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    Home»ब्लॉग

    नेपाल की राजनीति में ज्वालामुखी का फटना

    ShagunBy ShagunSeptember 11, 2025 ब्लॉग No Comments5 Mins Read
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    ओली सरकार का पतन और Gen Z का विद्रोह

    नेपाल की राजनीति लंबे समय से भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और आर्थिक असमानता की आग में सुलग रही थी। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ने विपक्ष को कुचलने, मीडिया को नियंत्रित करने और न्यायपालिका को प्रभावित करने का प्रयास किया, लेकिन जनता का धैर्य अब टूट चुका है। 9 सितंबर 2025 को ओली ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन इससे पहले सड़कों पर हिंसा भड़क चुकी थी। संसद भवन जलाया गया, मंत्रियों के घरों पर हमले हुए, और कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई। यह संकट केवल सोशल मीडिया बैन से नहीं, बल्कि गहरी सामाजिक-आर्थिक नाराजगी से उपजा है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को एक नजरिए से समझें।

    उबलते असंतोष की जड़ें

    ओली की चौथी बार सरकार (जुलाई 2024 से) ने वादा किया था स्थिरता और रोजगार का, लेकिन वास्तविकता इसके उलट थी। युवा बेरोजगारी 20% से ऊपर पहुंच चुकी थी, जिसके कारण रोज 2,000 से अधिक युवा विदेश पलायन कर रहे थे। भ्रष्टाचार के आरोपों की भरमार थी। ओली सरकार पर अरबों का विज्ञापन खर्च अपनी छवि चमकाने के लिए, विपक्षी नेताओं को जेल में डालना और मीडिया को ‘गोदी’ बनाना। अदालतें सरकार के इशारे पर फैसले देती दिखीं, और विपक्ष को इलाज तक के लिए विदेश जाने की इजाजत नहीं। जनता में यह धारणा बन गई कि ओली का ‘मन की बात’ ही नेपाल का मन है, लेकिन युवा पीढ़ी (Gen Z, 15-40 वर्ष के 43% आबादी) ने इसे चुनौती दी।

    नेपाल में युवाओं की आवाज़ और आक्रोश साफ तौर पर दिखाई दे रहा है

    सोशल मीडिया बैन ने आग में घी डाला

    4 सितंबर 2025 को सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, यूट्यूब समेत 26 प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया, दावा किया कि ये रजिस्ट्रेशन नियमों का पालन नहीं कर रहे। युवाओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना, क्योंकि नेपाल में सोशल मीडिया मनोरंजन, खबरें और व्यापार का प्रमुख साधन है।

    ट्रिगर पॉइंट: मंत्री की ‘कार’ ने उखाड़ दी सरकार?

    इस मामले में ‘कार’ वाली घटना वास्तव में एक प्रतीकात्मक चिंगारी साबित हुई। 6 सितंबर 2025 को ललितपुर के हरिसिद्धि में कोशी प्रांत के आर्थिक मंत्री राम बहादुर मगर की सरकारी जीप ने 11 वर्षीय उषा मगर सुनुवार नामक लड़की को टक्कर मार दी। सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि जीप ने बच्ची को सड़क पर फेंक दिया और बिना रुके भाग गई। स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर विरोध किया, जिसके दबाव में ड्राइवर को 24 घंटे बाद गिरफ्तार किया गया, लेकिन जल्द ही रिहा कर दिया। ओली ने इसे ‘मामूली दुर्घटना’ बताया, जो जनता के गुस्से को भड़काने वाला साबित हुआ।

    आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना सोशल मीडिया बैन के ठीक बाद हुई, जब UML का बड़ा अधिवेशन चल रहा था। बच्ची की चोटों की तस्वीरें वायरल हो गईं (#JusticeForTheGirl), जो भ्रष्टाचार, नेपोटिज्म और सरकार की उदासीनता का प्रतीक बनी। यह हिट-एंड-रन केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सत्ता के विशेषाधिकारों का उदाहरण था। मंत्री की कार भाग जाती है, लेकिन आम आदमी को न्याय नहीं मिलता। इससे Gen Z का गुस्सा फूट पड़ा, जो पहले से ही नेताओं के बच्चों की लग्जरी लाइफस्टाइल (लैंड रोवर, आयातित पानी) से नाराज था।

