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    Shagun News India
    Home»धर्म»Spirituality

    सिया राममय सब जग जानी, करउ प्रणाम जोर जुग पानी

    ShagunBy ShagunAugust 29, 2021 Spirituality No Comments6 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    अयोध्या यात्रा के समय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आध्यात्मिक रूप में भाव विभोर दिखाई दिए। रामकथा पार्क में उन्होंने रामायण कान्क्लेव का शुभारंभ किया। उन्होंने श्री

    राम चरित मानस की चौपाई का उल्लेख किया-
    रामकथा सुन्दर कर तारी, संशय बिहग उड़व निहारी।

    अर्थात राम की कथा हाथ की वह मधुर ताली है, जो संदेहरूपी पक्षियों को उड़ा देती है।
    प्रभु श्री राम ने मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में अवतार लिया था। श्री रामकथा आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने वाली है। श्रीराम कथा के प्रत्येक प्रसंग आध्यात्मिक ऊर्जा है। भक्ति के धरातल पर पहुंच कर ही इसका अनुभव किया जा सकता है। महर्षि बाल्मीकि और तुलसी दास सामान्य कवि मात्र नहीं थे। ईश्वरीय प्रेरणा से ही इन्होंने रामकथा का गायन किया था। इसलिए इनका काव्य विलक्षण हो गया। साहित्यिक चेतना या ज्ञान से कोई यहां तक पहुंच भी नहीं सकता। रामायण व रामचरित मानस की यह दुर्लभ विशेषता है। प्रभु बालक रूप में है,

    वह वनवासी रूप में है,वह राक्षसों को भी तारने वाले है। प्रभु ने शिशु रूप में पृथ्वी पर जन्म लिया था। इसलिए यह स्वयं में अलौकिक बेला थी। गोस्वामी जी लिखते है- जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल। चर अरु अचर हर्षजुत राम जनम सुखमूल॥ अर्थात चर अचर सहित समस्त लोकों में सुख का संचार हुआ था।

    रामनाथ कोविंद ने कहा कि रामायण में मानवता के जीवन के उन मूल्यों को समाहित किया गया है। रामायण दर्शन के अलावा एक ऐसा ग्रंथ है जो कि हमारे जीवन के हर हिस्से हिस्से के लिए संदेश देती है। उन्होंने रामायण की एक अन्य चौपाई का उल्लेख भी किया-

    सिया राममय सब जग जानी, करउ प्रणाम जोर जुग पानी।

    अर्थात संपूर्ण जगत के कण-कण में श्रीराम विद्यमान हैं। हमको हर किसी में सियाराम की प्रतिमूर्ति देखनी चाहिए। भगवान श्रीराम हर किसी में हैं। सभी के हैं। भारतीय जीवन मूल्यों के आर्दश और उपदेश रामायण में समाहित है।

    राष्ट्रपति ने कहा कि अयोध्या का शाब्दिक अर्थ है -जिसके साथ युद्ध करना असंभव हो। रघु,दिलीप,अज,दशरथ और राम जैसे रघुवंशी राजाओं के पराक्रम एवं शक्ति के कारण उनकी राजधानी को अपराजेय माना जाता था। इसलिए इस नगरी का अयोध्या नाम सर्वदा सार्थक रहेगा। रामायण में दर्शन के साथ-साथ आदर्श आचार संहिता भी उपलब्ध है,जो जीवन के प्रत्येक पक्ष में हमारा मार्गदर्शन करती है।

    संतान का माता पिता के साथ,भाई का भाई के साथ,पति का पत्नी के साथ,गुरु का शिष्य के साथ,मित्र का मित्र के साथ,शासक का जनता के साथ और मानव का प्रकृति एवं पशु पक्षियों के साथ कैसा आचरण होना चाहिए। इन सभी आयामों पर रामायण में उपलब्ध आचार संहिता, हमें सही मार्ग पर ले जाती है। इसमें आदर्श व्यक्ति और आदर्श समाज दोनों का वर्णन मिलता है। रामराज्य में आर्थिक समृद्धि के साथ साथ आचरण की श्रेष्ठता का बहुत ही सहज और हृदयग्राही विवरण मिलता है

    – नहिं दरिद्र कोउ,दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध, न लच्छन हीना। किसी भी प्रकार का भेद भाव नहीं था। राष्ट्रपति ने रामचरित मानस की चौपाई का उल्लेख किया-

