भारत में भी आई इजराइल तकनीक
जमशेदपुर 27 दिसम्बर। आने वाले दिनों में यदि आप को बिना मिटटी के फल-सब्जी उगी दिखाई दे,तो आप चौंक सकते है।लेकिन ऐसा होने जा रहा हैं आने वाले समय में फल-सब्जी उगाने के लिए मिटटी की आवश्यकता नहीं होगी। भारत में टाटा स्टील के अमृतांश व जुस्को (जमशेदपुर यूटिलिटीज एंड सर्विसेज कंपनी) के गौरव आंनद जमशेदपुर एक्वापोनिक विधि से खेती करने की विधि पर काम कर रहे है। बात दे यह तकनीक दुनिया के कई देशा इजराइल,जापान,चीन और अमेरिका में आ चुकी है।
वहां के किसान इस तकनीक के माध्यम से खीरा,टमाटर,पालक,गोभी,शिमला मिर्च आदि सब्जी उगा रहे है। वहीं जमशेदपुर के स्थानीय मैदान गोपाल में चल रहे प्लावर शो के तकनीकी सत्र में आए इन पर्यावरणविदों ने बताया कि इस तकनीक को स्वॉयललेस कल्टीवेशन कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने इस हाइड्रोपोनिक्स यानी जलकृषि नाम दिया हैं। इसमें मिटटी का प्रयोग नहीं होता है।शौकिया तौर पर एक्वेरियम (मछली घर) में मछली रखने वाले इस विधि से घर पर ही सब्जियों भी कर सकते हैं।
यह है विधि:
एक्वापोनिक विधि के तहत मछली के टैंक के ऊपर प्लास्टिक के गमले में कुल्हड़ को तोड़कर डाला जाता है। इन पत्थरों में पानी को सोखकर रखने की क्षमता होती है। गमले को पानी के पाइप से मछली के टैंक से जोड़ा जाता है।पानी की मोटर से मछली के टैंक का पानी ऊपर गमले में आएगा।मछली के वेस्ट सब्जियों की खेती के लिए उपयोगी है। और खेती के वेस्ट मछलियों के खाने में काम आएंगे। इस विधि को भविष्य की खेती के रुप में देखा जा रहा है।परंपरागत फसलें उगाने की अपेक्षा हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के कई लाभ है।







