!

तुम जाओ और भगवान का नाम लो और आगे बढ़ो, देखो तो क्या होता है हिम्मत मत हारों!

सब्जीवाला उनको प्रणाम कर आगे बढ़ गया और सब्जी ले लो, सब्जी ले लो कहकर बोलने लगा। वह चलता जा रहा था लेकिन उसकी कोई सब्जी खरीद नहीं रहा था। वह बड़ा निराश हो गया था कि अचानक एक मोड़ पर एक कॉलोनी दिखाई दी तो उसने सोचा कि यहां भी कोशिश करके देख लेता हूं!

तभी उसको किसी महिला ने आवाज दी कहाँ जा रहे हो, सब्जी तो देते जाओ!
सब्जी वाले ने कहा- हाँ हां बहन जी बिलकुल! सब्जी बिकते देख वह मन ही मन खुश हो गया।
इसके बाद वहां कई महिलाएं और आ गयीं और उसकी सब्जी खरीदी।

एक महिला ने कहा -अरे वाह! तुम्हारे पास तो बहुत ताज़ी अच्छी सब्जी है सबसे अच्छी बात यह है कि ऐसी विषम परिस्थिति में भी तुम ईमानदारी से सब्जी बेच रहे हो और एक भी ज्यादा पैसा वसूल नहीं रहे हो! पर ये क्या तुम्हारी सब्जी तो कम पड गयी?

तुम और सब्जी लाओ अभी हमें और हमारे पड़ोसियों को और भी सब्जी की जरुरत है!

सब्जी वाले ने कहा कि बहन जी मैं अभी घर से और सब्जी लेकर लाता हूं और आप सभी के घर में पहुंचा जाता हूं।

इस दौरान उसे रास्ते में मिले उस व्यक्ति की सारी बाते याद आ गयीं जिन्होंने कहा था की सब काम ईमानदारी से करना कोई पैसा फिजूल न लेना, सकारात्मक परिणाम मिलेंगे! चलते चलते उसने उन्हें मन ही मन में उन्हें धन्यवाद दिया और फिर वह रास्ते भर भगवान् का नाम लेता चला गया।

!!जय श्रीराम जय श्रीराम!!

  • सुशील कुमार 

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