    घटनाक्रम: विद्रोह से इस्तीफे तक 8 सितंबर (पहला दिन): काठमांडू में हजारों युवा (स्कूल-कॉलेज यूनिफॉर्म में) सड़कों पर उतरे। नारे लगे- ‘कोरप्शन बंद करो, सोशल मीडिया मत’, ‘ओली चोर, देश छोड़’। पुलिस ने पानी की बौछारें, रबर बुलेट्स और लाठीचार्ज किया, जिसमें 19 मौतें हुईं। होम मिनिस्टर रमेश लेखक ने नैतिक जिम्मेदारी से इस्तीफा दिया।

    9 सितंबर (दूसरा दिन): कर्फ्यू के बावजूद प्रदर्शनकारी संसद भवन में घुस आए, आग लगा दी। सिंह दरबार (सरकारी मुख्यालय), सुप्रीम कोर्ट, ओली का बालकोट स्थित घर, नेपाली कांग्रेस मुख्यालय और पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा का घर जलाए गए। मौतों का आंकड़ा 22 पहुंचा। ओली ने राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को इस्तीफा सौंपा, कहा- ‘राष्ट्रीय हित में राजनीतिक समाधान के लिए’। लेकिन अफवाहें रहीं कि सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल ने उन्हें इस्तीफा देने की सलाह दी, और ओली दुबई भागने की तैयारी में थे (सेना हेलीकॉप्टर से सुरक्षित निकासी)। चार मंत्री और इस्तीफा दे चुके थे।

    10 सितंबर को सेना ने काठमांडू, ललितपुर और भक्तपुर में कर्फ्यू बढ़ाया, ट्रिभुवन एयरपोर्ट बंद। धाडिंग जेल से कैदी भागे, गोलीबारी में दो की मौत। पूर्व पीएम झलनाथ खनाल की पत्नी राज्यलक्ष्मी चित्रकार की घर में आग लगने से जलकर मौत हो गई। विदेशी पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी। भारत ने शांति की अपील की, पीएम मोदी ने मौतों को ‘दिल दहला देने वाला’ बताया। एयर इंडिया ने विशेष उड़ानें चलाईं।

    अराजकता में डूबा नेपाल

    ओली के इस्तीफे के बाद नेपाल अराजकता में डूबा है। सेना सड़कों पर तैनात, लेकिन कोई स्पष्ट नेतृत्व नहीं। Gen Z ने मांगें रखीं: संसद भंग, सभी सांसदों का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने वालों की सजा, नए चुनाव। राष्ट्रपति पौडेल ने युवा नेताओं से बातचीत की पेशकश की। संभावित अंतरिम पीएम के नाम: काठमांडू मेयर बालेंद्र शाह (रैपर-एक्टिविस्ट, भारत-शिक्षित) या पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की (नेपाल की पहली महिला CJI, BHU पासआउट)। नेपाली मीडिया में कार्की का नाम मजबूत, युवाओं की वर्चुअल मीटिंग में 5,000+ ने समर्थन दिया।

    भारत-नेपाल सीमा पर असर: भैरहवा कस्टम में आगजनी से सैकड़ों भारतीय ट्रक फंसे, ड्राइवर भूखे-प्यासे। यूपी पुलिस हाई अलर्ट पर।यह विद्रोह नेपाल की नाजुक लोकतंत्र के लिए टर्निंग पॉइंट है। Gen Z ने दिखा दिया कि वे पुरानी राजनीति से तंग आ चुके हैं। लेकिन हिंसा से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता -संवाद ही रास्ता है। ओली का पतन एक सबक है: सत्ता का भ्रम टूटेगा, तो जनता की आवाज अनसुनी नहीं रह सकती। नेपाल को अब स्थिरता और न्याय की जरूरत है, वरना हिमालयी राष्ट्र और गहरा संकट झेलेगा।

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