प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन किया। यह पांच दिवसीय (16 से 20 फरवरी तक) वैश्विक कार्यक्रम भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा इंडिया एआई मिशन की पहल है। यह ग्लोबल साउथ में आयोजित होने वाला पहला बड़ा एआई समिट है, जिसमें 100+ देशों के प्रतिनिधि, 20+ राष्ट्राध्यक्ष/प्रधानमंत्री (जैसे फ्रांस के इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के लुला, स्पेन के पीड्रो सांचेज आदि), टेक दिग्गज (जैसे ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, गूगल के सुंदर पिचाई) और 500+ वैश्विक एआई लीडर्स शामिल हैं।

समिट की थीम “सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय” (सभी के कल्याण के लिए, सभी के सुख के लिए) है, जो प्राचीन भारतीय मूल्यों पर आधारित है। यह तीन सूत्रों – People, Planet, Progress – पर टिका है, यानी एआई मानवता की सेवा करे, पर्यावरण की रक्षा करे और समावेशी प्रगति लाए। साथ ही सात चक्र (chakras) के माध्यम से वैश्विक सहयोग के क्षेत्र जैसे पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ, एजुकेशन आदि पर फोकस है। एक्सपो में 600+ स्टार्टअप्स, 300+ प्रदर्शक और 30+ देशों के पवेलियन हैं, जहां “स्मॉल एआई” (कम संसाधनों में चलने वाले व्यावहारिक समाधान) पर जोर है।
समिट का उद्देश्य एआई को सिर्फ चर्चा से आगे ले जाकर वास्तविक प्रभाव (demonstrable impact) दिखाना है – जैसे रोजगार सृजन, स्वास्थ्य सुधार, शिक्षा पहुंच, गरीबी उन्मूलन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट। हालांकि पहले दिन भीड़ और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां रहीं, लेकिन यह भारत की एआई लीडरशिप और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने का मंच है।
AI का भारतीय मॉडल : सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय
इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 सिर्फ एक तकनीकी आयोजन नहीं, बल्कि भारत की एक सभ्यतागत सोच का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी के उद्घाटन के साथ शुरू हुआ यह महाकुंभ “सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय” की भावना से ओतप्रोत है – यानी एआई का विकास और उपयोग हर व्यक्ति के कल्याण और सुख के लिए हो, न कि सिर्फ अमीरों या बड़े शहरों के लिए।
आज दुनिया एआई क्रांति के दौर से गुजर रही है, जहां यह नौकरियां छीनने का डर भी पैदा कर रही है और नई संभावनाएं भी खोल रही है। लेकिन भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हम एआई को “इंसान-केंद्रित” (human-centric) बनाएंगे। समिट में “स्मॉल एआई” पर फोकस इसी का प्रमाण है जो ऐसे सस्ते, मोबाइल-फ्रेंडली समाधान जो ग्रामीण इलाकों में कम इंटरनेट और बिजली पर भी काम करें। कल्पना कीजिए: किसान को फसल की बीमारी का पता एआई ऐप से लगे, छात्र हिंदी में पढ़ाई करे, डॉक्टर दूर-दराज के मरीज का इलाज करे, और महिलाएं सुरक्षित व्यापार करें जो ये सब “सर्वजन सुखाय” के उदाहरण हैं।
इस समिट से आम लोगों को कई ठोस फायदे मिल सकते हैं:
- शिक्षा और स्किलिंग में क्रांति: एआई ट्यूटर्स से लाखों युवा सस्ती, व्यक्तिगत शिक्षा पा सकेंगे, खासकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में।
- स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत: एआई से डायग्नोसिस तेज होगी, दवाइयां सस्ती होंगी, और महामारी जैसी चुनौतियों से पहले तैयारी संभव होगी।
- रोजगार और अर्थव्यवस्था: नए स्टार्टअप्स, एआई जॉब्स (जैसे डेटा एनालिस्ट, एआई एथिक्स एक्सपर्ट) और उत्पादकता बढ़ने से करोड़ों नौकरियां पैदा होंगी। “स्मॉल एआई” से छोटे व्यवसाय भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
- समावेशी विकास: एआई को जेंडर, क्षेत्र और भाषा के आधार पर समान अवसर देने पर जोर – जैसे महिलाओं के लिए एआई-आधारित सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण।
- पर्यावरण संरक्षण: एआई से जलवायु मॉडलिंग, प्रदूषण नियंत्रण और सस्टेनेबल फार्मिंग में मदद मिलेगी, जो “प्लैनेट” सूत्र को मजबूत करेगा।
लेकिन चुनौतियां भी हैं – डेटा प्राइवेसी, जॉब लॉस का डर, और एआई का दुरुपयोग। समिट इन पर ग्लोबल गवर्नेंस और जिम्मेदार एआई (responsible AI) की रूपरेखा तैयार कर रहा है। भारत का मॉडल दुनिया को दिखा रहा है कि तकनीक अमीरों की संपत्ति नहीं, बल्कि सभी के लिए साधन हो सकती है।
वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें – https://x.com/i/status/2023412951424872456
https://x.com/i/status/2023623622389370999
युवाओं, किसानों, महिलाओं और छोटे उद्यमियों के लिए यह समिट एक नई सुबह है। सरकार, इंडस्ट्री और समाज मिलकर एआई को “सर्वजन हिताय” बनाएं, तो भारत न सिर्फ तकनीकी महाशक्ति बनेगा, बल्कि दुनिया को एक बेहतर, समान और सुखी भविष्य देगा। आइए, इस भावना को अपनाएं और एआई को भारत की प्रगति का माध्यम बनाएं – क्योंकि सच्ची प्रगति तभी है, जब वह हर किसी तक पहुंचे।







