‘ट्रंप की NATO आलोचना पर मेलोनी का व्यंग्य, ग्रीनलैंड पर यूरोप में बढ़ती टेंशन
नई दिल्ली। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस टिप्पणी पर तीखा लेकिन मजाकिया जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका के बिना NATO का कोई मतलब नहीं रह जाता। 9 जनवरी 2026 को रोम में न्यू ईयर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मेलोनी ने यूरोप में कुछ लोगों की तरफ से अमेरिका से दूरी बनाने की मांग पर कटाक्ष किया। उन्होंने पूछा, “क्या मतलब दूरी बनानी है? क्या हमें NATO छोड़ देना चाहिए, अमेरिकी मिलिट्री बेस बंद कर देना चाहिए, ट्रेड रिलेशंस तोड़ देना चाहिए, या फिर मैकडॉनल्ड्स पर हमला कर देना चाहिए? मुझे नहीं पता क्या करना चाहिए!”
यह व्यंग्य ट्रंप की उस बात के जवाब में आया जहां उन्होंने NATO को अमेरिका पर निर्भर बताया। मेलोनी, जो यूरोप में ट्रंप की सबसे करीबी सहयोगी मानी जाती हैं, ने स्पष्ट किया कि असहमति सामान्य है, लेकिन रिश्ते तोड़ना व्यावहारिक नहीं। उन्होंने ग्रीनलैंड मुद्दे पर ट्रंप से असहमति जताई, लेकिन वेनेजुएला जैसे अन्य मुद्दों पर समर्थन दिया।

दावोस में ट्रंप का ग्रीनलैंड पर दो टूक: “बर्फ का टुकड़ा दें, वरना याद रखेंगे”
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दावोस सत्र (21 जनवरी 2026) में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपना स्टैंड फिर दोहराया। उन्होंने कहा, “हम दुनिया की सुरक्षा के लिए बर्फ का एक टुकड़ा चाहते हैं, और वे देने को तैयार नहीं। हमने कभी कुछ और नहीं मांगा। हम उस जमीन को रख सकते थे, लेकिन नहीं रखा। अब उनके पास विकल्प है या तो हां कहें और हम सराहना करेंगे, या न कहें और हम इसे याद रखेंगे।”
ट्रंप ने जोर दिया कि वे फोर्स का इस्तेमाल नहीं करेंगे, लेकिन ग्रीनलैंड को आर्कटिक सिक्योरिटी के लिए जरूरी बताया। उन्होंने डेनमार्क को “कृतघ्न” कहा और WWII के संदर्भ में पुरानी बातें छेड़ीं। यह बयान यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ा रहा है, जहां ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति ट्रांसअटलांटिक गठबंधन को चुनौती दे रही है।
यह पूरा विवाद NATO, आर्कटिक सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों को उजागर कर रहा है। मेलोनी का व्यंग्य यूरोप की बढ़ती बेचैनी को दिखाता है, जबकि ट्रंप की बातें पुराने सहयोगियों के बीच नई दरार पैदा कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में ये दिन काफी दिलचस्प हो गए हैं!






