कई कृषक बंधु खेत खाली होने से पहले ही बेल वर्गीय फसल तैयार करते हैं, और इसके लिए उन्हें कोकोपिट एवं ट्रे जरूरत पड़ती है. अगर आप इस खर्च से बचना चाहते हैं तो स्वयं गोबर और पुवाल से जैविक बुलेट्स बना सकते हैं और उसमें करेला, ककोरा, तरबूज, खरबूज, तोरयी, खीरा, ककड़ी, सेम एवं पपीता, केला आदि की नर्सरी तैयार कर सकते हैं.
सीड़ बुलेट्स प्रयोग करने के लाभ: –
- खेत की जुताई की जरूरत नहीं।
- सीड बुलेट्स के प्रयोग से फसल एक माह पहले ही तैयार हो जाती है जिससे फसल की अच्छी कीमत मिल जाती है।
- खेत में जल्द पानी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि यह सीड़ बुलेट्स अपने वजन के मुकाबले तीन गुने से भी ज्यादा पानी सोख लेते हैं।
- सीड बुलेट्स में पानी दिए जाने की स्थिति में खेत सूखा रहता है जिसके कारण खरपतवारों का जमाव 95% तक कम होता है।
- पानी में घोलकर उर्वरक देने पर उर्वरकों का पूर्ण उपयोग हो जाता है जिससे उर्वरकों की बिल्कुल भी बरबादी नहीं होती है।
- ड्रिप इरीगेशन (टपक सिंचाई विधि) इस्तेमाल न कर रहे किसानों के लिए बेहद उपयोगी है क्योंकि एक बीघा में एक बार पानी लगाने में लगभग 95 लीटर पानी खर्च होगा।
- फसल का पूर्णतः जैविक होना।
- पॉली हाउस के लिए भारी भरकम निवेश की जरूरत नहीं।
- पौधों लगभग न के बराबर मरते हैं क्योंकि अंकुरित हो चुके पौधे खेत में लगाये जाते हैं जिससे खेत खाली नहीं रहता है।
- सीड बुलेट्स की पानी सोखने की क्षमता बेहद अच्छी होने के कारण पानी की कमी बाले क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी है।







