पेट्रोपावलोव्स्क-कमचात्स्की में बर्फ की सुनामी, इमारतें और गाड़ियां गायब, लोग खिड़कियों से कूद रहे
नई दिल्ली। रूस के सुदूर पूर्वी इलाके कमचटका प्रायद्वीप : (Kamchatka Peninsula) में जनवरी 2026 की शुरुआत से एक अभूतपूर्व बर्फबारी ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। स्थानीय लोग इसे “स्नो अपोकैलिप्स” या “सफेद मौत की सुनामी” कह रहे हैं। मौसम विभाग और रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पिछले 60 सालों में सबसे भारी बर्फबारी है (कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में 130-146 साल का दावा किया गया है, लेकिन विश्वसनीय स्रोतों में 60 वर्षों का रिकॉर्ड सबसे ज्यादा प्रमाणित है)।
बर्फ की परत 2 मीटर से ज्यादा, ड्रिफ्ट्स 3-5 मीटर तक पहुंचे
- पेट्रोपावलोव्स्क-कमचात्स्की शहर (क्षेत्रीय राजधानी) में जनवरी के पहले 15-20 दिनों में ही 2 मीटर (लगभग 6.5 फीट) से ज्यादा बर्फ गिरी, जबकि दिसंबर में पहले से ही 3.7 मीटर थी।
- हवा के कारण बर्फ के ढेर (ड्रिफ्ट्स) कुछ जगहों पर 3-5 मीटर या उससे ज्यादा ऊंचे हो गए, जिससे कई इमारतों के निचले मंजिलें, दरवाजे, खिड़कियां और कारें पूरी तरह दफन हो गईं।
- लोग घरों से निकलने के लिए खिड़कियों से कूद रहे हैं, बर्फ में सुरंग खोद रहे हैं या स्कीइंग कर रहे हैं—लेकिन अधिकारी “स्नो जंपिंग” को खतरनाक बताकर मना कर रहे हैं।
आपातकाल घोषित, 2 मौतें, जीवन ठप
- क्षेत्र में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। स्कूल, दफ्तर बंद; सार्वजनिक परिवहन ठप; बसों की जगह ऑल-टेरेन वाहन इस्तेमाल हो रहे हैं।
- छत से गिरती बर्फ या स्लैब से कम से कम 2 लोगों की मौत हो चुकी है।
- आपूर्ति बाधित, एवलांच का खतरा बढ़ा हुआ है। लोग मजबूरी में घरों में फंसे हैं, और सफाई कार्य जारी है।
जलवायु परिवर्तन का संकेत?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पैसिफिक से आने वाले साइक्लोन और आर्कटिक कोल्ड एयर के संयोजन से हुआ है। ऐसे एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रहे हैं, जो इंसान की बेबसी को फिर साबित कर रहे हैं। कुछ वायरल वीडियो और इमेजेस में बर्फ की ऊंचाई को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है (जैसे पूरी इमारतें गायब या 300 फीट), लेकिन वास्तविकता में भी यह मंजर रूह कंपा देने वाला है।प्रकृति का ये रूप सच में याद दिलाता है इंसान कितना छोटा है, और कुदरत से बड़ा कोई नहीं!







