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    Home»ब्लॉग»Hot issue

    रूहानी की यात्रा से रिश्तों में सुधार

    By February 28, 2018Updated:March 3, 2018 Hot issue No Comments3 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    अंतरराष्ट्रीय संबंधो का मसला बहुत पेचीदा होता है। कई बार परस्पर शत्रु देशों के साथ भी रिश्ते सुधारने की चुनौती रहती है। राष्ट्रीय हितों के लिए यह चुनौती भी स्वीकार करनी होती है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिशा में मिसाल कायम की है। कुछ दिन पहले वह मध्यपूर्व के तीन देशों की यात्रा पर गए थे।
    इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति भारत की यात्रा पर आए। कुछ और पीछे लौटें तो नरेंद्र मोदी इस्राइल गए थे। उसके बाद इस्राइली प्रधानमंत्री भारत आये थे। दोनों देश एक दूसरे के साथ सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए थे। इतना ही नहीं इस्राइल ने चीन और पाकिस्तान के विरुद्ध भारत का साथ देने का वादा किया था।
    फोटो: साभार IRNA 1934
    अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पेचीदगी इस क्षेत्र में देखी जा सकती है। ईरान और इस्राइल एक दूसरे को फूटी आंख देखना नहीं चाहते। फिर भी नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक कुशलता के चलते इस्राइल, फलस्तीन, ईरान और अन्य अरब देश भारत से बेहतर रिश्ते के हिमायती हुए है। नरेंद्र मोदी को फलस्तीन ने अपना सर्वोच्च सम्मान दिया। गाजापट्टी की यात्रा के दौरान इस्राइल ने उनकी सुरक्षा में सहयोग दिया। जिस समय ईरानी राष्ट्रपति भारत मे थे, उस समय भी इस्राइल और ईरान के तनाव  था। इस्राइली प्रधानमंत्री वेन्जामिन नेतन्याहू ने एक ड्रोन का टुकड़ा दिखाते हुए ईरान को धमकी दी।  उनका आरोप था कि यह हमला ईरान ने किया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान  ने इस्राइल के खिलाफ सीरिया में अघोषित युद्ध छेड़ा है। कई सुन्नी मुल्क ईरान से नाराज रहते है लेकिन भारत के इन सबसे संबन्ध सुधर रहे है।

    ईरान  और भारत के बीच पाकिस्तान का भी समीकरण भी है।  भौगोलिक रूप से ईरान और पाकिस्तान की जमीन मिली हुई है।  लेकिन चाबहार परियोजना में पाकिस्तान को शामिल नहीं किया गया था।  क्योंकि पाकिस्तान के जुड़ने का  से आतंकवादियों की आमद भी हो जाती। इससे  इस परियोजना को बहुत नुकसान होता। तब इस पर कार्य पूरा करना भी मुश्किल हो जाता।

    आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति:

    ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी की भारत यात्रा चाबहार के हिसाब से भी उपयोगी रही। भारत ने  चाबहार पोर्ट के पहले हिस्से का परिचालन नियंत्रण अठारह महीने के लिए अपने नियंत्रण में लिया। दोनों देशों के बीच नौ समझौते हुए। इसमें तेल, गैस, बैंकिंग क्षेत्र के समझौते भी शामिल है। आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति बनाने और युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में सामरिक हितों के अनुरूप कार्य करने पर भी सहमति बनी।  जिससे अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता कायम हो सके। इसके अलावा दोहरे कराधान से बचाव, राजकोषीय चोरी पर रोकथाम, एक दशक पुरानी प्रत्यर्पण सन्धि की पुष्टि , राजनयिक पास्पोर्टधारकों को वीजा छूट, आदि पर समझौते हुए। हसन रूहानी ने पहले ही कहा था कि वह भारत के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को उत्सुक है। ईरान अपने विशाल तेल  और गैस संसाधनों को भारत के साथ साझा भी करना चाहता है। रूहानी की यात्रा से इस योजना पर अमल की संभावना बढ़ी है।   चाबहार बन्दरगाह ईरान, अफगानिस्तान ही नहीं मध्य एशिया और योरोप तक भारत के साथ व्यापार के रास्ते खोलेगा। जाहिर है कि हसन रूहानी की भारत यात्रा बहुत उपयोगी साबित हुई है। इससे दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हुए है।  बड़ी उपलब्धि यह भी है कि इस द्विपक्षीय रिश्तों पर मध्यपूर्व के तनाव का कोई असर नहीं पड़ेगा।

    .लेखक वरिष्ठ पत्रकार है

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