बाल कविता: रुपयों के कुछ पेड़ लगा दूँ

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अरविंद कुमार ‘साहू’

मम्मी जी, कुछ सिक्के दे दो,
पैसों के कुछ पेड़ लगा दूँ ।

सुना है बारिश में कुछ बो दो,
तो जल्दी ही उग आता है,
थोड़ी खाद अगर डालो तो,
पौधा जल्दी हरियाता है,

पैसों के पौधों की खातिर,
हरी नोट पापा से लूँगा,
उनकी खाद बनाने को,
सिक्कों के नीचे रख दूँगा,

ताबड़ तोड़ बढ़ेंगे पौधे,
तुमको चमत्कार दिखला दूँ,
मम्मी जी कुछ सिक्के दे दो,
पैसों के कुछ पेड़ लगा दूँ ।

काँसे के मजबूत तनों पर,
चांदी जैसे पत्ते होंगे,
मोती के जैसे फ़ूलों पर,
सोने के कंठे लटकेंगे,

खन – खन की आवाजें होंगी
पवन झकोरे जब आयेंगे,
घर – आंगन से द्वारे तक में,
ढेरों सिक्के बिछ जायेंगे,

तुम्हें तौल दूँगा रुपयों से,
धन दौलत के ढेर लगा दूँ,
मम्मी जी ! कुछ सिक्के दे दो,
पैसों के कुछ पेड़ लगा दूँ ।

मोबाइल- 7007190413: aksahu2008@rediffmail.com

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