आज के दौर में जब सोशल मीडिया पर नफरत की आंधी चल रही हो, जब हर खबर को धर्म के चश्मे से देखा जा रहा हो, तब भी हिन्दुस्तान की मिट्टी में कुछ ऐसी खुशबू बाकी है जो सदियों से चली आ रही है वो है इंसानियत और भाईचारा। दो ताज़ा घटनाएँ इस सच को फिर से सामने लाती हैं कि भारत वो देश नहीं जो कुछ लोग बताते हैं, बल्कि वो देश है जो कुछ लोग जीते हैं।
कानपुर के पास एक साधारण रात। स्लीपर बस में अचानक आग लगी। 43 जिंदगियाँ लपटों के बीच फँस गईं। चीखें, धुआँ, मौत करीब आती जा रही थी। बस का गेट आग की चपेट में था, कोई बाहर नहीं निकल पा रहा था। तभी दो नौजवान साहिल खान और पुष्पेंद्र ड्यूटी पर थे, दौड़े। बिना एक पल सोचे बस के अंदर घुस गए। धुएँ में साँस रुक रही थी, आँखें जल रही थीं, लेकिन उन्होंने एक-एक करके सभी को निकाला। दो-दो, तीन-तीन बच्चों को गोद में उठाया। एक गर्भवती महिला को कंधे पर लिया। सिर्फ़ दो मिनट की देर होती तो शायद कोई बचता नहीं। साहिल और पुष्पेंद्र ने साबित कर दिया कि जब बात इंसान बचाने की हो तो न धर्म देखा जाता है, न नाम। सिर्फ़ दिल देखा जाता है।

दूसरी कहानी कश्मीर की वादियों से। कुलदीप शर्मा एक कश्मीरी पंडित, जिन्होंने दशकों का दर्द झेला है। उनके पास जो सबसे कीमती चीज़ थी, अपनी ज़मीन, उसे बिना हिचक उन्होंने मुस्लिम पत्रकार अरफ़ाज़ अहमद को दे दी सिर्फ़ इसलिए क्योंकि अरफ़ाज़ भी इस देश से उतना ही प्यार करता है जितना कुलदीप। उधर फ़ैज़ल नाम के एक मुस्लिम नौजवान ने बिना सोचे गहरे पानी में छलाँग लगा दी ताकि शुभम तिवारी की जान बच जाए। ये वो भारत है जो नफरत करने वालों की समझ से परे है।

ये दोनों घटनाएँ छोटी नहीं हैं। ये वो जीते-जागते सबूत हैं कि हिन्दुस्तान का असली धर्म इंसानियत है। यहाँ मस्जिद हो या मंदिर, गुरुद्वारा हो या चर्च जब कोई मुसीबत आती है तो सबसे पहले इंसान दौड़ता है, हिंदू-मुस्लिम बाद में देखा जाता है। साहिल खान हो या पुष्पेंद्र, कुलदीप शर्मा हो या फ़ैज़ल ये सब एक ही मिट्टी के लाल हैं। इनके खून में गंगा-जमुनी तहज़ीब बहती है।
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आज कुछ लोग धर्म के नाम पर दीवारें खड़ी कर रहे हैं। लेकिन ये दीवारें कागज़ की हैं। असली भारत तो इन कहानियों में बसता है जहाँ आग में भी भाईचारा नहीं जलता, जहाँ दर्द बाँटने के लिए ज़मीन तक कुर्बान कर दी जाती है।जब तक ऐसी कहानियाँ ज़िंदा हैं, तब तक भारत ज़िंदा है। जब तक साहिल और पुष्पेंद्र जैसे नौजवान साँसें थामकर दूसरों की साँसें बचाते रहेंगे, तब तक कोई ताकत इस देश को बाँट नहीं सकती।
ये है हमारा हिन्दुस्तान।
ये है हमारा भारत।
इसे नफरत की आँख से नहीं, मोहब्बत की आँख से देखिए – तब आपको खुद पता चलेगा कि हम कितने खूबसूरत हैं।
जय हिंद।