    दंड जतिन्ह कर भेद जहँ, नर्तक नृत्य समाज। जीतहु मनहि सुनिअ अस, रामचन्द्र के राज॥ रामचरित मानस की पंक्तियां लोगों में आशा जगाती हैं। प्रेरणा का संचार करती हैं। ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं। आलस्य एवं भाग्यवाद का त्याग करके कर्मठ होने की प्रेरणा अनेक चौपाइयों से मिलती है-
    कादर मन कहुं एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा।
    महर्षि वाल्मीकि ने कहा है
    -यावत् स्था-स्यन्ति गिरय: सरित-श्च महीतले तावद् रामायण-कथा लोकेषु प्र-चरिष्यति। अर्थात जब तक पृथ्वी पर पर्वत और नदियां विद्यमान रहेंगे,तब तक रामकथा लोकप्रिय बनी रहेगी। रामकथा की लोकप्रियता भारत में ही नहीं बल्कि विश्वव्यापी है। उत्तर भारत में गोस्वामी तुलसीदास की रामचरित-मानस,भारत के पूर्वी हिस्से में कृत्तिवास रामायण, दक्षिण में कंबन रामायण जैसे रामकथा के अनेक पठनीय रूप प्रचलित हैं। इन्डोनेशिया के बाली द्वीप की रामलीला विशेष रूप से प्रसिद्ध है। मालदीव,मारिशस, त्रिनिदाद व टोबेगो, नेपाल, कंबोडिया और सूरीनाम सहित अनेक देशों में प्रवासी भारतीयों ने रामकथा एवं रामलीला को जीवंत बनाए रखा है। रामकथा का साहित्यिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव मानवता के बहुत बड़े भाग में देखा जाता है। भारत ही नहीं विश्व की अनेक लोक-भाषाओं और लोक-संस्कृतियों में रामायण और राम के प्रति सम्मान और प्रेम झलकता है। उन्होंने कहा कि जब मेरे माता-पिता और बुजुर्गों ने मेरा नामकरण किया होगा,तब उन सब में भी संभवतः रामकथा और प्रभु राम के प्रति वही श्रद्धा और अनुराग का भाव रहा होगा जो सामान्य लोकमानस में देखा जाता है. राम भक्त शबरी का प्रसंग सामाजिक समरसता का अनुपम संदेश देता है। महान तपस्वी मतंग मुनि की शिष्या शबरी और प्रभु राम का मिलन,एक भेद-भाव-मुक्त समाज एवं प्रेम की दिव्यता का अद्भुत उदाहरण है। अपने वनवास के दौरान प्रभु राम ने युद्ध करने के लिए अयोध्या और मिथिला से सेना नहीं मंगवाई।

    उन्होंने कोल भील वानर आदि को एकत्रित कर अपनी सेना का निर्माण किया। अपने अभियान में जटायु से लेकर गिलहरी तक को शामिल किया। वनवासियों के साथ प्रेम और मैत्री को प्रगाढ़ बनाया। उत्तर प्रदेश सरकार ने रामायण कॉन्क्लेव का आयोजन कर कला एवं संस्कृति के माध्यम से रामायण को जन जन तक पहुंचाने का अभियान आज शुरू किया है। इसके लिए राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम की सरहाना की। योगी आदित्यनाथ ने कहा राष्ट्रपति जी के नाम में भी राम शब्द है। भारत में सर्वाधिक नामों में श्री राम है। अभिवादन से लेकर संस्कारों तक श्री राम शब्द का उच्चारण होता है। पांच शताब्दी के एक लंबे इंतजार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुकंपा श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है।

    प्रभु श्री राम जन जन के हैं। वह व्यापक आस्था के प्रतीक हैं। करोड़ों लोगों की सांस व रोम रोम में राम बसे हैं। राम के प्रति सनातन आस्था संतों व संघ परिवार के मार्गदर्शन के फलस्वरूप राममंदिर निर्माण का शुभारंभ हुआ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि अयोध्या प्राचीन काल से ही संपूर्ण विश्व में विख्यात रही है। राम की जन्मस्थली होने का सौभाग्य भी इस नगर को प्राप्त है। गौरव की बात है कि अवधी साहित्य का लोकप्रिय ग्रंथ रामचरित मानस के लेखन की शुरूआत अयोध्या से ही हुई थी। सांस्कृतिक मानचित्र पर अयोध्या पहला शहर है जहां विभिन्न पंथ के महापुरूष मौजूद रहे हैं। जैन धर्म के आदिदेव ऋषभदेव की भी जन्मस्थली अयोध्या है।

    उन्होंने कहा कि रामनगरी की लोकप्रियता को पुनःस्थापित करने के लिए प्रदेश एवं केंद्र सरकार प्रयासरत है। दीपोत्सव अंतरराष्ट्रीय आयोजन बन चुका है। मैं भी इसकी साक्षी रही हूं। राममंदिर के शिलान्यास का साक्षी होना गौरव की बात है। राममंदिर वास्तव में राष्ट्र का मंदिर है जो युगों तक प्रेरणा देता रहेगा।

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