अगर आप अशांत और परेशान है तो एक बार मंदिर जाएं। आपको अगरबत्ती-धूप की सुगंध, घंटियों की आवाज और मंत्रोच्चार का स्वर आपके शरीर को शांति प्रदान करता है। साथ ही जब हम हाथ जोडक़र भगवान को अपनी सभी डर और चिन्ताएं उनके हवाले कर देते हैं तो हम को एक अलग ही खुशी और शांति मिलती हैं।
आज की पीढ़ी जिन परम्पराओं और अनुष्ठानों को ढ़ोग या समय खराब होने का तर्क देती हैं। दरअसल इसके पीछे बहुत बड़ा तर्क हैं। मंदिर एक ऐसी जगह है जहां पर सीाी को समान समझा जाता हैं।
मंदिर में प्रवेश करने वाला प्रत्येक व्यक्ति एक सकारात्मक सोच के साथ मंदिर में आता हैं। जिसकी वजह से मंदिर का माहौल सकारात्मक होता हैं।
- जब हम मंदिर में नंगे पैर चलते हैं तो मंदिर के फर्श में उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा हमारे शरीर में प्रवेश करती हैं।
- मंदिर की घंटी बजाने से एक सुखद स्वर उत्पन्न होता है। जिससे आपका मन शांत होता हैं। साथ ही सुनने की शक्ति सक्रिय रहती हैं।
- मंदिर में आरती के समय कपूर इसलिए जलाया जाता है कि जब आप आरती लेते है तो उष्मा आपकी हथेलियों से होती हुई आपके आंख और सिर के माध्यम से आपके शरीर में प्रवेश करती हैं।
- मंदिर में फूल इसलिए चढ़ाए जाते हैं अगर आपका मूड सही नहीं हो तो फूलों के रंगों और मीठी-सी खूशबू से आपके खराब मूड को ठीक किया जा सकें।
- मंदिर में ताम्बे के लौटे से चरणामृत इसलिए दिया जाता है क्योंकि यह इस पानी में जड़ी-बूटियों, फूलों और शुद्ध पानी का मिश्रण होता हैं। जो आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होता हैं।
- मंदिर में परिक्रमा इसलिए की जाती है क्योंकि मूर्ति और मंदिर परिसर के कंपन को अपने शरीर में ग्रहण कर सकें। इससे मन को शांति मिलती हैं।







