- बने चाहे दुश्मन जमाना हमारा, सलामत रहे दोस्ताना हमारा
- कोई जब राह न पाए मेरे संग आए के पग-पग दीप जलाए, मेरी दोस्ती मेरा प्यार..।
यह फिल्मी गाने की पंक्तियां तो आपने जरूर सुनी होंगी। इन पंक्तियों में दोस्ती का एक अहम जज्बा छिपा है। इसमें दोस्त के प्रति प्रेम और उसे न जुदा होने देने की दुआ है वास्तव में, दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है, जिसे इंसान दुनिया में आने के बाद स्वयं बनाता है।
अपनी पसंद और अपनी इच्छा अनुसार दोस्ती को सम्मान देने के लिए इन दिनों फ्रेंडशिप डे मनाने की परंपरा पश्चिमी देशों की तर्ज पर भारत में तेजी से बढ़ी है हालांकि यह जज्बा हम भारतीयों के मूल में है दोस्ती दिवस पर जब हमने विभिन्न आयु वर्ग के कुछ दोस्तों की कहानी उन्हीं की जुबानी सुनी तो प्रत्येक वर्ग से अलग-अलग तस्वीर उभरकर सामने आई आइए जानते हैं उन बेहतरीन लम्हों और सच्ची दोस्ती के किस्सों के बारे में-
कहते हैं उम्र के साथ दोस्ती भी जवां होती है कुछ इसी तरह से उम्र के साथ- साथ दोस्ती भी बढ़ती है जिसमें दो दोस्तों की आपस में समझ बूझ ईमानदारी और एक दूसरे पर की गई निर्भरता और विश्वास यह सब मिलकर बचपन की दोस्ती को पहले ताजा और फिर उम्र के साथ-साथ यादगार भी बनाते हैं। कुछ ऐसी ही मिसाल हैं दो दोस्त की कहानी भी।
दोस्त बृजेश नाथ और गोपाल जी की आज यह दोस्ती ही नाते पोते वाली हो गयी हैं लेकिन इनकी दोस्ती आज भी वैसी ही बरकरार है जैसे सालों पहले थी। बचपन से जवानी तक और जवानी से प्रौढ़ावस्था तक, दोनों एक मोहल्ले में एक साथ -साथ रहे। दोनों दोस्तों के एक ही शौक एक ही स्वभाव एक ही पसंद और सबसे खास बात यह है कि एक ही दोस्त हैं, यानी कि वह दोनों खुद आपस के दोस्त।
दोस्ती के बारे में पूछने पर बृजेश जी कहते हैं कि दोस्ती सबसे अच्छी प्रेरणा है। दोस्तों के लिए अपने दोस्त की खुशी में चाहे एक बार मत शामिल हो लेकिन उसके दुख को हमेशा अपना ही दुख मानना चाहिए। साथ ही दोस्ती का मतलब समझने के लिए सबसे बढ़िया वक्त भी दुख का ही होता है। मेरे दोस्त ने मेरी आर्थिक, मानसिक व हर तरह से सहायता की है। एक समय था जब मैं काफी टूट गया था। उस वक्त मुझे रिश्तेदारों से ज्यादा गोपाल का साथ मिला। एक वह था और एक यह वक्त है जिसे मैं कभी भुला नहीं सकता।

पसंदीदा ना पसंदीदा आदत के सवाल पर बृजेंद्र जी मुस्कुराकर कहते हैं कि गोपाल की एक आदत हमेशा से मुझे ना पसंद है कि वह किसी भी पार्टी में नहीं जाता है। जो मझे अखरती है। उसके चक्कर में मेरी कई पार्टिया मिस हो गयीं। इधर गोपाल जी भी बृजेंद्र जी की तरह काफी मिलनसार और खुशमिजाज इंसान हैं। वह बताते हैं कि हमारे दोनों के शौक एक ही हैं जैसे पतंगबाजी, कैरम खेलना और गाना सुनना बचपन से ही हम लोग ज्यादातर साथ ही रहते हैं। बृजेंद्र हमेशा से काफी लंबे तगड़े रहें और मोहल्ले में उनका रौब काफी अच्छा रहा, उनका रुतबा भी काफी अच्छा था इसलिए मुझे अपने दोस्त पर हमेशा से काफी गर्व रहा है।
इसी प्रकार एक और दोस्त हैं अपनी दोस्ती की अर्धसती पूरी कर चुकी हैं इन लोगों की तरह अपनी दोस्ती को और प्रगाढ बनाए रखना चाहती हैं। शोभना और साधना कहती हैं कि अभी हमारी दोस्ती दूज के चांद से बढ़कर अब पूर्णिमा के पूरे चमकते चांद की तरह रही है। यह चमक हमारी दोस्ती में आज तक बरकरार है और हमेशा रहेगी। यह मानना है एलडीए कॉलोनी में रहने वाली सपना का सपना की नजर में दोस्ती एक विश्वास है हर कदम पर साथ देने वाला ही सच्चा मित्र होता है। वह बताती हैं कि साधना उनकी सबसे अच्छी दोस्त है जिन्होंने उनका ऐसे समय में साथ दिया जब वह अपनी जिंदगी से हार मान चुकी थी। उस समय साधना मेरी हमदर्द, बहन और सच्ची मित्र बन कर सामने आयी। मुझे गर्व है कि साधना मेरी दोस्त है मैं तो यही चाहती हूं कि मेरी बेटी ईशा भी हमारी दोस्ती को यूंही बढ़ाते रहें। मेरी नजर में दोस्ती सच्चाई है ऐसा विश्वास जिसे लोग अंधविश्वास का नाम देने में लगे हैं। मैं भगवान के बाद किसी रिश्ते को मानती हूं तो वह दोस्ती ही है।
