पुरातात्विक अवशेषों से परिचित हो रहा है पटना

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पुरातात्विक संगोष्‍ठी के दूसरे दिन  70 विद्वानों ने अपना पेपर पढ़ा

पटना, 07 फरवरी 2019: इंडियन आर्कियोलॉजिकल सोसाइटी और पुरातत्‍व निदेशालय (कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग, बिहार) के संयुक्‍त तत्‍वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्‍ट्रीय ‘वार्षिक पुरातात्विक संगोष्‍ठी’ के दूसरे दिन आज पटना म्‍यूजियम के तीनों सभागार में देशभर से आये पुरातत्‍वविद, इतिहासकार, रिसर्च और स्‍कॉलर ने परिचर्चा की।

इस दौरान उन्‍होंने पुरातात्विक संकल्‍पना, इंडियन सोसाइटी फॉर प्री-हिस्‍टॉरिक एंड क्‍वार्टनरी स्‍टडीज और हिस्‍ट्री एंड कल्‍चर सोसाइटी के बारे में विस्‍तृत जानकारी दी। इस मौके पर पुरातत्‍व निदेशालय, कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग, बिहार के निदेशक डॉ अ‍तुल कुमार वर्मा ने बताया कि यह राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी पहली बार बिहार में हो रही है। इसमें देशभर से विद्वान शामिल हो रहे हैं और हिंदुस्‍तान की पुरातात्विक धरोहर, विरासत और परंपराओं से चर्चा के दौरान लोगों को अवगत करा रहे हैं।

इससे पहले पटना म्‍यूजियम के एक सभागार में इंडियन आर्कियोलॉजिकल सोसाइटी और पुरातत्‍व निदेशालय द्वारा आयोजित परिचर्चा में किशोर कुमार ने राजगीर के पुरातत्‍व : प्रागैतिहासिक काल से बारहवीं शताब्‍दी तक, मो सरुराज आलम व के सी नौरियाल ने बौद्ध संघ के प्रतिस्‍थापन में बुद्ध का राजगृह वर्षवास : एक अनुशीलन, गौतमी भट्टाचार्य ने लखीसराय के यूरीन अन्‍वेषण, नीरज कुमार मिश्रा और वीरेंद्र कुमार ने हाल पुरातात्विक अन्वेषण, दीपक कुमार राय ने बिहार से प्राप्‍त नवपाषाण कालीन मृदभांड परंपराओं का अध्‍ययन और पवन कुमार ने बिहार बुद्धिस्‍ट साइट पर व्‍याख्‍यान दिया।

उसके बाद श्‍याम सुंदर तिवारी ने कैमूर की पहाड़ी (बिहार) की महापाषाणिक समाधियों और जनजाति संस्‍कृति, कुलभूषण मिश्रा ने मध्य गंगा मैदान के भौगोलिक दृष्टिकोण, हिमांशु शेखर ने झारखंड के मेनहीर से, साधना द्विवेदी ने मधुबनी : बिहार की समृद्ध लोक कला एवं चित्रकला, गार्गी चटर्जी और अमित सिंह ने विंध्य क्षेत्र के मीज़ोलिथिक सेटलर्स की सब्सिडी रणनीति और पी पी जोगलेकर व बिजोय कुमार चौधरी ने नवपाषाण से जीविका बनी पनेर पर ज्ञानवर्द्धक चर्चा की।

इसके अलावा तेजस एम गर्ग, रहुतविज आर आप्‍टे, सुधीर, सुमन पांडया, परेश पटेल, गुरूदास शेटी, एन निहीलदास, योगेश मल्‍लीनाथपुर, आर के मोहंती, मोनिका एल स्मिथ, शंतनु वैद्य, सुजीत कुमार, विराग सोनटके, श्रीकांत गनवीर, एच ए नाइक, शंकर शर्मा, एन तहीर, शिखा गांगुली, स्‍वतंत्र कुमार सिंह और मनमोहन तुली भी परिचर्चा में शामिल हुए।

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