ट्रंप के नाटो पर तीखे बयान ने मचा दिया बवाल: कई लोग लोग इसे “इतिहास का अपमान” बता रहे
वाशिंगटन/लंदन, 24 जनवरी 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया इंटरव्यू में दिए गए विवादास्पद बयान ने नाटो सहयोगी देशों में भारी गुस्सा पैदा कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि अफगानिस्तान युद्ध के दौरान नाटो के अन्य देशों के सैनिक “फ्रंट लाइन से थोड़ा पीछे” या “थोड़ा दूर” रहे, जिससे अमेरिका को पूरा बोझ उठाना पड़ा।
इस पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “ट्रंप का यह बयान अपमानजनक और frankly appalling है।” स्टार्मर ने विशेष रूप से उन 457 ब्रिटिश सैनिकों को याद किया जिन्होंने अफगानिस्तान में अपनी जान गंवाई। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन बहादुर सैनिकों के बलिदान को कम करके आंकना पूरी तरह गलत और दर्दनाक है। स्टार्मर ने यह भी संकेत दिया कि अगर वे खुद ऐसा बयान देते तो जरूर माफी मांगते, और ट्रंप को भी ऐसा करना चाहिए।

ट्रंप का यह कमेंट ऐसे समय आया जब नाटो पहले से ही रक्षा खर्च, यूक्रेन युद्ध और रूस के खतरे जैसे मुद्दों पर तनाव का सामना कर रहा है। अफगानिस्तान युद्ध (2001-2021) में नाटो ने अमेरिका के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी – ब्रिटेन के अलावा कनाडा, जर्मनी, फ्रांस और अन्य देशों के सैनिक भी फ्रंटलाइन पर थे और भारी नुकसान उठाया। ब्रिटेन अकेले 457 सैनिक खो चुका है, जबकि कुल मिलाकर हजारों नाटो सैनिक शहीद हुए।
ब्रिटेन में वेटरन्स और आम लोगों में भी यह बयान बुरी तरह से नजर आया है। कई लोग इसे उन सैनिकों और उनके परिवारों का अपमान मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी #TrumpNATO और #Afghanistan जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां एक तरफ कुछ लोग ट्रंप का समर्थन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ लोग इसे “इतिहास का अपमान” बता रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच नई दरार पैदा कर सकता है, खासकर जब वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं। अब सवाल यह है कि क्या ट्रंप इस पर सफाई देंगे या माफी मांगेंगे? या फिर यह बहस और तेज होगी? यह तो समय ही बताएगा।