दो दोस्तों के बीच जिंदगी भर चलने वाला रिश्ता दोस्ती का है इस बंधन में बंधने के बाद भी आप अपने आप को पूरी तरह स्वतंत्र महसूस करते हैं। एक अमीर और गरीब को सफलतापूर्वक रिश्ते में बांधे रखने का काम ही दोस्ती है। ऐसा मानना है अलीगंज में रहने वाले दीपक का। दीपक का कहना है कि जिंदगी में दोस्ती तो बहुत बार होती है लेकिन सच्चा दोस्त एक ही बार बनता है।

मेरे जैसा संकुचित बुद्धि वाला इंसान दोस्ती बहुत कम लोगों से करता है। मुझे लोगों ने दोस्ती के नाम पर बहुत धोखे दिए हैं लेकिन अखिलेश मेरा एक ऐसा अकेला दोस्त है। जिस पर मैं अपने परिवार के अलावा आंख बंद करके विश्वास कर सकता हूं। मुझे उसमें सबसे अच्छी आदत यह लगती है कि वह बहुत ईमानदार और केयरिंग है। बस उसमें एक कमी है कि वह रात 10:00 बजे के बाद उसे अपने घर की याद सताने लगती है जिससे हमारी जिंदगी की कितनी पार्टियां बेकार हो जाती हैं। दीपक बताते हैं कि दोस्ती तो बहुत लोगों से हुई लेकिन अखिलेश से दोस्ती करने में जो एहसास हुआ। वह आज तक किसी से नहीं हुआ। उनकी इस बात से सहमत मौलवी गंज के अखिलेश कहते हैं कि दोस्ती की नहीं जाती बस हो जाती है। इसके बारे में कुछ और नहीं कहना चाहता हूं। दोस्ती को बनाए रखने के लिए आपसी समझ और तालमेल सही बैठना बहुत जरूरी है। दीपक बहुत हिम्मती है वह बड़ी से बड़ी परेशानी को बहुत सरलता से निपटा देता है।
अखिलेश बताते हैं कि एक बार मेरा एक्सीडेंट बाराबंकी में हो गया था मैंने दीपक को लखनऊ में फोन करवाया और बेहोश हो गया। जब मेरी आंख खुली तो मेरे पास सिर्फ दीपक ही था। मेरे एक फोन पर वह अपना बहुत जरूरी काम छोड़कर मेरे पास आ गया था। वह पल आज भी उसकी सच्ची मित्रता का एहसास कराता है इसलिए दीपक मेरा सबसे अच्छा दोस्त है।
दोस्ती में दो इंसान खुली किताब की तरह एक दूसरे के सामने होते हैं। लखनऊ के मशक गंज में रहने वाले अनुराग बताते हैं कि मेरे और केशु में कुछ भी नहीं छुपा है। मैं उसके सामने और वह मेरे सामने खुली किताब जैसे हैं। केशु मेरे बचपन का दोस्त है और सच्चा दोस्त वही है जिससे आपका बार-बार मिलने को मन करता है। दोस्ती विश्वास है अगर आप अपने दोस्त पर विश्वास नहीं कर सकते तो आप जिंदगी में किसी पर विश्वास करने लायक भी नहीं है। स्वार्थी लोग सब काम पड़ने पर नजर आते हैं लेकिन दोस्त हर काम में आपके साथ होता है। केशु बहुत ही मददगार है मुझे उसका स्वभाव हमेशा अपनी ओर आकर्षित करता है।
वह कहते हैं की उसकी कमी बता पाना तो मुश्किल है हां पर वह बहुत ही लूज़ टेम्पर हैं वह बहुत जल्दी भड़कता है। इस बात पर मुस्कुराते हुए वह बताते हैं कि मैं गलत बात बर्दाश्त नहीं कर पाता और मेरा झगड़ा हो जाता है। कितनी जगह अनुराग ने मुझे शांत कराया। अब मैं अपने आप को बदल रहा हूं। तो सिर्फ आज के लिए मेरा दोस्त मुझसे कुछ मना करें और मैं ना करूं ऐसा कभी हो ही नहीं सकता। मुझे अपने घर से ज्यादा अनुराग के पास सुकून मिलता है मैं हर चीज़ अपनी उससे शेयर करता हूँ । उसका परिवार मेरा आस पास ही रहता है एक बार की बात है अनुराग को बाहर पढ़ने के लिए भेजा जा रहा था, तो मैं अकेले में इतना रोया कि मुझे खुद नहीं पता कि मैं कब तक रोता रहा। मुझे लगा कि मेरी सबसे प्यारी चीज मुझसे जबरदस्ती अलग की जा रही है।
– सोनिका श्रीवास्तव, नीतू सिंह







