नई दिल्ली, 19 जून : मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग छठे दिन भी जारी है, जिसने वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइल और हवाई हमले तेज कर दिए हैं। इजरायल के ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ और ईरान के ‘ट्रू प्रॉमिस थ्री’ के तहत दोनों पक्षों ने भारी नुकसान की बात कही है। इस बीच, अमेरिका की भूमिका और युद्ध के भविष्य को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
तेजी से बदलता रहा घटनाक्रम
- 13 जून 2025 को इजरायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए, जिसमें ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए। जवाब में, ईरान ने 100 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ तेल अवीव और यरुशलम पर हमला किया, जिससे इजरायल में एक व्यक्ति की मौत और 70 लोग घायल हुए।
- 18 जून को इजरायल ने तेहरान और बुशहर में ईरान के तेल डिपो और गैस रिफाइनरी पर हमले किए, जिससे 585 लोगों की जान गई और 1326 लोग घायल हुए।
- ईरान ने बुधवार को तेल अवीव के एक अस्पताल पर मिसाइल हमला किया, जिससे भारी नुकसान हुआ। जवाब में, इजरायल ने ईरान के सरकारी प्रसारक के मुख्यालय पर हमला किया।

तेहरान में तबाही का मंजर
तानाशाह को जीने का हक नहीं
19 जून 2025 को इजरायल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को “मॉडर्न हिटलर” करार देते हुए उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की धमकी दी। इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा, “खामेनेई जैसे तानाशाह को जीने का हक नहीं है।”
ईरान ने जवाब में इजरायल के बंदरगाह शहर हाइफा और तेल अवीव को निशाना बनाया, जिससे कई इमारतें जमींदोज हो गईं। ईरान ने यह भी चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने हस्तक्षेप किया, तो उसके मध्य पूर्व में मौजूद सैन्य ठिकानों पर हमला होगा।

अमेरिका का स्टैंड
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के हमलों का समर्थन किया है और कहा कि उन्हें हमलों की पूरी जानकारी थी। उन्होंने ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करने की मांग की, लेकिन यह भी कहा कि वह “संघर्षविराम से बड़ा कुछ” करने पर विचार कर रहे हैं।
अमेरिका ने मध्य पूर्व में F-16, F-22, और F-35 जैसे लड़ाकू विमान तैनात किए हैं और क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। हालांकि, अमेरिकी सांसद बर्नी सैंडर्स ने चेतावनी दी कि ट्रंप को सैन्य कार्रवाई के लिए संसद की मंजूरी लेनी होगी।
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी कि यदि वह युद्ध में शामिल हुआ, तो “अपूर्वीय नुकसान” होगा। दूसरी ओर, ट्रंप ने कहा, “मुझे ही पता है कि मैं क्या कदम उठाऊंगा।”
क्या युद्ध थमेगा या और भड़केगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध का भविष्य अमेरिका की भूमिका और क्षेत्रीय शक्तियों के रुख पर निर्भर करता है। ईरान ने ओमान और कतर के माध्यम से अमेरिका से युद्धविराम के लिए मध्यस्थता की अपील की है, लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा कि जंग तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान का परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता पूरी तरह नष्ट नहीं हो जाती।
संयुक्त अरब अमीरात ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से युद्ध रोकने की अपील की है, जबकि रूस और चीन ने इजरायल के हमलों की निंदा की है।
यदि अमेरिका खुलकर इजरायल का साथ देता है, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर रुकावट पैदा हो सकती है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होगी।
https://shagunnewsindia.com/iran-israel-war-missile-attack-on-mossad-headquarters-tension-at-peak/
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने युद्धग्रस्त ईरान से 110 छात्रों को सुरक्षित निकाला, जिनमें ज्यादातर कश्मीरी हैं। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। एक छात्रा ने कहा, “भारत सरकार की मदद से हम सुरक्षित वापस आए। उम्मीद है कि युद्ध जल्द खत्म होगा।”
फिलहाल, दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने कहा, “ईरानी धमकियों से नहीं डरते,” जबकि नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल “जीत की राह पर है।”
वैश्विक समुदाय युद्धविराम की मांग कर रहा है, लेकिन तनाव और हमले कम होने के बजाय बढ़ रहे हैं। मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद धूमिल होती जा रही है, और यह युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।







