“दुनिया की पुलिस” बनने का अमेरिकी दावा अब “दुनिया का दादा” बनने की हकीकत में बदलता जा रहा है। जनवरी 2026 में, जब दुनिया आर्थिक विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है, उसी रफ्तार से संघर्ष और अशांति के नए मोर्चे खुल रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच अमेरिका की आक्रामक विदेश नीति – खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में एक खतरनाक पैटर्न उजागर कर रही है: Monroe Doctrine का पुनरुद्धार, जो लैटिन अमेरिका और उसके बाहर के देशों को अमेरिकी हितों का गुलाम बनाने की कोशिश है। क्या यह महज संयोग है कि वेनेजुएला पर हमला, ग्रीनलैंड को हड़पने की धमकियां और ईरान पर हमले की तैयारी एक साथ हो रही हैं?
पिछले हफ्ते ही, 3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले किए। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को जबरन गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क लाया गया, जहां उन पर नारको-टेररिज्म और ड्रग तस्करी के आरोप लगाए गए। ट्रंप ने इसे “Absolute Resolve” ऑपरेशन बताया, लेकिन हकीकत में यह तेल और आर्थिक नियंत्रण की लड़ाई है।

अमेरिका ने पहले से ही कैरिबियन में सैन्य तैयार किया था, ड्रग ट्रैफिकिंग नावों पर हमले किए, और अब मादुरो को हटाकर वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से “समर्थन” हासिल करने का दावा कर रहा है। लेकिन क्या यह न्याय है या साम्राज्यवाद? अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकार इसे स्पष्ट उल्लंघन मानते हैं – बिना कांग्रेस की मंजूरी और UN की सहमति के।
अब अटकलें हैं कि कोलंबिया, मेक्सिको और क्यूबा अगले निशाने पर हैं, जहां ड्रग कार्टेल्स के बहाने सैन्य हस्तक्षेप की योजना बन रही है। और ग्रीनलैंड? ट्रंप ने खुले तौर पर डेनमार्क से इस द्वीप को “खरीदने” या हड़पने की बात कही, जो NATO के सदस्य देश का हिस्सा है। अगर ऐसा हुआ तो NATO का अंत हो सकता है, और यूरोप-अमेरिका में सीधा टकराव।
यह दादागिरी सिर्फ लैटिन अमेरिका तक सीमित नहीं। ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन ट्रंप के लिए एक और बहाना बन रहे हैं। अमेरिका पेंटागन से हमले की योजनाएं बना रहा है,जिसमे कि साइबर अटैक से लेकर न्यूक्लियर साइट्स पर स्ट्राइक्स तक। विरोधियों की मदद के नाम पर क्या यह ईरान को अस्थिर करने की साजिश है?
उधर, दुनिया के अन्य संघर्षों में भी अमेरिका की छाया है। यूक्रेन-रूस युद्ध चौथे साल में प्रवेश कर चुका है, जहां रूस 20% यूक्रेन पर काबिज है। हाल ही में रूस के ड्रोन और मिसाइल हमलों में दर्जनों मौतें हुईं, और अमेरिका NATO के जरिए छद्म युद्ध लड़ रहा है।
इजरायल-गाजा संघर्ष 2023 से चला आ रहा है, जहां 48,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए, और अब इजरायल-ईरान में अमेरिका शामिल हो चुका है। सीरिया में इस्लामिक स्टेट के ठिकानों पर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के हमले जारी हैं।







